लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को एक बड़ा और गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) अभियान की आड़ में एक बड़ी साजिश रची जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री का आरोप है कि चुनाव आयोग (Election Commission) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलीभगत करके राज्य के करीब 1 करोड़ मुस्लिम और पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश कर रहा है।
सपा प्रमुख ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस नाइंसाफी के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
'लोकतंत्र के सबसे बड़े अधिकार पर डाका'
लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, "लोकतंत्र में वोट डालना एक नागरिक का सबसे बड़ा अधिकार है और इसके साथ किसी भी तरह की धोखाधड़ी नहीं होनी चाहिए।"
उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा कि भाजपा और चुनाव आयोग ने मिलकर 'फॉर्म-7' (जो मौजूदा सूची से नाम हटाने के लिए भरा जाता है) के जरिए पीडीए समाज के वोटरों को बाहर करने का पूरा खाका तैयार कर लिया है।
पश्चिम बंगाल जैसी स्थिति और अधिकारी पर दबाव
सपा अध्यक्ष ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि वे भी अपने राज्य में ठीक इसी तरह की स्थिति का सामना कर रही हैं। उन्होंने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा, "हमें जानकारी मिल रही है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात एक आईएएस अधिकारी लगातार मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं कि वे मतदाता सूची से पीडीए वर्ग के लोगों के नाम हटा दें।"
हालांकि, अखिलेश ने कहा कि वे उस अधिकारी के नाम का खुलासा वक्त आने पर करेंगे।
कन्नौज में एक ही बूथ से 1,200 वोट गायब?
अखिलेश यादव का कहना है कि भाजपा उन विधानसभा क्षेत्रों को विशेष रूप से निशाना बना रही है, जहां उसे 2022 के विधानसभा चुनावों में हार का मुंह देखना पड़ा था। अपने संसदीय क्षेत्र कन्नौज का उदाहरण देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वहां के सिर्फ एक मतदान केंद्र से मुस्लिम समुदाय के करीब 1,200 वोट काट दिए गए हैं।
उन्होंने मांग की है कि विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान अब तक भरे गए सभी 'फॉर्म-7' को तत्काल खारिज किया जाए। साथ ही, जो फॉर्म जमा हो चुके हैं, उन पर किए गए हस्ताक्षरों की न्यायिक जांच होनी चाहिए।
'नागरिकता का प्रमाण है वोटर लिस्ट में नाम'
स्थिति को "करो या मरो" वाला बताते हुए, पूर्व सीएम ने मतदाताओं को आगाह किया कि मतदाता सूची में उनका नाम होना ही उनकी नागरिकता का सबसे बड़ा सबूत है। उन्होंने कहा, "पूरे प्रदेश में जिन बूथों पर भाजपा कमजोर है, वहां से चुन-चुन कर मुस्लिम और पीडीए वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं। ममता बनर्जी जी बंगाल में जिस लड़ाई को लड़ रही हैं, हम भी वही लड़ाई लड़ेंगे। हम हर जरूरी कदम उठाएंगे और कोर्ट भी जाएंगे।"
भाजपा का पलटवार: 'आयोग से करें शिकायत'
अखिलेश यादव के इन तीखे आरोपों पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा, "जब खबरें आई थीं कि करीब 2.88 करोड़ नाम ड्राफ्ट रोल से हटाए गए हैं, तब तो अखिलेश यादव खुशी जता रहे थे। उस वक्त उनका कहना था कि हर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के लगभग 75,000 वोट कटे हैं।"
चौधरी ने साफ किया कि यह प्रक्रिया भाजपा नहीं, बल्कि चुनाव आयोग द्वारा संचालित है। अगर अखिलेश को कोई आपत्ति है, तो उन्हें आयोग के पास शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
क्या कह रहा है चुनाव आयोग?
इस पूरे विवाद पर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने भी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा, "हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला था कि फॉर्म-7, जिस पर हस्ताक्षर होते हैं, वास्तव में उस व्यक्ति द्वारा जमा नहीं किए गए जिसका नाम उस पर है। इसी को देखते हुए सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। अब जब भी कोई फॉर्म-7 प्राप्त होगा, तो अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसे उसी व्यक्ति ने जमा किया है, जिसका उस पर हस्ताक्षर है।"
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.