
उत्तर प्रदेश: नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी और वीडियो फैलाने के आरोप में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की दो राष्ट्रीय प्रवक्ताओं पर मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी कि इन दोनों नेताओं ने 'एक्स' पर फर्जी दावों के साथ एक वीडियो साझा किया था, जिसे सीधे तौर पर नोएडा के मौजूदा प्रदर्शन से जोड़ दिया गया।
इसके अलावा, शांति भंग करने और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने के आरोप में 'एक्स' के दो अन्य हैंडल के खिलाफ भी एक और एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक, इन मामलों को मिलाकर सोमवार को हुई हिंसा के संबंध में अब तक कुल सात एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
राजद प्रवक्ता प्रियंका भारती और डॉ. कंचना यादव के खिलाफ यह प्राथमिकी मंगलवार को दर्ज की गई थी। यह कार्रवाई गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट के मीडिया सेल में तैनात सब-इंस्पेक्टर सुशील कुमार द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर की गई है।
दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, प्रियंका भारती ने जो वीडियो साझा किया था, वह असल में 11 अप्रैल 2026 को मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के बुढ़ार थाना क्षेत्र में रिकॉर्ड किया गया था। इस वीडियो में एक नशे में धुत युवक हंगामा करता हुआ नजर आ रहा था। पुलिस का आरोप है कि दोनों लोगों ने इस फुटेज को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित करते हुए इसे जानबूझकर नोएडा की घटना बताकर पेश किया।
एफआईआर में बताया गया है कि प्रियंका भारती ने अपनी पोस्ट के कैप्शन में लिखा था कि नोएडा में कर्मचारी हड़ताल पर हैं और सरकार उनकी जायज मांगों को बलपूर्वक कुचल रही है। वहीं, डॉ. कंचना यादव ने अपनी पोस्ट में इस वीडियो को नोएडा का बताते हुए आरोप लगाया कि 'गोदी मीडिया' मजदूर आंदोलन का पाकिस्तान से कनेक्शन गढ़ रहा है, जबकि नोएडा पुलिस मजदूरों पर लाठियां बरसा रही है।
पुलिस का कहना है कि इन भ्रामक पोस्ट्स ने नोएडा में डर और अविश्वास का माहौल पैदा किया, जिसका सीधा असर शहर की कानून-व्यवस्था पर पड़ा। यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 353(1)(b) (सार्वजनिक रूप से शरारत करने वाले बयान) और सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 की धारा 66 तथा 66D (कंप्यूटर संबंधी अपराध और प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी) के तहत दर्ज किया गया है।
इस मामले पर जब द मूकनायक ने प्रियंका भारती ने बातचीत की कोशिश की तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.
सोमवार को नोएडा के सेक्टर 20 पुलिस स्टेशन में मीर इलियास और अनुषी तिवारी के 'एक्स' हैंडल के खिलाफ भी एक एफआईआर दर्ज की गई है। इन दोनों हैंडल्स पर उन लोगों को भड़काने का आरोप है, जिन्होंने बाद में पुलिसकर्मियों पर हमला किया, वाहनों में तोड़फोड़ की और यातायात को पूरी तरह बाधित कर दिया।
शिकायत के मुताबिक, इन हैंडल्स ने पोस्ट किया था कि यूपी पुलिस के साथ झड़प में 14 लोगों की मौत हो गई है और 32 लोग घायल हुए हैं। पुलिस का मानना है कि ये दोनों हैंडल राजनीतिक दलों से जुड़े प्रतीत होते हैं। इन भ्रामक पोस्ट्स का नतीजा यह हुआ कि नोएडा के कई इलाकों में लोग डरे और गुस्से में आ गए, जिसके बाद उन्होंने गालियां दीं, पथराव किया और कंपनी कर्मचारियों को घायल कर दिया। इस नैरेटिव को गढ़ने के लिए 50 से अधिक बॉट्स का भी इस्तेमाल किया गया।
मंगलवार को गौतम बुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने जानकारी दी कि सोमवार के विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में चार महिलाओं सहित कुल 396 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मंगलवार दोपहर तक साइबर पुलिस स्टेशन में दो और सेक्टर 58, फेज 1 तथा सेक्टर 20 थानों में 1,700 से अधिक मजदूरों के खिलाफ पांच अन्य एफआईआर दर्ज की जा चुकी थीं। इनमें से 15 लोगों को नामजद किया गया है और उन पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा पुलिस पर पथराव करने का आरोप है।
अकेले सेक्टर 58 थाने में 1,200 मजदूरों पर मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर के अनुसार, इन उपद्रवियों ने सेक्टर 59 और सेक्टर 62 मेट्रो स्टेशनों के बीच लगे पुलिस बैरिकेड्स तोड़ दिए। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को ब्लॉक कर दिया और राहगीरों के साथ गाली-गलौज करते हुए उनके वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया।
इस पूरे घटनाक्रम पर बुधवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त लहजे में कहा कि बाहरी तत्वों को किसी भी समूह या फैक्ट्री के आंतरिक मामलों में दखल देने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने संगठनों से अपनी आंतरिक एकजुटता सुरक्षित रखने पर जोर देते हुए कहा कि बिगाड़ने वाले बहुत होते हैं, लेकिन बनाने वाले बहुत कम। मुख्यमंत्री ने सभी कर्मचारियों से अपनी एकता, आपसी विश्वास और एक सकारात्मक कार्य संस्कृति को मजबूत करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री का यह बयान उत्तर प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्ण की उस टिप्पणी के ठीक एक दिन बाद आया है। डीजीपी ने कहा था कि इलेक्ट्रॉनिक और सीसीटीवी से ऐसे सबूत सामने आए हैं, जो इस हिंसा को भड़काने में कुछ खास व्यक्तियों और समूहों की भूमिका की ओर स्पष्ट इशारा करते हैं।
मौजूदा हालात पर साइबर क्राइम के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) विवेक रंजन राय ने कहा कि फिलहाल पुलिस की सबसे पहली प्राथमिकता जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरा ध्यान शांति व्यवस्था पर है और अगला कदम हालात की समीक्षा के बाद ही तय किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि एफआईआर दर्ज कर ली गई हैं और जांच अधिकारी ने मामले की गहराई से छानबीन शुरू कर दी है।
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