
छत्तीसगढ़। मणिपुर हिंसा को लेकर संसद में चल रहे विवाद के बीच राज्यसभा में छत्तीसगढ़ के कई समुदायों को अनुसूचित जनजाति की लिस्ट में शामिल करने का बिल पेश किया गया। लंच के बाद जब राज्यसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक, 2022 को विचार और पारित करने के लिए पेश किया गया। इस दौरान विपक्षी नेताओं ने इसका विरोध किया और कहा कि पहले सदन में मणिपुर पर सरकार को जवाब देना चाहिए। सरकार का कहना है इस विधेयक से 72 हजार लोगों को लाभ मिलेगा। वहीं सरकार ने सोमवार को लोकसभा में संविधान अनुसूचित जाति आदेश संशोधन विधेयक 2023 पेश किया था। जिसमें छत्तीसगढ़ के महरा तथा महारा समुदायों को अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है।
दरअसल 25 जुलाई को छत्तीसगढ़ की विभिन्न जातियों को एसटी का दर्जा देने का विधेयक पेश किया गया। इस विधेयक को लेकर विपक्ष सरकार पर हावी था और लगातार मणिपुर में हुई हिंसा को लेकर हंगामा कर रहा था। माना जा रहा है छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव और 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर सरकार लगातार दलितों और वंचितों के हितों को लेकर नए कानून और बिल पास कर रही है। मध्य प्रदेश का सीधी कांड और हाल में ही मणिपुर में हुई घटना को लेकर सरकार डैमेज कंट्रोल में जुटी है। इसी बीच यह बिल भी पेश किया गया है।
छत्तीसगढ़ के धनुहार, धनुवार, किसान, सौंरा और बिंझिया समुदायों को राज्य में अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने के लिए राज्यसभा में ये विधेयक पेश किया गया। राज्यसभा में विधेयक का संचालन करते हुए केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि "विधेयक के पारित होने से छत्तीसगढ़ के लगभग 72,000 लोगों को लाभ होगा।" उन्होंने कहा, "यह एक छोटी संख्या है। लेकिन यह आदिवासियों के कल्याण के प्रति सरकार की संवेदनशीलता के बारे में बताती है।" वहीं मणिपुर पर चर्चा की मांग को लेकर सदन में नारेबाजी कर रहे विपक्षी सदस्यों ने शोर-शराबे के बीच विधेयक के पारित होने पर आपत्ति जताई और सदन से वॉकआउट कर दिया।
विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मणिपुर मुद्दे को उठाने के लिए खड़े होकर कहा कि वो छत्तीसगढ़ को लेकर पेश किए इस विधेयक का समर्थन करते हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में आना चाहिए और पूर्वोत्तर राज्य में हिंसा पर बोलना चाहिए। इस दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि खरगे का माइक बंद कर दिया गया और उन्हें अपनी बात पूरी नहीं करने दी गई।
अवगत करा दें पिछले साल दिसंबर में, लोकसभा ने ध्वनिमत से संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक, 2022 पारित किया था। विधेयक छत्तीसगढ़ में धनुहार, धनुवार, किसान, सौंरा और बिंझिया समुदायों को अनुसूचित जनजातियों (एसटी) की सूची में शामिल करने की सिफारिश की जा रही थी। लंबे समय से ये तमाम समुदाय एसटी दर्जे की मांग कर रहे थे। और लोकसभा ने दिसंबर 2022 में इस विधेयक को मंजूरी दी थी। अब राज्यसभा से पारित होने के बाद ये विधेयक राष्ट्रपति के पास जाएगा। उनके हस्ताक्षर के बाद ये कानून बन जाएगा। राज्यसभा में पास हुए इस विधेयक के अपने राजनीतिक मायने भी हैं। छत्तीसगढ़ में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। यहां की कुल 90 विधानसभा सीटों में से 39 सीटें आरक्षित हैं। इन सीटों में 29 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) और 10 सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार ने सोमवार को लोकसभा में 'संविधान अनुसूचित जातियां आदेश संशोधन विधेयक, 2023' पेश किया। इस विधेयक में छत्तीसगढ़ में महरा और महारा समुदायों को अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है। लोकसभा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेन्द्र कुमार ने 'संविधान अनुसूचित जातियां आदेश संशोधन विधेयक, 2023' पेश किया। इस दौरान मणिपुर के मुद्दे पर विपक्षी सदस्य शोर-शराबा कर रहे थे। इसमें कहा गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने अनुसूचित जातियों की सूची में महरा और महारा समुदायों को सम्मिलित करने का प्रस्ताव किया है। भारत के महापंजीयक तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने प्रस्ताव पर अपनी सहमति प्रदान कर दी है। इस विधेयक में कहा गया है कि परिवर्तन को प्रभावी बनाने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य के संबंध में संविधान अनुसूचित जातियां आदेश 1950 में संशोधन करना आवश्यक है। विधेयक के वित्तीय ज्ञापन में कहा गया है कि विधेयक छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जातियों की सूची में 'महरा' और 'महारा' समुदाय को सम्मिलित करने के लिए है।
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