गांधी जयंती पर छुआछूत: कर्नाटक के मंदिर में दलितों के लिए अलग भोजन की व्यवस्था, 20 पर केस दर्ज

कर्नाटक के बागलकोट में लक्ष्मी देवी मेले के दौरान दलितों के साथ भेदभाव, गांधी जयंती पर अलग खाना परोसने के आरोप में 20 लोगों पर एफआईआर दर्ज।
Karnataka Dalit news, Bagalkot temple discrimination
कर्नाटक के बागलकोट में गांधी जयंती के दिन छुआछूत का शर्मनाक मामला। मंदिर के मेले में दलितों को अलग खाना परोसने पर 20 लोगों के खिलाफ केस दर्ज।
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कर्नाटक के बागलकोट जिले से एक बेहद शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसने समाज में आज भी मौजूद छुआछूत जैसी कुप्रथा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक मंदिर के मेले के दौरान कथित तौर पर दलित समुदाय के लोगों को अलग से भोजन परोसने का मामला सामने आया है। इस घटना ने पूरे इलाके में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।

यह हैरान करने वाला मामला बागलकोट के तेरदल तालुक स्थित तमदद्दी गांव का है। गांव के स्थानीय मंदिर में लक्ष्मी देवी का मेला चल रहा था। इसी आयोजन के दौरान दलित समुदाय के साथ यह भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया।

गांव के ही रहने वाले दलित समुदाय के सदस्य बसप्पा यलदगल ने इस घटना को लेकर तेरदल पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। अपनी शिकायत में उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर को आयोजित मेले के दौरान उनके समुदाय के लोगों के लिए भोजन की बिल्कुल अलग व्यवस्था की गई थी।

हैरानी की बात यह है कि यह घटना 2 अक्टूबर को हुई, जिस दिन पूरा देश महात्मा गांधी की जयंती मना रहा था। बापू ने जीवन भर दलित अधिकारों की वकालत की और हिंदू धर्म में छुआछूत को एक 'पाप' करार दिया था। उन्होंने मंदिरों और स्कूलों में प्रवेश सहित सभी के लिए समान अधिकारों का पुरजोर समर्थन किया था।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत देश में छुआछूत पर लंबे समय से पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है। किसी भी रूप में इस तरह का आचरण करना एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए सख्त सजा का प्रावधान है।

बसप्पा यलदगल द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, मेले में सवर्ण समुदाय के लोगों को सामान्य भोजन परोसा गया था। वहीं, दलित समुदाय के लोगों को कथित तौर पर अलग से केवल 'गंजी' परोसी गई। गंजी चावल से बना एक किण्वित (फर्मेंटेड) व्यंजन है, जिसका सेवन भारत के विभिन्न हिस्सों में किया जाता है।

ग्रामीण की शिकायत के आधार पर पुलिस ने 3 अक्टूबर को मामला दर्ज कर लिया है। इस मामले में लगभग 20 लोगों को नामजद किया गया है।

दर्ज की गई एफआईआर में सुकुमार पाटिल, बसवराज यादवाड़, नंदप्पा नंदप्पनवर, भीमप्पा कोन्नूर और सुरेश अक्कीवत्ती सहित कई अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।

इस घटना ने गांव के लोगों में तनाव पैदा कर दिया है, क्योंकि यह ऐसा पहला मामला नहीं है। बताया जा रहा है कि इससे पहले गांव में 'पंचकल्याणोत्सव' नामक एक अन्य धार्मिक आयोजन के दौरान भी इसी तरह के भेदभाव के आरोप लग चुके हैं।

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