
भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से कई लोगों की जान जाने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। इस घटना ने न सिर्फ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरकार के विकास और ‘स्मार्ट सिटी’ मॉडल पर भी बहस छेड़ दी है। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भागीरथपुरा पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनका दर्द सुना।
राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि जब सरकार ‘अर्बन मॉडल’ और स्मार्ट सिटी की बातें करती है, तब पीने के पानी से मौतें होना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा- “हमसे कहा जाता था कि देश को स्मार्ट शहर मिलेंगे, लेकिन यह कैसा स्मार्ट सिटी मॉडल है, जहां लोगों को साफ पानी तक नहीं मिल पा रहा। पानी पीने से लोगों की मौत हो रही है। क्या यही सरकार का अर्बन मॉडल है?”
मां को खोने वाले मनीष पवार की आपबीती
दूषित पानी के कारण अपनी मां को खोने वाले मनीष पवार ने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद बताया कि राहुल गांधी पीड़ितों की मदद करने, उन्हें दिलासा और सांत्वना देने आए थे। उन्होंने आर्थिक सहायता के रूप में एक लाख रुपये का चेक दिया। मनीष ने कहा कि राहुल गांधी ने उनसे भरोसा दिलाया कि वे स्वच्छ पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयास करेंगे। इस दौरान करीब 20 पीड़ित परिवार वहां मौजूद थे।
मनीष पवार की आंखों में आज भी अपनी मां को खोने का दर्द साफ दिखता है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते प्रशासन ने शिकायतों पर ध्यान दिया होता, तो शायद कई लोगों की जान बच सकती थी।
पैदल चलकर पीड़ितों के घर पहुंचे राहुल गांधी
राहुल गांधी सबसे पहले गीता बाई के परिवार से मिलने पहुंचे। वहां उन्होंने परिजनों से पूरी घटना की जानकारी ली और उन्हें ढांढस बंधाया। इसके बाद वे पैदल ही जीवनलाल के घर पहुंचे। भागीरथपुरा की संकरी गलियों में भारी भीड़ थी। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को बैरिकेडिंग करनी पड़ी।
इसके बाद राहुल गांधी संस्कार उद्यान पहुंचे, जहां बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार उनका इंतजार कर रहे थे। लोग रास्ते में उन्हें रोक-रोककर अपनी समस्याएं बताते रहे। कोई कह रहा था कि अभी भी गंदा पानी आ रहा है, तो कोई बता रहा था कि बच्चे और बुजुर्ग अब भी बीमार हैं।
अभी भी मजबूरी में गंदा पानी पी रहे लोग
संस्कार उद्यान में पीड़ितों ने बताया कि इलाके में लंबे समय से पीने के पानी में गंदगी आ रही थी। कई बार नगर निगम और संबंधित विभागों में शिकायत की गई, लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। लोगों का कहना है कि अगर समय पर जांच होती और पाइपलाइन की मरम्मत की जाती, तो यह हादसा नहीं होता।
पीड़ितों ने यह भी बताया कि अब भी कई जगहों पर गंदा पानी आ रहा है। एक दिन पहले ही कुछ घरों में साफ पानी आया है, लेकिन अधिकारियों ने कहा है कि अभी भी पानी उबालकर ही पीना चाहिए। इससे साफ है कि हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। इलाके में लगातार डायरिया और उल्टी-दस्त के मामले सामने आ रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या भले ही कुछ कम हुई हो, लेकिन कई लोगों की हालत अब भी गंभीर बताई जा रही है।
राहुल गांधी का सरकार पर सीधा हमला
पीड़ितों से मिलने के बाद राहुल गांधी ने कहा- “सरकार बड़े-बड़े दावे करती है स्मार्ट सिटी, अर्बन मॉडल, विकास। लेकिन सच्चाई यह है कि लोगों को पीने का साफ पानी तक नहीं मिल रहा। पानी पीने से लोग मर रहे हैं। यह सिर्फ इंदौर की बात नहीं है, देश के कई शहरों में यही हाल है।”
उन्होंने कहा कि साफ पानी, कम प्रदूषण और सुरक्षित जीवन देना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन सरकार यह जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह असफल रही है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि लोगों को डराया जाता है, उनकी शिकायतें नहीं सुनी जातीं और जब हादसा हो जाता है, तब सिर्फ औपचारिकताएं निभाई जाती हैं।
पीड़ितों की मांग: दोषियों को मिले कड़ी सजा
संस्कार उद्यान में मौजूद पीड़ित परिवारों ने एक सुर में कहा कि इस मामले के असली दोषियों को बचाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जिन अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही से यह हादसा हुआ, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
एक पीड़ित ने कहा- “जो लोग मर गए, उन्हें तभी शांति मिलेगी, जब दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। अगर सब कुछ ऐसे ही चलता रहा, तो आगे भी ऐसी मौतें होती रहेंगी।”
लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद न तो समय पर पानी की जांच हुई और न ही पाइपलाइन की हालत सुधारी गई। यही लापरवाही इस त्रासदी की असली वजह बनी।
कांग्रेस की ओर से आर्थिक मदद
कांग्रेस की ओर से जानकारी दी गई कि पीड़ित परिवारों को डेढ़ लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है। राहुल गांधी ने भी कुछ परिवारों को व्यक्तिगत रूप से सहायता दी। हालांकि पीड़ितों का कहना है कि पैसे से जान वापस नहीं आ सकती, लेकिन इससे कम से कम परिवारों की कुछ मदद जरूर होगी।
प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे मामले ने नगर निगम, जल विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब लोग लंबे समय से गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या अधिकारियों ने लापरवाही बरती या जानबूझकर शिकायतों को नजरअंदाज किया?
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