बाढ़ की मार झेलता बिहार: तेजस्वी ने सीएम और नितिन नवीन को बताया 'रबर स्टैंप', कहा- पीएम के जन्मदिन पर फूंक दिए पैसे

बाढ़ पर तेजस्वी यादव का एनडीए सरकार पर सीधा हमला, कहा- सीएम और नितिन नवीन सिर्फ पीएम मोदी के 'रबर स्टैंप' हैं।
Tejaswi Yadav on Bihar Flood
बिहार में बाढ़ पर तेजस्वी यादव का बड़ा हमला। सीएम और नितिन नवीन को बताया 'रबर स्टैंप', कहा- राहत के बजाय पीएम मोदी के जन्मदिन पर फूंके पैसे।
Published on

बिहार: राज्य के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार, 20 सितंबर को राज्य में बाढ़ राहत कार्यों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के जश्न पर हुए खर्च को लेकर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को आड़े हाथों लिया। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को महज 'रबर स्टैंप' कहा।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष यादव ने तंज कसते हुए कहा कि बिहार से होने के बावजूद नितिन नवीन प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बाढ़ प्रभावित राज्य के दौरे पर नहीं ला सके। उन्होंने मुख्यमंत्री चौधरी और नवीन सहित कई एनडीए नेताओं द्वारा बाढ़ राहत के लिए अपना एक महीने का वेतन दान करने के फैसले को सिर्फ 'ध्यान भटकाने वाला नाटक' बताया।

पटना स्थित अपने आधिकारिक आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए तेजस्वी ने सवाल किया कि क्या पीएम मोदी और अमित शाह ने अपना वेतन दान किया है। उन्होंने कहा कि सभी एनडीए विधायकों और सांसदों ने मिलकर मुख्यमंत्री राहत कोष में तीन करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं दिए होंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि इससे कहीं अधिक सार्वजनिक धन तो एनडीए नेताओं ने पीएम मोदी के जन्मदिन पर दीये जलाकर बर्बाद कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि बिहार के सीएम और नितिन नवीन केवल पीएम मोदी के रबर स्टैंप हैं।

राजद नेता ने दीये जलाने के इस कृत्य को बाढ़ पीड़ितों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा बताया। उन्होंने तीखा सवाल पूछा कि क्या एनडीए नेताओं द्वारा दिया गया दो-तीन करोड़ रुपये का यह चंदा 50 लाख बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त है।

राज्य की दोहरी मार का जिक्र करते हुए तेजस्वी यादव ने बताया कि पिछले 28 दिनों से बिहार केवल बाढ़ ही नहीं, बल्कि भयंकर सूखे से भी जूझ रहा है। राज्य में सामान्य से 35 प्रतिशत से भी कम बारिश हुई है।

उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि गंभीर सूखे के कारण लाखों हेक्टेयर भूमि में लगी फसलें बर्बाद हो रही हैं। लाखों किसान अपनी लागत तक निकाल पाने में असमर्थ हैं और उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसके बावजूद सरकार ने अब तक सूखे की स्थिति का आकलन तक नहीं किया है।

विपक्ष के नेता ने दावा किया कि सरकार ने महज दिखावे के लिए कुछ सामुदायिक रसोई और राहत शिविर स्थापित किए थे, जिन्हें अब धन की कमी का हवाला देकर बंद कर दिया गया है।

उन्होंने इस सरकार को बेशर्म बताते हुए पूछा कि ऐसी स्थिति में बाढ़ पीड़ित आखिर कहां जाएं। राहत सामग्री बांटने में भी बाधाएं पैदा की जा रही हैं और पीड़ितों से आधार कार्ड समेत अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जिससे जरूरतमंदों तक मदद प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रही है।

तेजस्वी ने जोर देकर कहा कि बिहार के खजाने पर पहला हक आपदा पीड़ितों का है। उन्होंने 2015 और 2022 की महागठबंधन सरकार का हवाला दिया, जब आपदा प्रबंधन और वित्त विभाग राजद के पास थे।

उन्होंने बताया कि उस वक्त बजट में एक ऐसा प्रावधान सुनिश्चित किया गया था, जिसके तहत राज्य के कुल बजट का 4% हिस्सा बाढ़, सूखे और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आकस्मिक निधि के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।

उन्होंने मौजूदा सरकार से हिसाब मांगते हुए कहा कि आज के बजट के आधार पर गणना की जाए कि बिहार की आकस्मिक निधि कितनी होनी चाहिए और वह पैसा आखिर कहां गया। उन्होंने दावा किया कि बिहार में आकस्मिक निधि जून में ही निकाल ली गई थी और अब जब बाढ़ पीड़ितों को जरूरत है, तो धन की भारी कमी हो गई है।

धान, मक्का, सब्जियां और केला सहित लगभग 1.5 लाख हेक्टेयर में लगी फसलें बाढ़ के कारण पूरी तरह तबाह हो गई हैं, लेकिन किसानों को अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला है।

तेजस्वी ने यह भी सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से बिहार को मदद क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि बिहार में बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या गोवा और अरुणाचल प्रदेश जैसे कई राज्यों की कुल आबादी से भी अधिक है।

केंद्र पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद गृह मंत्री और प्रधानमंत्री बिहार के प्रति कोई चिंता नहीं दिखा रहे हैं। इसे बिहार के साथ स्पष्ट भेदभाव और शर्म का विषय बताते हुए तेजस्वी ने राज्य सरकार से मांग की कि वह तत्काल प्रत्येक बाढ़ पीड़ित को 15,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करे और सूखे से प्रभावित किसानों का तुरंत सर्वेक्षण भी कराए।

Tejaswi Yadav on Bihar Flood
तमिलनाडु: बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई ने पेरियार के नास्तिक और ब्राह्मण विरोधी विचारों को नकारा, महिला सशक्तिकरण पर किया समर्थन
Tejaswi Yadav on Bihar Flood
मणिपुर राहत शिविरों में 31 अस्वाभाविक मौतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मुआवजे और जांच को लेकर सरकार से मांगे जवाब
Tejaswi Yadav on Bihar Flood
MP: सागर जहरीली शराब कांड! नकली शराब के अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा, 36 मौतों के बाद सामने आया VIDEO

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक को सब्सक्राइब करें

'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।

यहां सब्सक्राइब करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com