लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर समाजवादी पार्टी ने अभी से अपनी कमर कस ली है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने 'जेन जेड' (युवा पीढ़ी) और 'आधी आबादी' यानी महिलाओं को ध्यान में रखते हुए बड़े चुनावी वादे किए हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि 2027 में सपा की सरकार बनने पर महिलाओं को हर साल 40,000 रुपये दिए जाएंगे। इसके साथ ही, भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा बंद किए गए 26,000 प्राथमिक विद्यालयों को सत्ता में आते ही फिर से खोल दिया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं को भी बड़ी सौगात देने का वादा किया है। इसके तहत विद्यार्थियों को रोडवेज, सिटी बसों और मेट्रो ट्रेनों में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। वहीं, इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने वाली छात्राओं को मुफ्त लैपटॉप दिए जाएंगे। अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं और युवाओं से जुड़े ये सभी मुद्दे समाजवादी पार्टी के आगामी चुनाव घोषणापत्र का प्रमुख हिस्सा होंगे।
सपा प्रमुख ने महिलाओं को पूरी आजादी दिलाने का संकल्प जताते हुए कहा कि यह उनके विजन की महज एक शुरुआत है। आने वाले दिनों में इस सूची में और भी कई बड़े ऐलान जोड़े जाएंगे। अखिलेश यादव पार्टी की 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' पर आयोजित एक परिचर्चा में बोल रहे थे। इसी योजना के तहत महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये देने की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसमें हर साल बढ़ोतरी भी की जाएगी।
इस नई पहल को अखिलेश यादव के 2012 से 2017 के कार्यकाल के दौरान शुरू की गई 'समाजवादी पेंशन योजना' के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार भी सपा के समय शुरू किए गए शानदार प्रोजेक्ट्स का लोहा मानती है। उन्होंने बताया कि हाल ही में लखनऊ दौरे पर आए जापानी प्रतिनिधिमंडल को राज्य सरकार ने '1090 मुख्यालय' का दौरा कराया था। यह प्रोजेक्ट सपा सरकार ने ही संकट में फंसी महिलाओं की मदद के लिए शुरू किया था।
अखिलेश ने 1090 को महिला सुरक्षा के लिए किए गए कामों का एक बेहतरीन उदाहरण बताया। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज उन राज्यों की सूची में सबसे ऊपर है, जहां बेटियों और बहनों के साथ सबसे ज्यादा अन्याय हो रहा है। उन्होंने महिलाओं को भरोसा दिलाया कि 2027 में सपा की सरकार बनने पर उनसे जुड़े किसी भी मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
संसद में पास हुए महिला आरक्षण बिल को लागू करने की मांग करते हुए सपा प्रमुख ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा आजकल 'नारी वंदन' की खूब बातें कर रही है। अखिलेश ने जनता से अपील की कि जब भी सत्ता पक्ष के लोग नारी वंदन की बात करें, तो उन्हें हाथरस की बेटी की याद जरूर दिलाएं। उन्हें याद दिलाएं कि कैसे एक मां और बेटी को जिंदा जला दिया गया था और कैसे एक बेटी अपने जलते हुए घर से अपनी किताबें बचाने की जद्दोजहद कर रही थी।
लखनऊ में हुए अग्निकांड का जिक्र करते हुए अखिलेश ने कहा कि लोग अभी तक नहीं भूले हैं कि मुख्यमंत्री ने अपना जवान बेटा खोने वाली एक दुखी मां से क्या कहा था। मुख्यमंत्री का वह बयान कि 'वह भाषण सुनने के मूड में नहीं हैं', आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। उन्होंने कहा कि खुशी दुबे को जिस तरह से जेल भेजकर अपमानित किया गया, उस घटना को भी जनता भूली नहीं है।
इसी कार्यक्रम में मैनपुरी की सांसद डिंपल यादव ने भी महिलाओं का हौसला बढ़ाया। उन्होंने 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' का अनावरण करते हुए महिलाओं को जुनून, दृढ़ता और अनुशासन के साथ अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने की सलाह दी। डिंपल ने कहा कि समाज द्वारा लगाई गई पाबंदियों को तोड़कर ही महिलाएं सफलता के शिखर तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिर्फ कोरी बातों से महिला सशक्तिकरण नहीं होगा, बल्कि इसके लिए जमीन पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
डिंपल यादव का यह बयान मीडिया के एक तीखे सवाल के जवाब में आया। हालांकि, इसे रक्षाबंधन के एक पोस्टर में अपनी पोशाक को लेकर ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार हुईं अभिनेत्री कृति सैनन के समर्थन में आए राहुल गांधी की टिप्पणी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। नई योजना के बारे में डिंपल ने कहा कि यूपी की महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये मिलेंगे और यह राशि सालाना बढ़ती रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधी आबादी पीडीए (PDA) का एक अभिन्न अंग है और हर महिला तक सम्मान व समृद्धि पहुंचाना उनकी अहम प्रतिबद्धता है।
इस मौके पर सपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व एमएलसी डॉ. मधु गुप्ता ने कहा कि यह योजना केवल सामाजिक उत्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देगी। उन्होंने बताया कि इस योजना में 'स्त्री' शब्द का इस्तेमाल इसलिए किया गया है क्योंकि यह एक बच्ची से लेकर महिला तक के हर पड़ाव को समेटता है। वहीं 'सम्मान' शब्द महिलाओं के उस बुनियादी अधिकार को दर्शाता है, जिसकी गारंटी हमारा संविधान देता है।
कैराना की सांसद इकरा हसन ने महिला गरिमा को सामाजिक न्याय का अनिवार्य हिस्सा बताया, जिससे उनके खिलाफ होने वाले भेदभाव और हिंसा को रोका जा सके। उनका मानना है कि महिलाओं का सम्मान बढ़ने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, जिससे वे जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना कर पाती हैं।
मछलीशहर की सांसद प्रिया सरोज ने महिलाओं को स्वतंत्र बनाने के लिए उनकी शिक्षा और रोजगार पर जोर दिया। उन्होंने महिलाओं से मुखर, शक्तिशाली और सफल बनने की अपील की। इस परिचर्चा में कानपुर से सपा विधायक नसीम सोलंकी और लखनऊ से युवा पार्टी पदाधिकारी पूजा शुक्ला ने भी सभा को संबोधित किया और महिलाओं के अधिकारों पर अपनी बेबाक राय रखी।
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