
भोपाल। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय और रुंझ बांध तथा ललितपुर-सिंगरौली रेल मार्ग से प्रभावित विस्थापितों का ‘चिता आंदोलन’ शनिवार को आठवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने आंदोलन स्थल पर लंबे समय तक डटे रहने की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने यहां अस्थायी टपरियां बनाकर रहने की व्यवस्था की है। साथ ही राशन जुटाया गया है और पीने के पानी के लिए छोटा कुआं भी खोदा गया है।
विस्थापितों का कहना है कि बिजली-पानी बंद किए जाने और प्रशासन की ओर से नोटिस दिए जाने के बावजूद वे आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। उनका कहना है कि जब तक प्रभावित परिवारों को पूरा मुआवजा और उचित पुनर्वास नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन स्थल पर रहने की तैयारी
आंदोलनकारियों ने स्थल पर अस्थायी टपरियां बनाकर रहने की व्यवस्था की है। उनका कहना है कि अब वे लंबे समय तक यहीं रहकर अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करेंगे। इसके लिए राशन समेत रोजमर्रा की जरूरत का सामान भी जुटाया गया है।
पीने के पानी की व्यवस्था के लिए आंदोलन स्थल पर छोटा कुआं भी खोदा गया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से सुविधाएं बंद किए जाने के बावजूद वे आंदोलन को कमजोर नहीं पड़ने देंगे।
अमित भटनागर बोले- दबाव से आंदोलन नहीं रुकेगा
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने वीडियो जारी कर प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले बिजली-पानी बंद किया गया, इसके बाद ऐसे बयान दिए गए जिन्हें आंदोलनकारी गुमराह करने वाला मानते हैं और अब शांति भंग करने के नोटिस भेजे जा रहे हैं।
भटनागर के मुताबिक, प्रशासन की ओर से दबाव बढ़ने के साथ आंदोलन भी मजबूत होगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
पुनर्वास को लेकर उठाए सवाल
आंदोलन में शामिल हिसाबी राजपूत और दिव्या अहिरवार ने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि सिंचाई परियोजनाओं के डूब क्षेत्र में आने वाले परिवारों के पुनर्वास के लिए कानून में प्रावधान हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों को इन प्रावधानों का लाभ जमीन पर नहीं मिल रहा है।
उन्होंने सवाल किया कि जब लोगों के घर डूब क्षेत्र में आ रहे हैं तो उनके पुनर्वास की व्यवस्था कहां की गई है। उनका कहना है कि सिर्फ कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बजाय पुनर्वास से जुड़े नियमों को जमीन पर लागू किया जाना चाहिए।
मृतका के परिजन ने मुआवजे को लेकर लगाए आरोप
मृतक रमिया बाई आदिवासी के नाती उदासी आदिवासी ने मुआवजा मिलने में देरी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि अगर उनकी दादी को समय पर मुआवजा मिल जाता तो वह दूसरी जगह अपना घर बना सकती थीं।
उन्होंने कहा कि घर डूबने की चिंता के बीच उनकी दादी की मौत हो गई। परिवार ने मुआवजे और पुनर्वास की प्रक्रिया को लेकर प्रशासन से स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है।
ग्रामीणों ने मुआवजे की जांच की मांग की
दीपक द्विवेदी और मंगल यादव समेत ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में जलस्तर बढ़ रहा है, जबकि कई प्रभावित परिवारों का मुआवजा अब भी रुका हुआ है। उन्होंने प्रशासन से गांव-गांव जाकर मुआवजे की स्थिति की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों के मुताबिक, जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किस परिवार को कितना मुआवजा दिया गया है और कितना मुआवजा अभी बाकी है।
पूरा मुआवजा और पुनर्वास मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन
आंदोलनकारियों ने साफ किया है कि उनकी मांगें पूरी होने तक ‘चिता आंदोलन’ जारी रहेगा। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को पूरा मुआवजा, उचित पुनर्वास और उनके अधिकारों के अनुसार सुविधाएं मिलने के बाद ही आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।
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