
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती से माफी मांगने के ठीक तीन दिन बाद आकाश आनंद की पार्टी में सम्मानजनक वापसी हो गई है। मायावती ने उन्हें माफ करते हुए एक बार फिर से नेशनल कन्वीनर (राष्ट्रीय संयोजक) के पद पर बहाल कर दिया है। गौरतलब है कि बीती 10 सितंबर को उन्हें इस अहम पद से हटा दिया गया था।
आकाश आनंद के साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। यह तीसरी बार है जब उन्हें पद से हटाया गया और फिर वापस लाया गया। इससे पहले मई 2024 और मार्च 2025 में भी कुछ ऐसे ही नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिले थे। हालांकि, इस बार उनकी वापसी एक महीने से भी कम समय के भीतर हो गई है।
सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस बड़े फैसले की जानकारी देते हुए मायावती ने स्पष्ट किया कि पार्टी और आंदोलन के हित को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने बताया कि संगठन के भीतर से मिले सकारात्मक फीडबैक और आकाश की माफी के आधार पर ही यह वापसी संभव हो पाई है।
बसपा सुप्रीमो के अनुसार, पार्टी के ज्यादातर लोगों का यही मानना था कि आकाश की अपील स्वीकार की जानी चाहिए। संगठन चाहता था कि उन्हें अपनी पुरानी जिम्मेदारियों के साथ फिर से काम पर लौटने का मौका मिलना चाहिए।
अपने बयान में मायावती ने यह भी साफ किया कि इस अहम फैसले में आकाश के पिता आनंद कुमार और उनके छोटे भाई ईशान आनंद की भी पूरी रजामंदी शामिल है।
बसपा प्रमुख ने आकाश के उज्जवल राजनीतिक भविष्य की कामना करते हुए उन्हें अपना भरपूर प्यार और आशीर्वाद दिया। इसके साथ ही उन्होंने ईशान और आनंद कुमार को भी अपनी शुभकामनाएं दीं। हाल के घटनाक्रमों में उनका साथ देने वाले बहुजन समाज के लोगों और अपने शुभचिंतकों का मायावती ने विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।
आकाश आनंद, मायावती के भाई आनंद कुमार के बड़े बेटे हैं। जब आकाश को उनके पद से हटाया गया था, तब मायावती ने उनके छोटे भाई ईशान को पार्टी का नेशनल कोर्डिनेटर नियुक्त किया था। अपनी पोस्ट में मायावती ने ईशान के व्यवहार और समर्पण की जमकर तारीफ की।
उन्होंने कहा कि ईशान ने एक सच्चे मिशनरी की तरह यह साबित किया कि वह बिना किसी पद के भी पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ उनके मार्गदर्शन में काम करते रहेंगे।
बता दें कि 10 सितंबर को आकाश को बाहर का रास्ता दिखाने से पहले ही उनकी जिम्मेदारियों में भारी कटौती कर दी गई थी। इससे पूर्व 3 सितंबर को हुई पार्टी की अखिल भारतीय बैठक में मायावती ने ऐलान किया था कि आकाश को नेशनल कन्वीनर के पद से हटाकर एक आम कार्यकर्ता बना दिया गया है।
इस पूरे विवाद की मुख्य वजह आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ को माना गया था। 9 सितंबर को मायावती ने 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने की नसीहत दी थी।
जब आकाश ने उस संदेश को रीपोस्ट नहीं किया, तो मायावती ने इसे पार्टी नेतृत्व के साथ धोखे और ससुर के प्रति वफादारी के रूप में देखा। इसी के बाद आकाश पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी।
बीते शुक्रवार को अपने माफीनामे में आकाश ने सफाई देते हुए कहा कि उस दौरान वह सोशल मीडिया से दूर थे, इसलिए संदेश साझा नहीं कर सके। उन्होंने दुख जताया कि उनकी इस चुप्पी का गलत मतलब निकाला गया।
इसके साथ ही आकाश ने अशोक सिद्धार्थ को निष्कासित करने और उनके संन्यास के फैसले का पूरा समर्थन किया। उन्होंने अपने संदेश में स्पष्ट लिखा कि पार्टी का मिशन पारिवारिक संबंधों से कहीं बढ़कर है।
सोमवार को मायावती ने उम्मीद जताई कि सिद्धार्थ के रिटायरमेंट के बाद अब पार्टी का कामकाज सुचारू और सही ढंग से चलेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में बार-बार संगठनात्मक बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, हालांकि यह बहुत हद तक आकाश के काम और आचरण पर ही निर्भर करेगा।
बसपा सुप्रीमो ने यह भी स्पष्ट किया कि वैसे तो आकाश का रवैया और व्यक्तित्व हमेशा से ठीक रहा है, लेकिन हाल ही में उनसे जुड़े कुछ विवादों के कारण पार्टी में बार-बार बदलाव करने पड़े और अंततः सिद्धार्थ को संन्यास लेना पड़ा।
अपने माफीनामे में आकाश आनंद ने संकल्प लिया है कि वह मायावती के 'एकमात्र नेतृत्व' में ही काम करेंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह अपनी मेहनत और काम से खोया हुआ विश्वास दोबारा हासिल करेंगे और कभी किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे।
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