योगेंद्र यादव ने संविधान 131वें संशोधन विधेयक पर जताई गहरी चिंता: "आशंका से भी ज्यादा खतरनाक..."

यादव ने कहा कि महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के नाम पर यह विधेयक असल में शुरुआती चरण में ही परिसीमन (delimitation) को सुविधाजनक बनाने और लोकसभा की संख्या को बढ़ाकर 850 करने का प्रयास है।
यादव ने कहा कि  महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के नाम पर यह विधेयक असल में शुरुआती चरण में ही परिसीमन (delimitation) को सुविधाजनक बनाने और लोकसभा की संख्या को बढ़ाकर 815 करने का प्रयास है।
यादव ने कहा कि महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के नाम पर यह विधेयक असल में शुरुआती चरण में ही परिसीमन (delimitation) को सुविधाजनक बनाने और लोकसभा की संख्या को बढ़ाकर 815 करने का प्रयास है।
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नई दिल्ली- स्वराज इंडिया के नेता और राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने संसद में इस सप्ताह प्रस्तावित विशेष सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले संविधान (131वें संशोधन) विधेयक, 2026 की एक कॉपी देखने के बाद गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक हर किसी की आशंका से कहीं ज्यादा खराब है और इससे राज्यवार लोकसभा सीटों के पूर्ण पुनर्वितरण तथा निर्वाचन क्षेत्रों की हेराफेरी यानि गैरिमैंडरिंग के द्वार पूरी तरह खुल जाएंगे।

योगेंद्र यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा:

“मैंने अभी-अभी संविधान (131वें संशोधन) विधेयक, 2026 की एक कॉपी देखी है, जो इस सप्ताह संसद के विशेष सत्र में पेश होने वाली है। यह विधेयक उससे भी बदतर है जिसकी हर कोई आशंका कर रहा था। यह राज्यवार सीटों के पूर्ण पुनर्वितरण और गैरिमैंडरिंग के लिए पूरी तरह से रास्ता खोल देता है।”

उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के नाम पर यह विधेयक असल में शुरुआती चरण में ही परिसीमन (delimitation) को सुविधाजनक बनाने और लोकसभा की संख्या को बढ़ाकर 815 करने का प्रयास है। लेकिन प्रधानमंत्री और मंत्रियों द्वारा दी गई आश्वासन के विपरीत, विधेयक में किसी भी राज्य की वर्तमान सीटों के अनुपात को बनाए रखने का कोई प्रावधान नहीं है।

यादव का कहना है कि इस विधेयक से राज्यवार लोकसभा सीटों के पूर्ण पुनर्वितरण तथा निर्वाचन क्षेत्रों की हेराफेरी यानि गैरिमैंडरिंग के द्वार पूरी तरह खुल जाएंगे।
यादव का कहना है कि इस विधेयक से राज्यवार लोकसभा सीटों के पूर्ण पुनर्वितरण तथा निर्वाचन क्षेत्रों की हेराफेरी यानि गैरिमैंडरिंग के द्वार पूरी तरह खुल जाएंगे।

योगेंद्र यादव ने चेतावनी दी: “1971 की जनगणना के आधार पर लगाए गए फ्रीज (सीटों की संख्या पर रोक) को पूरी तरह हटा दिया गया है, बिना किसी सुरक्षा कवच के जिसका सरकार वादा कर रही थी। इससे भी बदतर बात यह है कि किस जनगणना को आधार बनाकर सीटों का पुनर्वितरण किया जाएगा, इसका फैसला अब संविधान से हटाकर साधारण कानून (साधारण बहुमत से पारित) के दायरे में डाल दिया गया है। वास्तविक पुनर्वितरण और सीमा निर्धारण परिसीमन आयोग द्वारा किया जाएगा, जिसके बारे में संविधान में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। और यह फैसला अदालत में चुनौती भी नहीं दिया जा सकता।”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार महिला आरक्षण को लागू करने के लिए लोकसभा की कुल सीटों को बढ़ाने (543 से 850 तक जिसमें राज्यों के लिए 815 और संघ राज्य क्षेत्रों के लिए 35) और नए परिसीमन की तैयारी कर रही है। विपक्षी दलों और कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दक्षिणी राज्यों के सापेक्ष उत्तरी राज्यों की राजनीतिक ताकत बढ़ सकती है और संघीय संतुलन बिगड़ सकता है।

योगेंद्र यादव की इस टिप्पणी ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। विशेष सत्र में विधेयक पेश होने के साथ ही इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है।

यादव ने कहा कि  महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के नाम पर यह विधेयक असल में शुरुआती चरण में ही परिसीमन (delimitation) को सुविधाजनक बनाने और लोकसभा की संख्या को बढ़ाकर 815 करने का प्रयास है।
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यादव ने कहा कि  महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के नाम पर यह विधेयक असल में शुरुआती चरण में ही परिसीमन (delimitation) को सुविधाजनक बनाने और लोकसभा की संख्या को बढ़ाकर 815 करने का प्रयास है।
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