OPINION: 'शिक्षक दिवस' के रूप में क्यों नहीं मनाना चाहिए डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिन?

रूढ़िवादी विचारधारा, साहित्यिक चोरी के आरोप और जाति-व्यवस्था का समर्थन: जानिए किन ऐतिहासिक और वैचारिक कारणों से डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाने का विरोध होता है।
Teachers Day Controversy, Dr Vikram Harijan Column
इलाहाबाद विश्विद्यालय के प्रोफेसर डॉ. विक्रम बताते हैं कि, डॉ. राधाकृष्णन की रूढ़िवादी सोच, साहित्यिक चोरी के आरोप और जाति-व्यवस्था पर उनके विचारों को जानकर समझिए कि उनका जन्मदिन शिक्षक दिवस क्यों नहीं होना चाहिए।
Published on

शिक्षक दिवस (Teacher's Day) का अर्थ है- शिक्षकों के योगदान, ज्ञान, मार्गदर्शन और समाज-निर्माण में उनकी भूमिका का सम्मान करने का दिन. यह दो अर्थों में बहुत ही महत्वपूर्ण है;

i) ज्ञान के उत्पादन के संबंध में (Production of knowledge)

ii) Pedagogy (शिक्षणशास्त्र) और Teaching Method (शिक्षण पद्धति) के संदर्भ में.

ज्ञान के उत्पादन (Production of knowledge)

ज्ञान के उत्पादन से तात्पर्य है कि प्रश्नों, अनुभवों, शोध, संवाद, प्रमाण और व्याख्या के माध्यम से ज्ञान का उत्पादन करना और पुनः एक शिक्षक के रूप में knowledge को Transmit करना. Transmit Pedagogy और Teaching Method के माध्यम से transfer किया जाता है।

इतना ही नहीं बल्कि शिक्षकों, बच्चों से प्रश्न उठाने, उनको सोचने की प्रेरणा, तुलना, वाद-विवाद में भाग लेना, Existing knowledge को Challenge करना, नए interpretation को विकसित करना, नए इतिहास लेखन को विकसित करना तथा किताबों, जनरल, सेमिनार, Talk के माध्यम से भविष्य के लिए एक intellectual के रूप में तैयार करना होता है।

Production of knowledge (ज्ञान के उत्पादन) के विश्व में कई विचारधाराओं (School) की शाखाएं होती हैं;

- राष्ट्रवादी School

- प्राच्यवादी School

- मार्क्सवादी School

- अलीगढ़ी School

- उपाश्रयी (Subaltern School)

- Cambridge, Oxford, School

- Dalit School इत्यादि

डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन इसी राष्ट्रवादी विचारधारा School के समर्थक हैं। इनको Right wing historian या Philosopher कहा जा सकता है। राष्ट्रवादी विचारधारा या Right wing विचारधारा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, गौरवशाली सभ्यता, अपने धर्म की महत्ता स्थापित करना, पारम्परिक व्यवस्था (Traditional ideas) को समर्थन करना होता है। इनको Conservative historian (रूढ़िवादी इतिहासकार) भी कह सकते हैं क्योंकि ये historian परम्परा (Tradition), स्थापित संस्थाएं और स्थापित राजनीतिक संस्थाएं जैसे राज्य, सामंतवाद, उग्र राष्ट्रवाद, नए विचारधारा का विरोध, इत्यादि इनका लक्षण होता है।

अब इनके किताबों और विचारों पर ध्यान दें तो निम्नलिखित बातें ध्यान में आती हैं;

> Indian Philosophy - 2 vol.

> The Philosophy of Rabindranath Tagore

> An Idealist view of Life

> The Hindu view of life

> Recovery of Faith

इस तरह से उन्होंने हर इसमें वेदांत, उपनिषद, मनुस्मृति, इत्यादि पर लिखा और एक Hindu होने पर जोर दिया है। यह कह सकते हैं कि एक Hindu Rastra की परिकल्पना अप्रत्यक्ष रूप से की है।

अब मेरा सवाल है कि क्या एक शिक्षक Conservative होकर बच्चों को केवल एक धर्म, की शिक्षा देगा? क्या एक शिक्षक 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद' का शिक्षा देगा? क्या एक शिक्षक अपने बच्चों को 'परम्परा' को गढ़ने पर जोर देगा? क्या एक शिक्षक 'दक्षिणपंथी' बनने पर जोर देगा? क्या एक शिक्षक हिन्दू राष्ट्र के परिकल्पना पर जोर देगा? क्या एक शिक्षक 'जाति-व्यवस्था' पर जोर देगा?

Paulo Freire (पाउलो फ्रेइरे) की किताब Pedagogy of the Oppressed (1970) में पाउलो फ्रेइरे इस पारंपरिक teaching Method (Teacher teaches, Student receives) की कड़ी आलोचना करते हैं. राष्ट्रवादी या रूढ़िवादी इतिहासकारों के Philosophy ने बच्चों को एक रूढ़िवादी नागरिक बनाया है। इसके विपरीत सावित्री बाई फुले, डॉ. अम्बेडकर, ज्योतिबा फुले ने भारत में एक 'Organic Intellectual' पैदा करने की बात की है।

Antonio Gramsci ने यह बताया कि ऐसे लोग Traditional Intellectual पैदा करते हैं जबकि षड्यंत्र देखने वाले विचारक Organic Intellectual पैदा करते हैं. Traditional Intellectual Hegemony पैदा करते हैं. जबकि Organic Intellectual, anti-hegemonic structure पैदा करते हैं. डॉ. राधाकृष्णन का इन विचारों को मैंने 'Hidden Curriculum' कहता हूँ जो केवल नागरिकों को एक रूढ़िवादी विचारधारा के तरफ ले जाता है.

इनके जन्म दिन को शिक्षक दिवस के रूप में न मनाने का मेरा दूसरा तर्क है कि इन्होंने खुद ही अपने जन्म दिन (5 सितम्बर) को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की बात कही है. तब से आजतक आधिकारिक तौर पर भारत सरकार द्वारा इनका जन्म दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। बचपन से अभी तक पूरे भारत की शिक्षण संस्थाओं में इनका जन्म दिन मनाया जाता है। क्योंकि भारत के विद्वानों में 'Critical thinking' का अभाव है। एक विद्वान खुद कभी नहीं कहता.

तीसरा, मेरठ के व्याख्याता यदुनाथ सिन्हा ने इन पर साहित्यिक चोरी का इल्जाम लगाया. उन्होंने कहा है कि 'Indian Psychology of Perception' (1922-23) में बड़े अंश को राधाकृष्णन ने अपनी पुस्तक 'Indian Philosophy, Vol-II' (1927) में वैसे ही बिना किसी reference के प्रकाशित करा लिया या चुरा लिया. राधाकृष्णन उस शोध प्रबंध के परीक्षकों में से एक थे. यदुनाथ सिन्हा ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में 20,000 रुपए का मुक़दमा दायर किया. राधाकृष्णन और कलकत्ता के तत्कालीन कुलपति श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मध्यस्थता से मामला अदालत के बाहर सुलझाया गया. इसमें कोई भी आधिकारिक न्यायालय फैसला नहीं आया.

चौथा, इन्होंने जाति-व्यवस्था में थोड़ी सुधार के साथ जाति-व्यवस्था को उचित ठहराया है। अमेरिकी धर्म-अध्ययन विद्वान रॉबर्ट माइनर (Robert N. Minor) ने अपने शोध लेख "Radhakrishnan as advocate of class/Caste system as a Universal religio-Social System" में इनका विस्तृत आलोचनात्मक विश्लेषण किया है।

स्वयं डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने भी राधाकृष्णन की इस स्थिति पर आपत्ति जताई थी कि केवल समान रीति-रिवाज और विश्वास किसी समाज को एकीकृत नहीं कर सकते, जब तक संरचनात्मक असमानता भी रहे.

उक्त कारणों से ही इनके 'जन्म दिवस' को शिक्षक दिवस के रूप में नहीं मनाया जाना चाहिए.

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति The Mooknayak उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार The Mooknayak के नहीं हैं, तथा The Mooknayak उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.
Teachers Day Controversy, Dr Vikram Harijan Column
नेहा बोरा की बुरी (Baddie) साथी: राजनीति की नई धमक, नई भाषा
Teachers Day Controversy, Dr Vikram Harijan Column
अभिजीत दीपके: पोस्ट ट्रूथ और उनका दलित होना, अम्बेडकरवादी स्पेस से होना
Teachers Day Controversy, Dr Vikram Harijan Column
प्रदूषण की रिपोर्ट लिखी, चार साल जेल में बंद, पांच ट्रांसफर | पत्रकार रूपेश की कहानी, पत्नी इप्सा की ज़ुबानी

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक को सब्सक्राइब करें

'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।

यहां सब्सक्राइब करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com