तमिलनाडु के इस गांव में मतदान के दिन पसरा सन्नाटा: काले झंडे फहराकर दलित मतदाताओं ने क्यों किया वोटिंग का बहिष्कार?

2022 पेयजल प्रदूषण मामले में सीबी-सीआईडी (CB-CID) की जांच से असंतुष्ट वेंगईवयल के दलित मतदाताओं ने मतदान का किया पूर्ण बहिष्कार, विरोध में गांव में फहराए काले झंडे।
Dalits boycott polls in Vengaivayal
तमिलनाडु के वेंगईवयल में 2022 पेयजल प्रदूषण मामले को लेकर दलितों ने किया चुनाव का बहिष्कार। सीबी-सीआईडी रिपोर्ट के विरोध में फहराए काले झंडे।(Ai Image)
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पुदुक्कोट्टई (तमिलनाडु): साल 2022 के पेयजल प्रदूषण मामले में न्याय की मांग और सीबी-सीआईडी (CB-CID) की जांच रिपोर्ट के विरोध में वेंगईवयल गांव में भारी रोष देखने को मिला। विरोध जताने के लिए गांव के प्रवेश द्वार पर काले झंडे फहराए गए और गुरुवार को अधिकांश दलित मतदाताओं ने चुनाव का पूरी तरह से बहिष्कार किया।

मुट्टूकाडु पंचायत के अंतर्गत आने वाले इस गांव में मतदान का प्रतिशत ना के बराबर रहा। इस क्षेत्र में 65 से अधिक दलित मतदाता पंजीकृत हैं, लेकिन कुल मिलाकर केवल आठ लोगों ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

इन आठ मतदाताओं में से पांच ऐसे लोग थे जो गांव से पलायन कर चुके हैं और सिर्फ वोट डालने के लिए अपने मूल निवास पर लौटे थे। वहीं, वर्तमान में गांव में रह रहे केवल तीन लोगों ने ही मतदान किया। अन्य सभी दलित परिवारों ने बहिष्कार के फैसले का सख्ती से पालन किया और खुद को पूरी प्रक्रिया से अलग रखा।

वेंगईवयल प्रारंभिक विद्यालय में बनाए गए मतदान केंद्र पर 549 से अधिक मतदाता हैं। इनमें एरायुवर गांव के लोग भी शामिल हैं, जो मुख्य रूप से सवर्ण हिंदू हैं। इन लोगों ने भी पहले चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया था, लेकिन वे मतदान के दिन अपना वोट डालने बूथ पर पहुंचे।

इस पूरे मामले पर स्थानीय निवासी के.आर. मुरुगन ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि पीड़ित वे लोग हैं और उन्होंने ही इस त्रासदी को झेला है। उन्होंने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि असली दोषियों को पकड़ने के बजाय एजेंसी ने उन्हीं के समुदाय के लोगों का नाम मामले में डाल दिया है, जिसे वे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं कर सकते।

मतदान के दौरान हालात को संभालने और बहिष्कार खत्म कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ शांति वार्ता की। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि उनकी समस्या के समाधान के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे, हालांकि यह बातचीत बेनतीजा रही और ग्रामीण अपने विरोध पर डटे रहे।

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