
दिल्ली/भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अब राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि शुद्धीकरण के नाम पर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है और कई ऐसे लोगों के नाम सूची में जोड़ दिए गए हैं जो संबंधित पते पर रहते ही नहीं हैं। इस मामले को लेकर सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस नेताओं के साथ मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और निष्पक्ष जांच की मांग की। उनके साथ नरेला विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रहे मनोज शुक्ला भी मौजूद थे। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह की गड़बड़ियों की जांच नहीं हुई तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि भोपाल जिले के नरेला विधानसभा क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची में बड़ी संख्या में फर्जी मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान यह दावा किया गया था कि अपात्र और संदिग्ध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट सामने आ रही है। कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं और पार्टी प्रत्याशी रहे मनोज शुक्ला ने जब मतदाता सूची की जमीनी स्तर पर जांच कराई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि 21 फरवरी 2026 को जारी अंतिम मतदाता सूची में कई ऐसे नाम दर्ज हैं जो उस पते पर निवास ही नहीं करते।
एक ही मकान में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम दर्ज
जांच के दौरान सामने आया कि करोंद क्षेत्र की रतन कॉलोनी में कई मकानों के पते पर असामान्य रूप से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम दर्ज किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर रतन कॉलोनी निवासी पोखनलाल साहू के मकान में वास्तविक रूप से केवल छह लोग रहते हैं, लेकिन मतदाता सूची में उसी पते पर 65 मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। इसी प्रकार कमलेंद्र कुमार गुप्ता के मकान नंबर 10 पर 40 और हमीर सिंह यादव के मकान नंबर 21 पर 45 मतदाताओं के नाम दर्ज पाए गए। मकान मालिकों का कहना है कि वे इन नामों में दर्ज अधिकांश लोगों को पहचानते तक नहीं हैं और न ही वे कभी उनके घर पर रहने आए हैं। इस स्थिति ने स्थानीय स्तर पर भी लोगों को हैरान कर दिया है।
इन मकान मालिकों ने इस संबंध में शपथ पत्र भी तैयार कर चुनाव आयोग को दिए हैं। उनका कहना है कि उनके पते का दुरुपयोग करते हुए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम जोड़ दिए गए हैं। कांग्रेस नेताओं ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में इन शपथ पत्रों को प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करते हुए मांग की है कि ऐसे सभी फर्जी नामों को मतदाता सूची से हटाया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जाए ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरी हो सके।
नरेला विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रहे मनोज शुक्ला ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों का यह पहला मामला नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव से पहले भी उन्होंने लगभग 20 हजार ऐसे मतदाताओं की सूची चुनाव आयोग को सौंपी थी जिनके नाम दो-दो स्थानों पर दर्ज थे। उस समय भी उन्होंने इस विषय में कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और शुद्धता सुनिश्चित करना लोकतंत्र की मूल आवश्यकता है और यदि इसमें गड़बड़ी होती है तो चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
कांग्रेस नेताओं ने लगाए आरोप
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह समस्या केवल नरेला विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई हैं। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने भी दावा किया कि दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम संदिग्ध तरीके से जोड़े और हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां फर्जी शिकायतों के आधार पर पांच हजार से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से कटवा दिए गए, जिससे कई वास्तविक मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
SIR प्रक्रिया के दौरान भी कांग्रेस नेताओं द्वारा कई ऐसे आवासों की जानकारी चुनाव आयोग को दी गई थी जहां एक ही पते पर 120 से 130 तक मतदाताओं के नाम दर्ज पाए गए थे। कांग्रेस का कहना है कि यह स्थिति सामान्य नहीं है और इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही या हेरफेर हुआ है। पार्टी नेताओं ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए और व्यापक स्तर पर जांच कराई जाए ताकि मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनी रह सके।
निर्वाचन आयोग ने दिया जांच का आश्वासन
वहीं, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए सभी शिकायतों और प्रमाणों की विधिवत जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस शिकायत को जांच के लिए भोपाल जिला प्रशासन को भेज दिया गया है। प्रशासन अब संबंधित पते और मतदाताओं की सत्यता की जांच करेगा और अपनी रिपोर्ट चुनाव आयोग को सौंपेगा।
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