उत्तर प्रदेश: मासूम से दरिंदगी करने वाले आरोपी को फांसी की सजा

उत्तर प्रदेश: मासूम से दरिंदगी करने वाले आरोपी को फांसी की सजा

उत्तर प्रदेश। बुलंदशहर जिले के जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के एक गांव में चार साल की बच्ची से दुष्कर्म व हत्या की वारदात के 94वें दिन पुलिस और न्याय प्रणाली की सक्रियता के चलते स्वजन को न्याय मिल गया। न्यायालय विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधि.) अपर सत्र न्यायाधीश ध्रुव राय ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। दोषी को कोर्ट से जिला कारागार भेज दिया गया है। दुष्कर्म और हत्या में दोषी होने पर एक लाख तथा साक्ष्य छिपाने और झूठी जानकारी देने पर 20 हजार का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड की समस्त धनराशि 1 लाख 20 हजार रुपये मृतका के माता-पिता को दी जाएगी।

क्या है मामला?

बुलंदशहर के थाना जहांगीराबाद क्षेत्र के एक मोहल्ले की रहने वाली 4 वर्षीय मासूम बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। इसी साल 23 अप्रैल को पड़ोसी युवक, जो रिश्ते में चाचा लगता है, वह बच्ची को बहला-फुसलाकर घर ले गया था। परिजनों द्वारा दर्ज कराए गए एफआईआर के अनुसार, आरोपी ने पहले बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी। परिवार के लोगों ने पहले बच्चे को काफी ढूंढा था। जब बच्ची का कोई सुराग नहीं लगा तो पड़ोस वाले घर के लोगों पर शक हुआ। गली के लोगों ने एकत्र होकर पड़ोसी का घर खुलवाया था। दरिंदगी करने वाला युवक अपने घर में बच्चे की नहीं होने की बात अड़ा रहा। भीड़ जबरदस्ती उसके घर में घुस गई और देखा कि पेड़ के नीचे बच्ची खून से लथपथ मरी हुई पड़ी थी। लोगों ने जहांगीराबाद थाना पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस ने बच्ची के शव का पोस्टमार्टम करवाया था। लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया था और उसकी जमकर पिटाई की थी। जिसके बाद उसे कई दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा था।

पॉक्सो कोर्ट ने तीन महीने में सुनाई सजा

बुलंदशहर पुलिस ने आरोपी फहीम को गिरफ्तार कर महज 14 दिन में उसके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश की, इसके बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) ध्रुव रॉय की कोर्ट ने मामले में त्वरित सुनवाई शुरू कर दी। अदालत ने फहीम को दोषी करार दिया और बुधवार को उसे फांसी की सजा सुनाई। इस मामले में कुल 8 गवाहों को पेश किया गया था।

आरोपी की जान लेने पर उतारू थी भीड़

जहांगीराबाद में 23 अप्रैल 2023 की देर रात करीब 9:30 बजे 4 साल की मासूम बच्ची पड़ोसी फहीम के घर में मिली। रेप के बाद हत्या का पता चला तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। मोहल्ला ही नहीं, पूरे नगर के लोग मौके पर जुट गए। हर कोई उसे मौके पर ही सजा देना चाहता था। लोगों ने जैसे ही आरोपी को देखा उसे मारने-पीटने दौड़ पड़े। मौके पर ही उसकी जमकर पिटाई की। पुलिस ने लोगों से किसी तरह उसे छुड़ाकर हिरासत में लिया था।

आरोपी अपनी भतीजी से करने वाला था रेप

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि आरोपी अपनी सगी भतीजी के साथ भी रेप करने वाला था। कुछ ही दिन पहले वह अपनी भतीजी को झूठ बोलकर स्कूल से ले आया और पास के ही जंगल में ले गया था। शक के आधार पर स्कूल का एक शिक्षक फहीम का पीछा कर रहा था। जब उन्हें बच्चे के साथ गलत करते हुए देखा तो शिक्षक ने शोर मचा दिया, और फहीम वहां से भाग गया। इस घटना के बाद से फहीम का भाई अपने परिवार के साथ अलग रहने लगा।

छोटे बच्चों के खिलाफ रेप और हिंसा के मामलों पर क्या कहता है एनसीआरबी का डाटा!

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक देश में साल 2021 में बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध के 1,49,404 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 53,874 मामले पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुए हैं, जो कि कुल मामलों का करीब 36 प्रतिशत है।

भारत में यौन शोषण के शिकार हुए बच्चों की एक बड़ी संख्या है। पॉक्‍सो यानी प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन अगेंस्ट सेक्सुअल ऑफेंस जैसे कड़े कानून होने के बावजूद इस ग्राफ में साल दर साल इजाफा हो रहा है। महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक में इस तरह के घिनौने अपराधों का जाल फैलता रहा है। हाल ही में जारी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की साल 2021 की रिपोर्ट बताती है कि देश में बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक देश में साल 2021 में बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध के 1,49,404 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 53,874 मामले पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुए हैं, जो कि कुल मामलों का करीब 36 प्रतिशत है। साल 2020 में 1,28, 531 मामले दर्ज हुए थे। जबकि साल 2019 में ये आंकड़ा 1,48,185 था।

(एनसीआरबी) की वार्षिकी के मुताबिक भारत में पिछले चार साल में बच्चों के खिलाफ 5,67,789 अपराध दर्ज किए गए। इनमें पॉक्सो एक्ट के तहत करीब 1,88,257मामले दर्ज हुए। यौन हिंसा और यौन शोषण की वारदात सबसे अधिक 16 से लेकर 18 वर्ष की लड़कियों के साथ हुईं। वहीं सबसे ज्यादा मामले मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर-पूर्वी राज्यों में बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले सबसे कम रहे।

पॉक्सो का कठोर कानून और इसका ढीला क्रियान्वयन

गौरतलब साल 2012 में भारत में बच्चों को यौन हिंसा से बचाने वाला क़ानून (पॉस्को) बनाया गया ताकि बाल यौन शोषण के मामलों से निपटा जा सके लेकिन इसके तहत पहला मामला दर्ज होने में दो साल लग गए। साल 2014 में नए क़ानून के तहत 8904 मामले दर्ज किए गए लेकिन उसके अलावा इसी साल नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो ने बच्चों के बलात्कार के 13,766 मामले; बच्ची पर उसका शीलभंग करने के इरादे से हमला करने के 11,335 मामले; यौन शोषण के 4,593 मामले; बच्ची को निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला या शक्ति प्रयोग के 711 मामले; घूरने के 88 और पीछा करने के 1,091 मामले दर्ज किए गए। ये आंकड़े बताते हैं कि बाल यौन शोषण के अधिकतर मामलों में पॉस्को लगाया ही नहीं गया।

सिर्फ क़ानून बनाने से रुकेगा अपराध?

आंकड़ों, अपराध की प्रवृत्ति, पुलिसिया रवैया और समाज की भूमिका को देखने के बाद यह बात साफ तौर से कही जा सकती है कि बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाओं में सिर्फ इजाफा ही नहीं हो रहा है बल्कि ऐसी घटनाएं इतनी तेजी से बढ़ रही हैं कि उन्हें सिर्फ कानून बनाकर रोक पाना असंभव है। इसके लिए हमें एक बड़े सामाजिक आंदोलन की जरूरत है जिससे सभी पक्षों को जागरूक किया जा सके।

हालिया आंकड़ों से भी साफ है कि अदालतों में बच्चों के प्रति हुए अपराधों में से ज़्यादातर का निराकरण नहीं हो रहा है। लापरवाही, कमज़ोर जांच, असंवेदनशीलता और भ्रष्टाचार के कारण समय से चार्जशीट ही नहीं दायर की जा रही है।

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