
तमिलनाडु: शिवगंगा जिले के मानामदुरै में एक अनुसूचित जाति (SC) के युवक आकाश डेलिसन की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया है। सीबी-सीआईडी (CB-CID) द्वारा दायर की गई चार्जशीट से खुलासा हुआ है कि इस मामले में एक पुलिस इंस्पेक्टर समेत छह पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।
मृतक आकाश शिवगंगा जिले के मानामदुरै के पास स्थित कृष्णराजपुरम का निवासी था। उसे 5 मार्च 2026 को मानामदुरै में हुए एक विवाद के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। इस पुराने विवाद में दो लोगों पर धारदार हथियारों से हमला किया गया था।
गिरफ्तारी के बाद आकाश को गंभीर चोटों के साथ मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। उस वक्त स्थानीय पुलिस ने यह दावा किया था कि गिरफ्तारी से बचने के लिए भागते समय वह एक पुल से गिर गया था और उसी वजह से उसे यह चोटें आईं।
हालांकि, आकाश के परिजनों ने पुलिस की इस कहानी को सिरे से खारिज कर दिया। उनका सीधा आरोप था कि युवक की मौत पुलिस की बेरहमी से की गई पिटाई के कारण हुई है। इस घटना के विरोध में परिजनों ने लगातार कई प्रदर्शन किए। बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस के झूठ की पोल खोल दी, क्योंकि मृतक के शरीर पर 28 अलग-अलग जगहों पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस इंस्पेक्टर दिलीपन और पांच अन्य पुलिसकर्मियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद सीबी-सीआईडी ने इस घटना की जांच शुरू की और आरोपियों के खिलाफ हत्या तथा एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मामला दर्ज किया।
लंबे समय तक चली जांच के बाद, सीबी-सीआईडी ने 18 जून को मदुरै की अदालत में अपनी चार्जशीट दाखिल की। इसी चार्जशीट की एक प्रति हाल ही में आकाश डेलिसन के परिवार को सौंपी गई है, जिसमें पुलिस की बर्बरता का पूरा काला चिट्ठा मौजूद है।
चार्जशीट के दस्तावेजों में बताया गया है कि पुलिसकर्मी आकाश को मानामदुरै के पास नीलगिरी (यूकेलिप्टस) के एक बाग में ले गए थे। वहां उसे लोहे की रॉड से बुरी तरह पीटा गया, जिसके कारण उसके दाहिने पैर में घुटने के नीचे और टखने के ऊपर का हिस्सा फ्रैक्चर हो गया। इस अमानवीय हमले के परिणामस्वरूप उसकी रक्त वाहिकाओं में फैट एम्बोलिज्म (वसा के थक्के जमना) हो गया, जो अंततः उसकी मौत का कारण बना।
दस्तावेजों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पुलिस ने सबूत मिटाने के लिए उस लोहे की रॉड को छिपा दिया था जिससे आकाश पर हमला किया गया था। खुद को कानून से बचाने के लिए उन्होंने आधिकारिक रिकॉर्ड में यह झूठी बात दर्ज की कि पुलिस की गिरफ्त से भागने की कोशिश में वह गिरकर घायल हुआ था।
इस क्रूर हत्या के मामले में जिन छह पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया है, उनके नाम इंस्पेक्टर दिलीपन, सब-इंस्पेक्टर गुहन और कांस्टेबल कलीस्वरन, महेंद्रन, देवेन्द्रन और पलानीअप्पन हैं।
जांच रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि इन छह पुलिसकर्मियों ने पूरी सोची-समझी साजिश के तहत इस वारदात को अंजाम दिया। वे सभी पीड़ित की जाति से पूरी तरह वाकिफ थे और उन्होंने जानबूझकर इस क्रूरता की हद को पार किया।
दूसरी तरफ, आकाश के परिवार ने कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी कुछ चिंताएं जाहिर की हैं। उनका आरोप है कि चार्जशीट दाखिल होने के पूरे 68 दिन बाद उन्हें इसकी कॉपी उपलब्ध कराई गई। परिजनों का यह भी कहना है कि उन्हें दी गई प्रति केवल 12 पन्नों की है और जांच के दौरान दर्ज किए गए सभी अहम दस्तावेज उन्हें पूरी तरह से नहीं सौंपे गए हैं।
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