
भोपाल। एमपी में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सिंघार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि जांच में दूषित पेयजल, प्रशासनिक लापरवाही, तकनीकी खामियों और सरकारी स्तर पर हुई देरी जैसे गंभीर तथ्य सामने आने के बावजूद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सिंघार ने कहा कि बीते 2 अक्टूबर को हुई प्रेस वार्ता में उन्होंने भागीरथपुरा मामले को लेकर सामने आए तथ्यों को सार्वजनिक किया था। उनके मुताबिक दूषित पानी ने कई परिवारों को अपनों से हमेशा के लिए जुदा कर दिया। इसके बावजूद सरकार की ओर से जवाबदेही तय करने के बजाय जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
66 दिन तक मेयर के हस्ताक्षर के लिए लंबित रही फाइल
उमंग सिंघार ने जांच से जुड़े एक महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख करते हुए कहा कि एक जरूरी फाइल इंदौर के मेयर के हस्ताक्षर के लिए 66 दिनों तक लंबित रही। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला लोगों की जान से जुड़ा था, तब प्रशासनिक स्तर पर इतनी लंबी देरी क्यों हुई?
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच के दौरान जरूरी इंजीनियरिंग रिकॉर्ड तक संबंधित आयोग के सामने उपलब्ध नहीं कराए गए। सिंघार के मुताबिक ये तथ्य सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
गंभीर तथ्य सामने आने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने भाजपा सरकार से सीधे सवाल करते हुए पूछा कि जांच रिपोर्ट में गंभीर तथ्य सामने आने के बाद भी इंदौर के मेयर और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
उन्होंने कहा कि यदि जांच में दूषित पेयजल, प्रशासनिक लापरवाही और तकनीकी खामियों की पुष्टि हुई है तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिम्मेदारी किसकी है और अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
सिंघार ने आरोप लगाया कि रिपोर्ट को दबाने और उसके तथ्यों को छिपाने की कोशिश की गई। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक और निष्पक्ष है तो उसके आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने में देरी क्यों की जा रही है।
जनता मरती रही, सिस्टम सोता रहा
अपने बयान में उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि “जनता मरती रही, सिस्टम सोता रहा और भाजपा सरकार जिम्मेदारों को बचाती रही।”
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार की जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। जब किसी सरकारी व्यवस्था की लापरवाही से लोगों की जान जाती है तो जिम्मेदारी तय करना सरकार का दायित्व है।
सरकार की जवाबदेही पर उठाए सवाल
सिंघार ने कहा कि अब सवाल सिर्फ भागीरथपुरा का नहीं बल्कि सरकार की जवाबदेही का भी है। उन्होंने पूछा कि जब जांच में गंभीर तथ्य सामने आ चुके हैं तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? रिपोर्ट के तथ्यों को छिपाने की कोशिश क्यों की गई और इंदौर के मेयर सहित संबंधित अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
उन्होंने भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार जनता के सवालों से बच नहीं सकती। भागीरथपुरा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को जवाब चाहिए और सरकार को इस पूरे मामले में अपनी जवाबदेही तय करनी होगी।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।
यहां सब्सक्राइब करें