
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में शब्दावली को लेकर एक सख्त और अहम कदम उठाया है। सरकार ने अपने सभी विभागों, सार्वजनिक संस्थानों और शिक्षण संस्थानों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे आधिकारिक संचार और कामकाज में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए क्रमशः 'हरिजन' और 'गिरिजन' शब्दों का प्रयोग बिल्कुल न करें।
इस संबंध में हरियाणा के मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से मंगलवार को एक पत्र जारी किया गया है, जिसमें इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।
ऐतिहासिक संदर्भ और वैचारिक मतभेद
इस शब्दावली का इतिहास काफी पुराना है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अनुसूचित जातियों को सम्मान देने के लिए 'हरिजन' नाम दिया था, जिसका अर्थ होता है 'ईश्वर के लोग' या 'ईश्वर की संतान'। हालांकि, संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर 'हरिजन' शब्द के उपयोग के खिलाफ थे और वे इसके बजाय 'दलित' शब्द का इस्तेमाल करना ज्यादा पसंद करते थे।
किन पर लागू होगा यह आदेश?
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, हरियाणा सरकार ने राज्य के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों, निगमों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, उप-मंडल अधिकारियों (नागरिक) और विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों को निर्देश जारी किए हैं। इन सभी को स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि वे किसी भी तरह के सरकारी मामलों, पत्राचार या रिकॉर्ड में 'हरिजन' और 'गिरिजन' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से सख्ती से बचें।
संविधान और केंद्र के निर्देशों का हवाला
जारी किए गए पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत के संविधान में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को दर्शाने के लिए इन अभिव्यक्तियों (हरिजन/गिरिजन) का कोई उल्लेख नहीं है। राज्य सरकार ने भारत सरकार के उन निर्देशों का भी हवाला दिया है, जिनमें आधिकारिक कामकाज में इन शब्दों को हटाने का स्पष्ट आदेश दिया गया था।
क्यों पड़ी दोबारा निर्देश देने की जरूरत?
राज्य सरकार ने हाल ही में मामले की समीक्षा की थी। इस दौरान यह बात सामने आई कि स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कुछ विभाग इनका पूरी तरह से पालन नहीं कर रहे थे और पुराने ढर्रे पर चल रहे थे।
इसी लापरवाही को देखते हुए, अब सभी विभागों और अधिकारियों को केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि भविष्य में सभी आधिकारिक रिकॉर्ड, पत्राचार और संचार से इन शब्दों को पूरी तरह हटा दिया जाए।
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