भोपाल। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के सैलाना विधानसभा क्षेत्र के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल को पत्र लिखकर अजय गुप्ता नामक व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डोडियार ने आरोप लगाया है कि अजय गुप्ता ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग कर अनुसूचित जनजाति (एसटी) के कोटे से 2015 में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) की परीक्षा पास कर डिप्टी कलेक्टर का पद हासिल किया। विधायक ने इसे आदिवासी समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इस मामले की गहन जांच की मांग की है।
विधायक कमलेश्वर डोडियार ने अपने पत्र में लिखा है कि अजय गुप्ता ने अपने पिता के नाम और जाति प्रमाण पत्र में हेरफेर करके खुद को एसटी वर्ग का दिखाया। उन्होंने यह भी कहा कि अजय गुप्ता सामान्य जाति से हैं और उन्होंने अपने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरक्षित वर्ग के तहत नौकरी प्राप्त की।
डोडियार ने यह भी उल्लेख किया कि यह जानकारी उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से मिली, जहां इस प्रकरण से जुड़े दस्तावेज और जानकारी सामने आई। विधायक के अनुसार, अजय गुप्ता ने न केवल सरकारी तंत्र को धोखा दिया है, बल्कि ऐसे पात्र आदिवासी उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन किया है, जो वास्तव में इन पदों के योग्य थे।
जाति प्रमाण पत्रों की जांच: अजय गुप्ता और उनके परिवार के सभी सदस्यों के जाति प्रमाण पत्रों की गहन जांच की जाए।
सख्त कार्रवाई: अगर अजय गुप्ता दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें तुरंत सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
आरक्षित वर्ग के अधिकारों की सुरक्षा: फर्जी दस्तावेजों पर आरक्षण का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं ताकि आदिवासी वर्ग के वास्तविक हकदारों के अधिकार सुरक्षित रहें।
इस प्रकरण को लेकर विधायक डोडियार ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सरकारी नौकरियां आदिवासी युवाओं के अधिकारों और उनके जीवन को सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण जरिया हैं।
उन्होंने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरक्षण का दुरुपयोग करना न केवल संविधान में दिए गए आरक्षण प्रावधानों का उल्लंघन है, बल्कि यह सरकारी धन और संसाधनों का भी दुरुपयोग है। ऐसे मामलों से योग्य आदिवासी उम्मीदवारों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है, जो कि अन्यायपूर्ण है
द मूकनायक से बातचीत करते हुए विधायक कमलेश्वर डोडियार ने कहा, "यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की फर्जी नौकरी का नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज के अधिकारों पर हमला है। अजय गुप्ता जैसे लोग फर्जी दस्तावेजों के सहारे न केवल सरकारी व्यवस्था का मजाक बना रहे हैं, बल्कि उन गरीब और वंचित आदिवासी युवाओं का भविष्य भी छीन रहे हैं, जो इन पदों के असली हकदार हैं। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमने राज्यपाल से सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि ऐसे धोखेबाजों के खिलाफ एक कड़ा संदेश दिया जा सके।"
उन्होंने आगे कहा, "अगर प्रशासन और सरकार ने इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह आदिवासी समुदाय के प्रति उनकी उदासीनता को दिखाएगा। आरक्षण आदिवासियों का संवैधानिक अधिकार है और इसे कोई छीन नहीं सकता। हम सुनिश्चित करेंगे कि अजय गुप्ता को बर्खास्त कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो। अगर जरूरत पड़ी, तो मैं सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटूंगा। विधानसभा में इस मामले को उठाऊंगा।"
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