'26 हजार से ज्यादा स्कूल बंद, 28 लाख छात्रों का भविष्य अंधकार में...'- यूपी सरकार पर अखिलेश यादव का बड़ा आरोप

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने यूपी सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने, 26 हजार से अधिक स्कूल बंद करने और किसानों की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है।
अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री, यूपी
अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री, यूपी
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उत्तर प्रदेश: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार पर छात्रों और किसानों का भविष्य बर्बाद करने का गंभीर आरोप लगाया। अखिलेश के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के दौरान राज्य में 26,386 स्कूलों पर ताला लटक चुका है। इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ा है और सरकारी स्कूलों में नामांकन में 28 लाख छात्रों की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिनमें 16 लाख सिर्फ छात्राएं शामिल हैं।

रविवार सुबह पार्टी मुख्यालय में सपा विधायक दल की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी के विधायक विधानसभा में स्कूलों के बंद होने और छात्रों के ड्रॉपआउट का मुद्दा जोर-शोर से उठाएंगे। इसके साथ ही रामपुर में मौलाना जौहर अली विश्वविद्यालय को गिराने की कथित साजिश, छात्रों पर दर्ज हुए पुलिस केस और बार-बार हो रहे पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों को भी सदन में उठाया जाएगा।

स्कूलों को बंद करने और उनका विलय किए जाने के फैसले पर निशाना साधते हुए सपा प्रमुख ने इसे एक सोची-समझी रणनीति करार दिया। उन्होंने दावा किया कि यह कदम गरीब परिवारों को शिक्षा से दूर रखने और सरकारी रोजगार के अवसर खत्म करने के उद्देश्य से उठाया गया है। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार ने कक्षा 1 से 8 तक के लिए स्वीकृत शिक्षकों के 1.40 लाख पद भी घटा दिए हैं।

जिलावार आंकड़े पेश करते हुए अखिलेश ने बताया कि सबसे ज्यादा प्राथमिक स्कूल लखीमपुर खीरी में बंद हुए या उनका विलय किया गया, जिनकी संख्या 758 है। इसके बाद सीतापुर में 650 और प्रयागराज में 638 स्कूलों पर सीधा असर पड़ा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि खुद मुख्यमंत्री के क्षेत्र में करीब 500 स्कूल बंद कर दिए गए हैं।

सपा अध्यक्ष ने याद दिलाया कि साल 2017 में जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब राज्य में 1,13,938 प्राथमिक विद्यालय हुआ करते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में यह संख्या लगातार घटी है, जो यह दर्शाता है कि सरकार जानबूझकर गरीबों को बुनियादी शिक्षा से वंचित रखना चाहती है।

किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए अखिलेश ने महंगे बीज, खाद, सिंचाई के लिए बिजली की कमी और पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं और उन्हें सरकार की विफलताओं का बोझ उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

उन्होंने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से दोपहिया और चौपहिया वाहनों को हो रहे कथित नुकसान का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि अगर इथेनॉल मिलाने से वाहनों की क्षमता वाकई बढ़ती है, तो ऑटोमोबाइल कंपनियों को विज्ञापनों और अपने उत्पाद कैटलॉग में यह बात स्पष्ट रूप से बतानी चाहिए।

अयोध्या के राम मंदिर में दान चोरी की खबरों का जिक्र करते हुए अखिलेश ने कहा कि इस घटना ने आम जनता को काफी हैरान कर दिया है। वहीं, मौलाना जौहर अली विश्वविद्यालय के मामले में उन्होंने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि पिछले 10 सालों में इस सरकार ने एक भी नया सरकारी विश्वविद्यालय नहीं बनाया है, लेकिन वे रामपुर के इस प्रतिष्ठित संस्थान को ध्वस्त करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

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