तमिलनाडु: बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई ने पेरियार के नास्तिक और ब्राह्मण विरोधी विचारों को नकारा, महिला सशक्तिकरण पर किया समर्थन

तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पेरियार के नास्तिक और ब्राह्मण विरोधी विचारों को सिरे से खारिज किया, लेकिन महिला सशक्तिकरण पर उनके योगदान को सराहा।
K Annamalai on Periyar
के. अन्नामलाई ने पेरियार के ब्राह्मण विरोधी और नास्तिक विचारों को खारिज किया है।
Published on

तमिलनाडु: बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने रविवार को दिग्गज द्रविड़ नेता ईवी रामासामी 'पेरियार' की विचारधारा को लेकर एक अहम बयान दिया। उन्होंने पेरियार के नास्तिक और ब्राह्मण विरोधी विचारों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने महिला सशक्तिकरण और जातिगत भेदभाव के खिलाफ पेरियार के योगदान को खुले तौर पर स्वीकार भी किया।

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अन्नामलाई ने अपनी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा कि वह महिलाओं की मुक्ति और जाति उन्मूलन की दिशा में पेरियार के प्रयासों का सम्मान करते हैं। लेकिन जब बात उनके नास्तिक नजरिए और ब्राह्मणों के खिलाफ उनकी सोच की आती है, तो वे इसका पूरी तरह से विरोध करते हैं।

द्रविड़ नेता के रुख में ऐतिहासिक विरोधाभासों का जिक्र करते हुए अन्नामलाई ने तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने पेरियार के हिंदी विरोध का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि साल 1935 में पेरियार ने हिंदी का कड़ा विरोध किया था। इसके ठीक विपरीत, 1965 में उसी पेरियार ने हिंदी का विरोध करने वालों को गोली मारने तक की बात कह दी थी।

आईपीएस अधिकारी से राजनेता बने अन्नामलाई ने डीएमके के साथ पेरियार के राजनीतिक झुकाव पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने याद दिलाया कि साल 1961 में पेरियार ने खुद मतदाताओं से 'पच्चई तमिझन' कामराज का समर्थन करने की अपील की थी।

अपने सामाजिक अभियान 'वी द लीडर्स' के राजनीतिक एजेंडे पर बात करते हुए पूर्व बीजेपी नेता ने एक बड़ा वादा दोहराया। उन्होंने घोषणा की कि अगर तमिलनाडु में बीजेपी सत्ता में आती है, तो हिंदू मंदिरों के बाहर लगी नास्तिक शिलालेखों वाली मूर्तियों को हटा दिया जाएगा।

अन्नामलाई का तर्क था कि मंदिर जाने वाले श्रद्धालु आस्तिक होते हैं और उन्हें प्रवेश द्वार पर ऐसे संदेश नहीं दिखने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मंदिर के ठीक बाहर यह लिखा होना कि 'भगवान नहीं है, भगवान बिल्कुल नहीं है', हमें शोभा नहीं देता।

हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि इन मूर्तियों का किसी भी तरह से अपमान नहीं किया जाएगा। इन्हें पूरे सम्मान के साथ मौजूदा जगह से हटाकर किसी अन्य वैकल्पिक सार्वजनिक स्थान पर स्थापित किया जाएगा ताकि मंदिर जाने वाले भक्तों की भावनाओं का भी ख्याल रखा जा सके।

राजनीतिक मुद्दों के अलावा अन्नामलाई ने जमीनी स्तर पर किए जा रहे रचनात्मक कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने 'वी द लीडर्स' के स्वयंसेवकों की जमकर तारीफ की। इन कार्यकर्ताओं ने 3 अगस्त को शुरू हुए सात सप्ताह के सफाई अभियान के दौरान मदुरै में वैगई नदी के 33 एकड़ क्षेत्र से 163 टन कचरा निकाला है।

अन्नामलाई ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु में सच्चा राजनीतिक बदलाव सिर्फ खोखले भाषणों से नहीं, बल्कि ऐसे ही जमीनी कामों से आएगा। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 से 2019 के बीच मदुरै में स्वच्छता परियोजनाओं के लिए करीब 1,400 करोड़ रुपये मुहैया कराए थे। प्रशासन इस भारी-भरकम फंड का सही इस्तेमाल करने में पूरी तरह नाकाम रहा, जबकि इस पैसे से नदी को इतने बड़े पैमाने पर प्रदूषित होने से बचाया जा सकता था।

K Annamalai on Periyar
मणिपुर राहत शिविरों में 31 अस्वाभाविक मौतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मुआवजे और जांच को लेकर सरकार से मांगे जवाब
K Annamalai on Periyar
MP: पन्ना में केन-बेतवा समेत परियोजनाओं के विस्थापितों का ‘चिता आंदोलन’ 8वें दिन भी जारी
K Annamalai on Periyar
‘जरूरत पड़ी तो भाई-बहनों के खिलाफ भी जाऊंगी’: बसपा में आंतरिक घमासान के बीच मायावती ने याद दिलाया बाबा साहब का 70 साल पुराना पत्र!

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक को सब्सक्राइब करें

'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।

यहां सब्सक्राइब करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com