मक्कल थिलगम, अम्मा के बाद अब थलपति: कैसे तमिलनाडु ने बार-बार अपने चहेते अभिनेताओं को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया!

MGR के बाद से तमिलनाडु के मतदाताओं ने बार-बार फिल्म सितारों को भारी चुनावी सफलता, भावनात्मक निष्ठा और कल्ट जैसा जन-समर्थन दिया है।
 तमिलनाडु के मतदाताओं ने बार-बार वो अभिनेता चुना जो परदे पर गरीबों का साथी था, भ्रष्टाचार का विरोधी था और जिसकी असल जिंदगी भी उस छवि से मेल खाती थी।
MGR , जयललिता से विजय तक, रुपहले परदे की चमक कैसे बन गई राजनीतिक ताकत, और क्यों तमिलनाडु के मतदाता बार-बार अभिनेताओं पर भरोसा करते रहे?सोशल मीडिया
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चेन्नई- तमिलनाडु दक्षिण भारत का ऐसा राज्य है जहाँ सिनेमा महज़ मनोरंजन नहीं, एक धर्म है। जहाँ फिल्मी परदे पर किसी हीरो की एक दमदार एंट्री पर लाखों लोग सीटियाँ बजाते हैं, उनके मंदिर बनते हैं और दूध से उसके कटआउट का अभिषेक करते हैं और उसके नाम पर जान देने को तैयार रहते हैं। यहाँ "हीरो वर्शिप" कोई अतिशयोक्ति नहीं, यह इस मिट्टी की फ़ितरत है।

और इसी फ़ितरत ने तमिलनाडु को वह राज्य बनाया जहाँ परदे का हीरो सीधे सत्ता की कुर्सी तक पहुँचता है। जब कोई अभिनेता दशकों तक परदे पर गरीब का दर्द उठाता है, भ्रष्ट सत्ता से लड़ता है, बेबस को न्याय दिलाता है तो तमिलनाडु की जनता उसे किरदार और इंसान में फ़र्क नहीं करती। वो उसे अपना असली नायक मान लेती है। और फिर उसे वोट देकर विधानसभा की सीढ़ियाँ चढ़ा देती है।

यही हुआ "मक्कल थिलगम" यानी जनता के रत्न एमजी रामचंद्रन के साथ, जो 136 फिल्मों में गरीबों का मसीहा बनकर 1977 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन गए। यही हुआ "अम्मा" यानि जे. जयललिता के साथ, जो परदे की नायिका से तमिलनाडु की सबसे ताकतवर नेता बनीं और 6 बार मुख्यमंत्री की शपथ ली। और अब यही हो रहा है "थलपति" विजय के साथ, जिनकी TVK ने 2026 के चुनाव में 107 सीटें जीतकर तमिलनाडु की राजनीति को हिलाकर रख दिया।

परदे से सत्ता तक का यह सफर, तमिलनाडु में कोई इत्तेफ़ाक नहीं, यह एक परंपरा है।

तमिलनाडु के पहले अभिनेता-मुख्यमंत्री
तमिलनाडु के पहले अभिनेता-मुख्यमंत्री

मरुतुर गोपालन रामचंद्रन (MGR)

तमिलनाडु ही नहीं बल्कि भारत के पहले अभिनेता-मुख्यमंत्री का गौरव एमजीआर को हासिल है। MGR ने 1936 में फिल्म "साथी लीलावती" से अभिनय शुरू किया। 30 साल तक वो तमिल सिनेमा के निर्विवाद सम्राट रहे, 136 फिल्मों में काम किया, जिनमें 12 सिल्वर जुबली हिट थीं। परदे पर वो हमेशा गरीबों के मसीहा, भ्रष्टाचार के विरोधी और न्याय के प्रतीक थे। वे जन-केंद्रित नीतियों, विशेष रूप से 'मिड-डे मील' योजना के लिए जाने जाते हैं, और उन्हें 'पुरची थलाइवर' (क्रांतिकारी नेता) के रूप में याद किया जाता है।

1953 में DMK से जुड़े, 1972 में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर निकाले गए, और उसी साल खुद की पार्टी AIADMK बनाई। 1977 में AIADMK ने 234 में से 144 सीटें जीतीं और MGR मुख्यमंत्री बने ,1980 और 1985 में भी जीते।

उनकी सफलता की मुख्य वजह इनकी इमेज थी। परदे का "गरीब का रक्षक" बनकर जो छवि बनी वो दशकों में करोड़ों दर्शकों के दिलों में बस कर सीधे वोट में तब्दील हुए।

DMK से अलग होकर "भ्रष्टाचार-विरोधी" छवि बनाई, उन्होंने मंत्रियों की संपत्ति सार्वजनिक करने की मांग की थी।

1984 में अमेरिका में इलाज के दौरान बिना प्रचार किए भी AIADMK ने भारी बहुमत से जीत हासिल की, इतनी गहरी थी जनता की आस्था।

तमिलनाडू के मुख्यमंत्री के रूप में इनका योगदान मध्याह्न भोजन योजना (Midday Meal Scheme) के लिए किया जाता है, सभी गरीब बच्चों को 365 दिन मुफ्त भोजन के बाद, स्कूलों में नामांकन में भारी वृद्धि हुई। महिलाओं के लिए विशेष बसें शुरू कीं। विधवाओं के बच्चों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, किसानों को मुफ्त बिजली, शराबबंदी, शैक्षिक सुधार, मंदिरों-धरोहर स्थलों के संरक्षण से पर्यटन बढ़ाया। 24 दिसंबर 1987 को कार्यालय में रहते हुए उनका निधन हो गया। मार्च 1988 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित हुए, वे तमिलनाडु के तीसरे CM थे जिन्हें यह सम्मान मिला।

MGR के निधन के बाद जानकी रामचंद्रन महज 23 दिनों के लिए तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं, भारत में तमिलनाडु की पहली महिला CM जो खुद भी एक जानी-मानी अभिनेत्री थीं। विधानसभा में विश्वास मत हासिल न कर सकने के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा। उनका कार्यकाल इतिहास में सबसे छोटे CM कार्यकालों में से एक है।
जयललिता के अनुयायी अक्सर उन्हें एक देवी के रूप में पूजते थे। उन्होंने एक पंथ को जन्म दिया, और उनके प्रशंसक अक्सर उन्हें "आदि पराशक्ति" कहते थे।
जयललिता के अनुयायी अक्सर उन्हें एक देवी के रूप में पूजते थे। उन्होंने एक पंथ को जन्म दिया, और उनके प्रशंसक अक्सर उन्हें "आदि पराशक्ति" कहते थे।

जे. जयललिता (अम्मा)

जयललिता को स्वतंत्रता के बाद भारत की सबसे प्रभावशाली राजनीतिज्ञों में से एक माना जाता है। राजनीति के अलावा, एक फिल्मी हस्ती के रूप में उन्होंने तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार और तीन फिल्मफेयर साउथ पुरस्कार जीते।

जयललिता ने 1961 में कन्नड़ फिल्म "श्री शैल महात्मे" से बाल कलाकार के रूप में अभिनय शुरू किया। 1964–1980 के बीच तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और हिंदी में 140 से अधिक फिल्मों में काम किया। MGR के साथ 28 सुपरहिट फिल्में दीं , जो जोड़ी तमिल सिनेमा की सबसे चहेती जोड़ियों में थी। वो एक प्रशिक्षित भरतनाट्यम नृत्यांगना भी थीं। 1982 में MGR के बुलावे पर AIADMK में शामिल हुईं, 1984 में राज्यसभा सांसद बनीं। MGR के निधन के बाद 1989 में AIADMK की महासचिव बनीं और 1991 में पहली बार मुख्यमंत्री, तब वो तमिलनाडु की सबसे युवा CM थीं।

जयललिता की सफलता के पीछे MGR की "राजनीतिक उत्तराधिकारी" की छवि थी। MGR के समर्थकों ने जयललिता पर विश्वास किया को उन्होंने 1991 में वोट में बदला।

140+ फिल्मों से बना जन-परिचय, भरतनाट्यम और बहुभाषी प्रतिभा से सांस्कृतिक अपील।

कावेरी जल विवाद पर 4 दिन का अनशन, "तमिल अस्मिता की रक्षक" की छवि मजबूत हुई।

1996 में भारी हार के बाद भी वापसी-- 2001, 2011, 2015, 2016 में जीत, राजनीतिक पुनरुत्थान की अद्भुत क्षमता का प्रदर्शन किया।

बतौर CM उनकी उपलब्धियाँ रही:

"अम्मा" ब्रांड योजनाएँ: अम्मा कैंटीन (सस्ता भोजन), अम्मा पानी, अम्मा नमक, अम्मा सीमेंट

क्रैडल बेबी योजना: माताएं नवजात बच्चों को गुमनाम तरीके से गोद देने के लिए छोड़ सकती थीं, female infanticide घटी, 2004 की tsunami राहत में तत्काल प्रबंधन की प्रशंसा, वीरप्पन जैसे कुख्यात अपराधी का उनके कार्यकाल में खात्मा हुआ।

2015 में Global Investors Summit, अम्मा मास्टर हेल्थ चेकअप, वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त बस यात्रा

एमजी रामचंद्रन (MGR) और जे. जयललिता तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा के दो सबसे प्रभावशाली स्तंभ थे, जिनके बीच गुरु-शिष्य, मेंटर और जटिल प्रेम संबंध था। MGR ने ही जयललिता को अभिनय से राजनीति में लाकर एआईएडीएमके (AIADMK) का उत्तराधिकारी बनाया। 1965-1973 के बीच 28 फिल्मों में काम करने वाले इस जोड़े की फेन फोलोविंग आज भी कम नहीं है।

22 सितंबर 2016 की रात, जयललिता को चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जाता है कि वे संक्रमण और गंभीर निर्जलीकरण से पीड़ित थीं। 12 अक्टूबर 2016 को उनके आधिकारिक कर्तव्यों को उनके मंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम को सौंप दिया गया, हालांकि वे राज्य की मुख्यमंत्री बनी रहीं। उन्हें फेफड़ों का गंभीर संक्रमण और सेप्टीसीमिया भी था, जो ठीक हो गया। 19 नवंबर 2016 को, लगभग दो महीने के इलाज के बाद, उन्हें आईसीयू से अपोलो अस्पताल के सामान्य वार्ड में एक निजी कमरे में स्थानांतरित कर दिया गया। 4 दिसंबर 2016 की शाम लगभग 4:45 बजे दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें फिर से गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया।अस्पताल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि उनकी हालत "बेहद गंभीर" थी और उन्हें जीवन रक्षक उपकरणों पर रखा गया था। 5 दिसंबर 2016 को, अस्पताल ने रात करीब 11:30 बजे उनकी मृत्यु की घोषणा की और वे भारत में पद पर रहते हुए मरने वाली पहली महिला मुख्यमंत्री बन गईं।

 विजय ने अपने वर्षों पुराने फैन क्लबों को एक संगठित 'बूथ स्तर' के कैडर में बदला, जिससे चुनावी प्रचार बहुत मजबूत हुआ।
विजय ने अपने वर्षों पुराने फैन क्लबों को एक संगठित 'बूथ स्तर' के कैडर में बदला, जिससे चुनावी प्रचार बहुत मजबूत हुआ।

जोसेफ विजय (थलपति)

विजय ने 2 फरवरी 2024 को TVK की स्थापना के साथ घोषणा की कि यह "भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और परिवारवाद के विरुद्ध" पार्टी है। 18 मार्च 2026 को ऐलान किया कि 234 सीटों पर अकेले लड़ेंगे। 30 मार्च 2026 को पेरम्बूर से नामांकन दाखिल किया। 23 अप्रैल को मतदान हुआ, 4 मई को परिणाम सामने आया— TVK 106 सीटों पर जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी।

विजय की जीत के प्रमुख कारण उनके 85,000+ fan clubs से बना "विजय मक्कल इयक्कम" नेटवर्क है जो वर्षों से ज़मीनी स्तर पर सक्रिय था, चुनाव में कैडर बना।

234 सीटों पर आम पृष्ठभूमि के उम्मीदवार, "परिवारवाद-मुक्त" राजनीति का सफल प्रयोग।

85.1% मतदान जो राज्य इतिहास में सबसे ज्यादा था और युवा और नए मतदाताओं ने TVK को चुना।

DMK और AIADMK के 57 वर्षों के लंबे शासन से जनता थक चुकी थी और पब्लिक को "नया विकल्प" चाहिए था।

अक्टूबर 2024 में विक्रवंडी में 8 लाख से अधिक लोगों की rally में पार्टी की संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन हुआ। विजय की युवा प्रशंसकों (Gen-Z) और महिला मतदाताओं में भारी लोकप्रियता रही, जो पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं के बीच उनके प्रति क्रेज के कारण है। जनता ने दशकों पुरानी DMK-AIADMK की राजनीति से ऊबकर एक नया और ईमानदार विकल्प (TVK) चुना, जो भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था के मुद्दों पर केंद्रित था।

तमिलनाडु में यह परंपरा अभिनेताओं से नहीं, लेखकों-पटकथाकारों से शुरू हुई। अन्नादुरई और कलाईगनार करुणानिधि ने फिल्मों को विचारधारा फैलाने का माध्यम बनाया। MGR ने इसी नींव पर अपनी ओन स्क्रीन छवि को जमीनी राजनीति में बदला। जयललिता ने MGR की विरासत को आगे बढ़ाया और खुद की अलग राजनीतिक पहचान बनाई। अब 2026 में विजय ने उसी रास्ते पर चलकर पहले ही चुनाव में 106 सीटें हासिल कीं। तमिलनाडु के मतदाताओं ने बार-बार वो अभिनेता चुना जो परदे पर गरीबों का साथी था, भ्रष्टाचार का विरोधी था और जिसकी असल जिंदगी भी उस छवि से मेल खाती थी।

 तमिलनाडु के मतदाताओं ने बार-बार वो अभिनेता चुना जो परदे पर गरीबों का साथी था, भ्रष्टाचार का विरोधी था और जिसकी असल जिंदगी भी उस छवि से मेल खाती थी।
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 तमिलनाडु के मतदाताओं ने बार-बार वो अभिनेता चुना जो परदे पर गरीबों का साथी था, भ्रष्टाचार का विरोधी था और जिसकी असल जिंदगी भी उस छवि से मेल खाती थी।
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