
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में उस वक्त नई बहस छिड़ गई जब पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से जुड़े नियमों के विरोध में खड़े दिखाई दे रहे हैं और आंदोलन में शामिल होने की बात कहते सुनाई दे रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान वे कुछ लोगों से यह कहते हैं कि “हम आपके साथ खड़े हैं, चिंता मत करो।” जब एक कार्यकर्ता ने 1 फरवरी को ज्ञापन देने की बात कही, तो जयवर्धन सिंह ने प्रतिक्रिया दी- “बिल्कुल, भाजपा सरकार के मंत्रियों ने ऐसी चीज कैसे लागू कर दी, हम इसे सहन नहीं करेंगे।” इस बयान के सामने आते ही कांग्रेस की सामाजिक न्याय संबंधी राजनीति और पार्टी की घोषित लाइन पर सवाल उठने लगे हैं।
वीडियो के संदर्भ में बताया जा रहा है कि यह कुछ दिन पुराना है, जब कुछ सवर्ण संगठनों द्वारा UGC नियमों के विरोध में गतिविधियाँ की जा रही थीं। लेकिन वीडियो के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई। आलोचकों का कहना है कि एक ओर कांग्रेस दलित-आदिवासी-पिछड़े और वंचित समुदायों के अधिकारों की पैरवी करती है, वहीं दूसरी ओर उसके नेता UGC नियमों के विरोध में खड़े दिखते हैं, जिससे कथनी-करनी के अंतर का आरोप और मजबूत होता है। इसी कड़ी में कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी की ‘सामाजिक न्याय’ वाली राजनीतिक भाषा और जमीनी बयानों के बीच विरोधाभास की चर्चा होने लगी है।
इस बयान के वायरल होने के बाद बहुजन सामाजिक संगठनों और पार्टियों ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि यह मामला केवल एक नेता के बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि कांग्रेस के दोहरे चरित्र को उजागर करता है। संगठनों का आरोप है कि पार्टी चुनावी मंचों पर दलित-आदिवासी-पिछड़े समाज के पक्ष में खड़ी होने की बात करती है, लेकिन जब नीतिगत सवाल सामने आते हैं, तो उसका रुख बदल जाता है। आलोचकों के अनुसार, इससे यह संदेश जाता है कि कांग्रेस की राजनीति अवसरवाद से संचालित है, न कि स्थायी वैचारिक प्रतिबद्धता से।
इसी मुद्दे पर आज़ाद समाज पार्टी, मध्यप्रदेश के नेता सुनील अस्तेय ने एक्स पर कांग्रेस को घेरते हुए लिखा कि “कांग्रेस की UGC एक्ट विरोधी नीति अब खुलकर सामने आ गई है। सवर्ण प्रेम जाग चुका है। कांग्रेस के विधायक जयवर्धन सिंह को ओबीसी, एससी-एसटी बच्चों के साथ हो रहे जातिगत उत्पीड़न से कोई फर्क नहीं पड़ता।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस ऐतिहासिक रूप से बहुजन समाज और आंबेडकरवादी विचारों की विरोधी रही है, इसलिए उससे सामाजिक न्याय की उम्मीद करना व्यर्थ है।
सुनील अस्तेय ने अपने पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया कि आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी UGC के समर्थन में खड़ी हैं और संसद से लेकर सड़क तक इस लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लेती हैं। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर व्यक्तिगत कटाक्ष करते हुए कहा कि वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह अब “पुत्र मोह” में चुप हैं और उन्हें ओबीसी-एससी-एसटी समाज के बच्चों से कोई सरोकार नहीं दिखता। पोस्ट के अंत में #We_support_UGC_Act जैसे हैशटैग के जरिए बहुजन पक्ष को मजबूती से सामने रखा गया।
द मूकनायक से बातचीत में आज़ाद समाज पार्टी के नेता सुनील अस्तेय ने कहा- “कांग्रेस का सामाजिक न्याय का दावा पूरी तरह खोखला है। UGC समता विनियम 2006 के मुद्दे पर जयवर्धन सिंह का बयान यह साफ करता है कि कांग्रेस की कथनी और करनी में गहरा अंतर है। जब सवाल ओबीसी, एससी और एसटी समाज के बच्चों के अधिकारों का आता है, तब कांग्रेस के नेता सवर्ण संगठनों के साथ खड़े दिखाई देते हैं। यह केवल एक व्यक्ति का बयान नहीं, बल्कि कांग्रेस की वास्तविक सोच को उजागर करता है। बहुजन समाज अब इस पाखंड को समझ चुका है और UGC के समर्थन में संसद से सड़क तक अपनी लड़ाई जारी रखेगा।”
द मूकनायक से बातचीत में बहुजन समाज पार्टी मध्यप्रदेश के अध्यक्ष रमाकांत पिप्पल ने कहा- “कांग्रेस की दोहरी नीति को आज पूरे देश की जनता देख रही है। सामाजिक न्याय की बात करने वाली कांग्रेस जब फैसलों के वक्त आती है, तो उसकी नीयत और नीति दोनों खुलकर सामने आ जाती हैं। दलित, आदिवासी और पिछड़ा समाज अब केवल नारों से बहलने वाला नहीं है। यही वजह है कि जनता का भरोसा लगातार बहुजन समाज पार्टी पर बढ़ रहा है। कांग्रेस ने बार-बार इन वर्गों को निराश किया है, और अब लोग एक सच्चे विकल्प की ओर देख रहे हैं।”
द मूकनायक से बातचीत में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री अमान सिंह पोर्ते ने कहा, “दलित और आदिवासी मुद्दों से किसी को वास्तव में कोई मतलब नहीं है। हमारे समाज का सदियों से शोषण हुआ है और यह शोषण आज भी अलग-अलग रूपों में जारी है। ऐसे में UGC जैसे मुद्दे पर कांग्रेस का विरोध में खड़ा होना उसकी मंशा पर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को साफ-साफ बताना चाहिए कि पार्टी UGC नियमों के समर्थन में है या विरोध में। दोहरी नीति अब नहीं चलेगी, क्योंकि दलित-आदिवासी समाज सब देख और समझ रहा है।”
द मूकनायक प्रतिनिधि ने इस पूरे विवाद पर कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह से बातचीत की। जयवर्धन सिंह ने कहा कि उनका वीडियो गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल इतना कहा था कि उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग किसी के भी साथ हो सकती है और इस मुद्दे पर संवेदनशीलता ज़रूरी है। उनके मुताबिक, उनके बयान को UGC समता कानून के विरोध के रूप में दिखाना सही नहीं है।
हालांकि, जब द मूकनायक की ओर से उनसे सीधे तौर पर यह सवाल किया गया कि वे यूजीसी नियमों के समर्थन में हैं या विरोध में, तो इस पर उन्होंने कोई स्पष्ट और सीधा जवाब नहीं दिया।
कुल मिलाकर, जयवर्धन सिंह के वायरल वीडियो ने UGC कानून के मुद्दे को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। यह प्रकरण केवल एक बयान का नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों की वैचारिक स्पष्टता और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी वास्तविक प्रतिबद्धता की कसौटी बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस इस आरोपों पर क्या आधिकारिक रुख अपनाती है और क्या पार्टी अपने नेताओं के बयानों व नीतिगत स्टैंड के बीच तालमेल बिठा पाती है या नहीं।
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