'आरक्षण को आर्थिक तरक्की से तौलना गलत', RSS चीफ मोहन भागवत के बयान को मायावती ने बताया जातिवादी मानसिकता

बसपा सुप्रीमो मायावती ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के 'आरक्षण छोड़ने' वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे संघ की 'जातिवादी मानसिकता' करार देते हुए कहा कि आरक्षण को केवल आर्थिक तरक्की के पैमाने पर नहीं मापा जा सकता
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती
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लखनऊ: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण को लेकर दिए गए हालिया बयान पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रविवार को उन्होंने संघ प्रमुख के उस सुझाव को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें यह अपील की गई थी कि जो लोग आरक्षण का लाभ उठा चुके हैं, उन्हें अपने समुदाय के अन्य लोगों के लिए इसे स्वेच्छा से छोड़ देना चाहिए।

मायावती ने संघ की इस सोच को 'जातिवादी मानसिकता' का परिचायक करार दिया है। उनका कहना है कि ऐसे बयान भले ही कुछ संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति कर सकते हों, लेकिन ये पूरी तरह से हमारे संवैधानिक उद्देश्यों की अनदेखी करते हैं।

बसपा सुप्रीमो ने स्पष्ट किया कि आरक्षण का मूल उद्देश्य सदियों से क्रूर जातिवादी व्यवस्था का दंश झेल रहे करोड़ों शोषितों, पीड़ितों और उपेक्षितों को समानता का संवैधानिक और कानूनी अधिकार दिलाना है। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख का यह सोचना कि आरक्षण का जानबूझकर राजनीतिकरण किया गया है और लाभार्थियों को इसके फायदे त्याग देने चाहिए, जमीनी हकीकत से बहुत दूर है। मायावती ने जोर देकर कहा कि आरक्षण की सफलता या इसके औचित्य को केवल आर्थिक प्रगति के संकुचित पैमाने पर बिल्कुल नहीं मापा जा सकता।

इस गंभीर विषय के संदर्भ में 'क्रीमी लेयर' पर चर्चा करने को बसपा प्रमुख ने पूरी तरह से अनुचित और संविधान की मूल भावना के विपरीत बताया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि आज के समय में भी समाज का यह वंचित तबका जातिवाद का शिकार होता है और इस कड़वी सच्चाई को आरएसएस से बेहतर भला कौन समझ सकता है।

उनका स्पष्ट मानना है कि अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणियों के लिए लागू किया गया आरक्षण सीधे तौर पर सामाजिक बदलाव और आर्थिक मुक्ति से जुड़ा हुआ है, इसलिए संघ को इस मुद्दे पर राजनीति करना बंद कर देना चाहिए।

अपनी बात को खत्म करते हुए मायावती ने आरएसएस को एक सख्त नसीहत भी दी। उन्होंने मांग की कि संघ को देश के मानवतावादी और कल्याणकारी संविधान का पूरी तरह से सम्मान करना चाहिए। बसपा अध्यक्ष ने कहा कि आरक्षण के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की वकालत करने के बजाय, आरएसएस को देश में एक समतामूलक समाज की स्थापना के लिए अपने संवैधानिक कर्तव्यों को पूरा करने में सहयोग करना चाहिए, क्योंकि वर्तमान समय में देश को इसी की सबसे अधिक आवश्यकता है।

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