उत्तर प्रदेश: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने रविवार को नई पीढ़ी के युवाओं को लेकर एक अहम रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बसपा को 'जेन-जेड' (Gen-Z) और 'जेन-अल्फा' (Gen-Alpha) की बुनियादी मांगों और उनकी मौजूदा समस्याओं से पूरी सहानुभूति है। युवा वर्ग की इन परेशानियों को सुलझाने के लिए पार्टी ने सड़कों पर उतरने के बजाय एक शांतिपूर्ण कूटनीति अपनाई है।
मायावती ने अपनी सभी राज्य इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि वे युवाओं की समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित राज्यों और क्षेत्रों के अधिकारियों से सीधे संपर्क करें।
युवाओं के मुद्दों पर अपना रुख साफ करते हुए बसपा प्रमुख ने पार्टी कार्यकर्ताओं को कड़े अनुशासन का पालन करने की हिदायत दी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पार्टी के किसी भी सदस्य को धरने, विरोध प्रदर्शन या किसी भी प्रकार के हिंसक आंदोलन का हिस्सा नहीं बनना है। इसके बजाय, कार्यकर्ताओं को अपना पूरा ध्यान चुनावी जमीन मजबूत करने पर केंद्रित करना चाहिए। मायावती ने तर्क दिया कि जेन-जेड, जेन-अल्फा और व्यापक समाज के दुखों और परेशानियों का एकमात्र स्थायी समाधान बसपा की सरकार बनने पर ही निकल सकता है।
इस दौरान मायावती ने हालिया जेन-जेड जंतर-मंतर आंदोलन का भी प्रमुखता से जिक्र किया। उन्होंने संजय आजाद से जुड़ी एक गंभीर घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अगर पुलिस ने समय रहते उचित कदम उठाए होते, तो इस घटना को आसानी से टाला जा सकता था। बसपा अध्यक्ष ने इस मामले में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर इस मामले से सख्ती से नहीं निपटा गया, तो बसपा चुप बैठने वालों में से नहीं है।
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