उत्तर प्रदेश: लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। शुक्रवार को महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा यह बिल दो-तिहाई बहुमत की कमी के कारण संसद में पास नहीं हो सका था। नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में यह पहली बार है जब कोई बिल संसद में इस तरह गिरा है।
रविवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हार का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ते हुए उसे महिला आरक्षण की राह में 'रोड़ा' बताया था। सीएम योगी के इन बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी सैद्धांतिक रूप से महिला आरक्षण के समर्थन में है।
उन्होंने कहा कि उनका विरोध केवल बिना जातीय जनगणना के जल्दबाजी में कराए जा रहे परिसीमन को लेकर है। अखिलेश ने यह भी दावा किया कि लोकसभा में बिल पास न करा पाने के बाद केंद्र की मोदी सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने भाजपा पर 'नारी' को महज एक 'नारा' बनाने का आरोप लगाया। सपा प्रमुख ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी 'सीएमएफ फॉर्मूले' (क्रिएट मिस्ट्रस्ट और फियर - अविश्वास या डर पैदा करना) के जरिए विभाजनकारी राजनीति कर रही है।
उन्होंने इस विधेयक को 'काला पत्र' करार देते हुए कहा कि संसद में मिली हार यह दर्शाती है कि मौजूदा सरकार जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही है, बल्कि विपक्ष अब जनता की सच्ची आवाज है।
अखिलेश यादव ने चिंता जताई कि यह संकीर्ण सोच वाला बिल ग्राम पंचायतों के 'प्रधान पतियों' की तर्ज पर 'सांसद पतियों' को जन्म देगा, जो महिलाओं की आड़ में सत्ता का इस्तेमाल करेंगे। अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ का एक पुराना कथित वीडियो क्लिप भी चलाया, जिसमें वह गोरखपुर के सांसद रहते हुए ऐसे ही एक महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं कर रहे थे।
इससे पहले सीएम योगी ने विपक्ष पर आरोप लगाया था कि वे संविधान के सिद्धांतों का अपनी सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करते हैं और बीआर अंबेडकर के दृष्टिकोण के खिलाफ काम कर रहे हैं।
योगी के आरोपों का जवाब देते हुए अखिलेश ने कहा कि भाजपा दरअसल 'पीडीए समाज' (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) को धोखा देना चाहती है। उन्होंने मांग की कि महिलाओं का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए इस बड़े फैसले से पहले जातीय जनगणना अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।
सपा प्रमुख ने दावा किया कि भाजपा की विचारधारा एक आधुनिक महिला की आकांक्षाओं से बिल्कुल मेल नहीं खाती और कोई भी 'जागरूक महिला' इस सत्ताधारी पार्टी को कभी वोट नहीं देगी।
भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी तंग नजरिए वाली सोच महिलाओं को हमेशा कमजोर रखना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं को निर्णय लेने, सोचने-विचारने, घूमने-फिरने या अपने पसंद के कपड़े पहनने की स्वतंत्रता नहीं देना चाहती।
अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि इसका सटीक उदाहरण तब देखने को मिलता है जब लाठी-डंडे लेकर कुछ समूह स्कूलों, कॉलेजों, पार्कों, रेस्तरां और यहां तक कि घरों में भी अपनी मान्यताएं थोपने पहुंच जाते हैं, लेकिन जैसे ही उनका कड़ा विरोध होता है, वे गायब हो जाते हैं।
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