राजस्थान: वरिष्ठ पत्रकार के साथ हुए प्रशासनिक अन्याय के विरुद्ध लामबंद हो रहे पत्रकार संगठन

वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र सिंह को न्याय दिलाने के लिए मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा,प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग
IFWJ के प्रतिनिधिमंडल ने फेडरेशन के प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव गौड़ के नेतृत्व राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को ज्ञापन सौंपकर जैसलमेर में वरिष्ठ पत्रकार के साथ हुए  प्रशासनिक अन्याय की निष्पक्ष जांच की मांग की।
IFWJ के प्रतिनिधिमंडल ने फेडरेशन के प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव गौड़ के नेतृत्व राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को ज्ञापन सौंपकर जैसलमेर में वरिष्ठ पत्रकार के साथ हुए प्रशासनिक अन्याय की निष्पक्ष जांच की मांग की।
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जोधपुर- इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) के प्रतिनिधिमंडल ने फेडरेशन के प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव गौड़ के नेतृत्व राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को ज्ञापन सौंपकर जैसलमेर में वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र सिंह राठौड़ के साथ हुए प्रशासनिक अन्याय की निष्पक्ष जांच की मांग की।

इंडियन फेडरेशन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट के जिला अध्यक्ष प्रदीप जोशी ने जानकारी देते हुए कि इस मौके पर पत्रकार मुकेश श्रीमाली, मनीष दाधीच, ईश्वर सिंह उदावत, कृष्णा गौड़, सुमित देवड़ा एवं पुनीत माथुर भी उपस्थित रहे।ज्ञापन में बताया गया कि जैसलमेर में वर्ष 2004 से संचालित "स्वाद रेस्टोरेंट" को प्रशासन द्वारा बिना उचित नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के ध्वस्त कर दिया गया, जिससे पत्रकार राठौड़ को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। संगठन ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला बताते हुए उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

IFWJ ने मुख्य सचिव से पीड़ित पत्रकार को उचित मुआवजा दिलाने तथा उनकी आजीविका पुनः स्थापित करने की भी मांग की। संगठन का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं न केवल पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती हैं।ज्ञापन सौंपने के बाद संगठन ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस मामले में सकारात्मक पहल करते हुए न्याय सुनिश्चित करेगी।

क्या है विवाद

आपको बता दें उपेंद्र सिंह राठौड़ पिछले लगभग 22 वर्षों से जैसलमेर में विधिवत अनुमति के साथ “स्वाद रेस्टोरेंट” का संचालन कर रहे थे। उन्होंने अपने निजी खर्च पर व्यवसाय विकसित किया और नियमित रूप से सभी देयकों का भुगतान भी किया। इसके बावजूद नवंबर 2025 में बिना किसी लिखित आदेश के केवल मौखिक रूप से तीन दिन में रेस्टोरेंट खाली करने के निर्देश दिए गए, जिसे पत्रकार संगठनों ने पूरी तरह मनमाना और असंवैधानिक बताया।

न्यायालय से स्थगन आदेश मिलने के बाद भी प्रशासनिक दबाव और कार्रवाई का सिलसिला नहीं रुका। 23 दिसंबर 2025 को प्रशासन द्वारा गैस सिलेंडर जब्त करना, किचन सील करना, लाइसेंस नवीनीकरण रोकना और ग्राहकों को हतोत्साहित करने जैसी कार्रवाई की गई। इसके बाद 18 फरवरी को सिजिग और फिर 17 मार्च को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में रेस्टोरेंट के पीछे की दीवार तोड़कर जेसीबी मशीनों से पूरे ढांचे को ध्वस्त कर दिया गया, जिससे करीब सवा करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

पत्रकार संगठनों ने इसे एक स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकार की आवाज को दबाने का प्रयास बताया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई न केवल व्यक्तिगत द्वेष से प्रेरित प्रतीत होती है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। ज्ञापन में दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और राठौड़ को आर्थिक नुकसान की भरपाई दिलाने की मांग की गई है।

IFWJ के प्रतिनिधिमंडल ने फेडरेशन के प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव गौड़ के नेतृत्व राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को ज्ञापन सौंपकर जैसलमेर में वरिष्ठ पत्रकार के साथ हुए  प्रशासनिक अन्याय की निष्पक्ष जांच की मांग की।
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