नई दिल्ली: निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के आवास पर रविवार, 2 अगस्त को दो अज्ञात लोग घुस आए। जब सांसद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे, तभी उनमें से एक ने उन पर चप्पल फेंक दी। इस गंभीर घटना ने राजधानी में एक जनप्रतिनिधि की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक तरफ जहां सांसद के समर्थकों ने हमलावर के पास से एक चाकू होने का दावा किया है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी नेताओं ने एक सांसद की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह से विफल रहने पर दिल्ली पुलिस को आड़े हाथों लिया है। इस बीच, श्री यादव ने 31 जुलाई को संसद परिसर में राम मंदिर चंदा चोरी को लेकर किए गए एक नाटक (स्किट) के कारण खुद पर लगे आरोपों का कड़ा जवाब दिया।
चंदे के मामले का जिक्र करते हुए पप्पू यादव ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल गायब हुए सोने और चांदी को लेकर सवाल पूछे थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है और ऐसा नहीं है कि वह एक सनातनी नहीं हैं। यादव ने जोर देकर कहा कि आम आदमी की आस्था को जिस तरह से ठेस पहुंचाई गई है, उसके लिए वे आज प्रधानमंत्री से जवाब मांग रहे हैं।
यह पूरी घटना शाम करीब 6.15 बजे घटी। पत्रकारों की भीड़ के बीच खड़े एक घुसपैठिए ने अचानक सांसद पर अपना जूता फेंक दिया, जिसे बाद में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर निवासी सुमित के रूप में पहचाना गया। घटना के तुरंत बाद यादव के समर्थकों ने उसे पकड़ कर काबू में कर लिया और बाद में पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
इसके बाद मीडिया से बात करते हुए श्री यादव ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि उन्हें जान से मारने की लगातार साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि कई बाबाओं ने उन्हें 'जिंदा जलाने या मारने' की बात कही है। सांसद ने दावा किया कि अगर वहां इतने लोग मौजूद नहीं होते, तो आज उनकी हत्या हो गई होती। उन्होंने यह भी बताया कि ठीक एक रात पहले ही उनके परिवार को भी परेशान किया गया था।
वाराणसी पुलिस द्वारा उनके, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी (एफआईआर) पर भी यादव ने अपनी बेबाक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी कभी एफआईआर से नहीं डरे, तो पप्पू यादव कैसे डर सकते हैं। उन्होंने ऐलान किया कि सनातन और भारत के लोगों की आस्था से विश्वासघात करने वालों के खिलाफ अगर उन्हें रोज मौत का सामना भी करना पड़े, तो वे इसके लिए सहर्ष तैयार हैं।
पप्पू यादव के वकील कनिष्क अरोड़ा ने इसे पुलिस की बहुत बड़ी नाकामी करार दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस को एक दिन पहले ही असामाजिक तत्वों द्वारा ऐसी किसी हरकत की आशंका के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित कर दिया गया था। अरोड़ा ने निराशा जताते हुए कहा कि सूचना देने के बावजूद केवल दो या तीन पुलिसकर्मी ही तैनात किए गए। उन्होंने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए जल्द ही कानूनी कार्रवाई शुरू करने की बात कही है।
इस घटना पर विपक्षी नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग करने वाले छात्रों को दबाने में दिल्ली पुलिस बहुत कुशल दिखती है। लेकिन जब एक मुखर विपक्षी नेता और मौजूदा सांसद को उनके ही आवास पर सुरक्षा देने की बात आती है, तो यह अचानक विफल साबित होती है।
खेड़ा ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार पर भी सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब से अनुराग कुमार ने कार्यभार संभाला है, तब से पुलिस बल का रिकॉर्ड लगातार बद से बदतर होता जा रहा है।
सीपीआई (एम) सांसद वी. शिवदासन ने भी इस हमले की निंदा की। उन्होंने कहा कि जो लोग मंदिर के धन या श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे की कथित लूट पर सवाल उठाते हैं, उन्हें आरएसएस और भाजपा के लोगों के हमलों का सामना करना पड़ रहा है। शिवदासन ने मोदी सरकार द्वारा बनाए गए ट्रस्ट के सदस्यों पर भारी रकम लूटने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार विपक्ष के खिलाफ अपनी केंद्रीय प्रवर्तन एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है और अब 'गुंडे' भी उनके लिए काम कर रहे हैं।
शिवसेना नेता शाइना एनसी ने घटना की निंदा तो की, लेकिन साथ ही श्री यादव से 'भड़काऊ' बयान देने से बचने का आग्रह भी किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आक्रामक राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है, लेकिन अगर आप सनातन धर्म पर हमला करते हैं और धार्मिक मान्यताओं की निंदा करते हैं, तो प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है। शाइना ने जोर देकर कहा कि किसी को भी हिंसा का प्रचार नहीं करना चाहिए, लेकिन पप्पू यादव को यह भी सोचना चाहिए कि वे ऐसे बयान क्यों देते हैं जो इस तरह की प्रतिक्रियाओं को आकर्षित करते हैं।
राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने भी इस घटना को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में ऐसी हरकतों के लिए कोई जगह नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पप्पू यादव का अपना आचरण भी आपत्तिजनक रहा है, लेकिन इसके बावजूद, जिसने भी चप्पल फेंकी, वह कृत्य पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
दूसरी ओर, हमलावर सुमित के दोस्त हैप्पी शर्मा ने मीडिया को बताया कि वे दोनों बुलंदशहर से सांसद के आवास पर उन साधुओं का समर्थन करने आए थे, जो 'अपनी धार्मिक भावनाओं को आहत करने' के लिए यादव का कड़ा विरोध कर रहे हैं। शर्मा ने कहा कि उन्होंने केवल सांसद से साधु-संतों, भगवा कपड़ों और भगवान राम का अपमान करने का कारण पूछा था। उसने दावा किया कि जब उनके साथ मारपीट की गई, तभी बचाव में चप्पल फेंकी गई। हैप्पी ने चेतावनी दी कि अगर देश के साधु-संतों और भगवान राम का अपमान हुआ, तो वे अंजाम की परवाह किए बिना फिर से ऐसा करेंगे।
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