नई दिल्ली: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने रविवार को राज्य सरकार से एक बेहद अहम मांग की है। उन्होंने कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा कराए गए सामाजिक-शैक्षणिक सर्वेक्षण, जिसे आमतौर पर जातिगत जनगणना कहा जाता है, के निष्कर्षों को तुरंत सार्वजनिक करने का आग्रह किया है।
उन्होंने राज्य सरकार पर जोर दिया है कि वह इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट पर जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई करे। यह विस्तृत रिपोर्ट सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने से ठीक पहले उन्हें सौंपी गई थी। हालांकि, अभी तक इसे राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष विचार के लिए पेश नहीं किया जा सका है।
कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग महासंघ काफी समय से इस बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट को इसके मूल स्वरूप में लागू करने की मांग कर रहा है। सिद्धारमैया ने महासंघ के रजत जयंती समारोह के दौरान यह अहम बात कही। इस कार्यक्रम में उनका भव्य सम्मान भी किया गया।
महासंघ द्वारा आयोजित इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उच्च न्यायालय ने फिलहाल रिपोर्ट की सामग्री को सार्वजनिक न करने का निर्देश दिया है। उन्होंने महासंघ के अध्यक्ष के.एम. रामचंद्रप्पा से विशेष अपील की कि वे इस स्टे (रोक) को हटवाने के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाएं।
सामाजिक न्याय की पुरजोर वकालत करते हुए सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि दलितों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों को 75 प्रतिशत तक आरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर समुदाय को उसकी आबादी के हिसाब से आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए, क्योंकि तभी एक समान और समतामूलक समाज का निर्माण संभव है।
उन्होंने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में भी आबादी के आधार पर राजनीतिक आरक्षण दिए जाने की वकालत की। उनका मानना है कि विभिन्न समुदायों की जनसंख्या के आधार पर ही उनका उचित और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सकता है।
खुद को और अन्य समुदायों को परिभाषित करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि पिछड़े वर्ग से होने में किसी भी प्रकार की कोई शर्म नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जाति व्यवस्था को असमानता और अवसरों से वंचित रखने का एक ऐतिहासिक कारण बताया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह खुद एक शूद्र हैं और लिंगायत व वोक्कालिगा सहित हम सभी शूद्र हैं। उनका तर्क था कि शूद्रों के रूप में वर्गीकृत समुदायों को ऐतिहासिक रूप से शिक्षा और विकास के अन्य अवसरों से लगातार दूर रखा गया है। यह सम्मान समारोह उनके लिए अपने सामाजिक न्याय के एजेंडे को फिर से मजबूती से दोहराने का एक शानदार मंच साबित हुआ।
चुनावी राजनीति से पीछे हटने के अपने फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में चुनाव बेहद महंगे हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह केवल चुनावी राजनीति छोड़ रहे हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन से दूर नहीं हो रहे हैं।
इस मौके पर उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने 'अहिंदा' (अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और अनुसूचित जाति/जनजाति) गुट को एकजुट करने के लिए सिद्धारमैया की जमकर तारीफ की। परमेश्वर ने कहा कि सिद्धारमैया ने उपेक्षित समुदायों को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए इस मजबूत आंदोलन को खड़ा किया था, जिसका राजनीति पर भी गहरा और सकारात्मक असर पड़ा है।
इस महत्वपूर्ण रजत जयंती समारोह के दौरान संतोष लाड, मधु बंगारप्पा, पुट्टारंगशेट्टी, अजय सिंह और बैरती सुरेश सहित राज्य सरकार के कई प्रमुख मंत्री भी उपस्थित रहे।
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