नए कानून के इंतजार में अटकी मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी, नई योजना के लागू होने पर ही मिलेगी बढ़ोतरी

मनरेगा की जगह लेने वाले नए 'वीबी-जी राम जी' (VB-G RAM G) कानून के लागू होने तक 7 करोड़ मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ोतरी अटकी, फिलहाल पुरानी दरों पर ही होगा भुगतान।
MGNREGA wage hike 2026
7 करोड़ मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी में बढ़ोतरी नए 'वीबी-जी राम जी' कानून के लागू होने तक अटकी।(Ai Image)
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नई दिल्ली: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MG-NREGS) के तहत काम करने वाले सात करोड़ से अधिक मजदूरों को अपनी दिहाड़ी में बढ़ोतरी के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। केंद्र सरकार जब तक यूपीए के समय की इस रोजगार योजना की जगह लेने वाले नए 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)' यानी वीबी-जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 को लागू करने की अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक मजदूरी में कोई बदलाव नहीं होगा।

एक दशक से भी अधिक समय में यह पहला मौका है जब केंद्र सरकार ने फरवरी-मार्च के महीने में मनरेगा मजदूरी में संशोधन की अधिसूचना जारी नहीं की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मनरेगा के संचालन और नई वीबी-जी राम जी योजना को लागू करने वाले नोडल मंत्रालय, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) ने राज्यों को एक अहम सूचना दी है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई मजदूरी दरें तभी अधिसूचित की जाएंगी जब नया कानून प्रभावी हो जाएगा। तब तक के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 की पुरानी दरें ही लागू रहेंगी।

हाल ही में हुई एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने संबंधित राज्य सरकार के अधिकारियों को इस फैसले से अवगत कराया।

सूत्रों का कहना है कि सरकार नया कानून लागू होने के बाद ही मजदूरी की नई दरों की घोषणा करेगी और तब तक पिछले वित्तीय वर्ष की दरें ही सभी राज्यों में मान्य होंगी।

केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 की धारा 6 की उप-धारा (1) के तहत मजदूरी दरें तय करती है।

अमूमन नई दरें वित्तीय वर्ष के पहले दिन यानी 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाती हैं। केंद्र सरकार आमतौर पर नए वित्तीय वर्ष के शुरू होने से पहले ही मनरेगा मजदूरी अधिसूचित कर देती है, लेकिन इस साल एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी ऐसा नहीं हुआ है। पिछले 13 सालों से लगातार ऐसा होता आ रहा था कि आगामी वित्तीय वर्ष के लिए मजदूरी की घोषणा फरवरी या मार्च में ही कर दी जाती थी।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि पारंपरिक रूप से मजदूरी दरों में हर साल नए वित्तीय वर्ष से ठीक पहले संशोधन किया जाता है। चूंकि अभी मनरेगा से नए कानून वीबी-जी राम जी में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है, इसलिए इसके लागू होने तक मौजूदा दरें ही जारी रहेंगी। फिलहाल योजना से जुड़े सभी श्रमिकों को बिना किसी रुकावट के पुरानी दरों पर ही भुगतान किया जा रहा है।

मंत्रालय ने यह भी आश्वासन दिया है कि इस बदलाव के दौर में मजदूरों के कानूनी अधिकारों की पूरी तरह से रक्षा की जा रही है। रोजगार देने का काम बदस्तूर जारी है और पुरानी अधिसूचनाओं के अनुसार मजदूरी दी जा रही है। नया ढांचा लागू होते ही संशोधित मजदूरी दरें विधिवत रूप से अधिसूचित और लागू कर दी जाएंगी।

मनरेगा की मजदूरी दरें सीपीआई-एएल (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक-कृषि श्रम) में होने वाले बदलावों के आधार पर तय की जाती हैं। यह सूचकांक मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती महंगाई के स्तर को मापता है।

योजना के डैशबोर्ड पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 14 अप्रैल 2026 तक इस ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत 11.03 करोड़ सक्रिय मजदूर थे। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 5.34 करोड़ परिवारों के लगभग 7.2 करोड़ व्यक्तियों ने इस योजना का लाभ उठाया था।

पिछले साल केंद्र ने 27 मार्च को मनरेगा मजदूरी को अधिसूचित किया था, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के लिए लागू थी। तब पिछले वर्ष की तुलना में मजदूरी में 2 से 7 प्रतिशत तक का इजाफा किया गया था।

आपको बता दें कि एनडीए सरकार ने दो दशक पुराने मनरेगा, 2005 को निरस्त करने के लिए दिसंबर 2025 में वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 पारित किया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल मजदूरी रोजगार प्रदान करने के लिए एक नई केंद्र प्रायोजित योजना शुरू करना है।

विपक्ष ने इस नए कानून के कई प्रावधानों की कड़ी आलोचना की है। इनमें फंड-शेयरिंग पैटर्न (धारा 22), मानक आवंटन (धारा 4 की उप-धारा 5), और कृषि के व्यस्त सीजन के दौरान रोजगार गारंटी पर रोक (धारा 6) जैसे नियम शामिल हैं। इन प्रावधानों का सीधा असर राज्यों के खजाने पर पड़ेगा, जो पहले से ही कई तरह की वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

मनरेगा से अलग, वीबी-जी राम जी अधिनियम ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के वित्तपोषण में राज्यों की अधिक हिस्सेदारी का प्रस्ताव करता है। नए कानून की धारा 22(1) के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच फंड-शेयरिंग का अनुपात 11 राज्यों के लिए 90:10 और बाकी सभी राज्यों के लिए 60:40 होगा। जबकि पुरानी मनरेगा योजना के तहत, केंद्र पूरी मजदूरी का भुगतान करता था और सामग्री व प्रशासनिक लागत का 75 प्रतिशत हिस्सा वहन करता था।

सरकार ने अभी तक उस तारीख की घोषणा नहीं की है जब से नई योजना जमीन पर उतारी जाएगी। तब तक के लिए मनरेगा योजना ही चलती रहेगी। इसके लिए सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में 30,000 करोड़ रुपये की बड़ी राशि आवंटित की है।

इस बीच, सूत्रों ने बताया है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने नई योजना लागू होने तक मनरेगा के तहत हर महीने के आधार पर लेबर बजट (सृजित किए जाने वाले मानव दिवसों की संख्या) को मंजूरी देने का अहम फैसला किया है।

इसी कड़ी में अप्रैल महीने के लिए 29.94 करोड़ ह्युमन डे का लेबर बजट स्वीकृत किया गया है। यह आंकड़ा पिछले साल के इसी महीने में स्वीकृत 26.93 करोड़ मानव दिवसों की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है।

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