UP Election: दलित बाहुल्य क्षेत्रों पर बसपा की नजर, 28 अक्टूबर से चुनावी रण में उतरेंगे आकाश आनंद

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बहुजन समाज पार्टी ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद 28 अक्टूबर से पश्चिमी यूपी की दलित बाहुल्य सीटों से अपने मेगा चुनाव प्रचार अभियान का शंखनाद करेंगे।
आकाश आनंद, BSP, राष्ट्रीय कॉर्डिनेटर
आकाश आनंद, BSP, राष्ट्रीय कॉर्डिनेटरPic- Internet
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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी ने साल 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपनी सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पार्टी सुप्रीमो मायावती के भतीजे और बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद जल्द ही एक बार फिर जनता के बीच होंगे। इस बार उनका पूरा ध्यान उन जिलों की विधानसभा सीटों पर है, जहां अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या निर्णायक भूमिका में है।

आकाश आनंद 28 अक्टूबर से बुलंदशहर जिले से अपने चुनाव प्रचार अभियान की दोबारा शुरुआत करने जा रहे हैं। बुलंदशहर के बाद उनकी रैलियों और जनसभाओं का यह सिलसिला आगरा, सहारनपुर, कानपुर नगर और अयोध्या जैसे अहम जिलों तक पहुंचेगा। आपको बता दें कि अगस्त महीने में शुरू हुए अपने प्रचार के पहले चरण में भी उन्होंने पश्चिमी यूपी की अहम सीटों पर फोकस किया था। उस दौरान उन्होंने हाथरस जिले की सादाबाद और गौतमबुद्ध नगर की जेवर जैसी विधानसभा सीटों का सघन दौरा किया था।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी हमेशा से बेहद मजबूत स्थिति में रही है। इस इलाके में दलित वोटरों की बड़ी आबादी पार्टी की इस मजबूती का मुख्य कारण मानी जाती है। पश्चिमी यूपी के कई विधानसभा क्षेत्रों में जाटव, खटीक और वाल्मीकि मतदाता अच्छी-खासी संख्या में मौजूद हैं, जो किसी भी चुनाव का रुख अपनी तरफ मोड़ने का माद्दा रखते हैं।

वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, बुलंदशहर जिले की कुल आबादी में अनुसूचित जाति के समुदायों की हिस्सेदारी लगभग 19.8 प्रतिशत है। इन समुदायों में भी सबसे बड़ी संख्या जाटव समाज की है, और दिलचस्प बात यह है कि बसपा प्रमुख मायावती भी इसी वर्ग से ताल्लुक रखती हैं।

आकाश आनंद के प्रचार अभियान के अहम पड़ावों में से एक आगरा भी है। आगरा जिले में कुल नौ विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें से आगरा कैंट और आगरा ग्रामीण की दो सीटें अनुसूचित जाति के प्रत्याशियों के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा जिले की एत्मादपुर, फतेहाबाद, आगरा नॉर्थ और आगरा साउथ जैसी अन्य सीटों पर भी दलित मतदाताओं का खासा प्रभाव देखने को मिलता है।

सहारनपुर जिले का सियासी समीकरण भी बसपा के काफी अनुकूल माना जाता है, जहां 22 प्रतिशत से अधिक दलित मतदाता हैं। इसी कोर वोट बैंक के बलबूते बसपा ने साल 2019 के लोकसभा चुनाव में सहारनपुर सीट पर शानदार जीत दर्ज की थी। यह राजनीतिक जगत का एक स्थापित तथ्य है कि दलित मतदाता हमेशा से बसपा का मुख्य आधार रहे हैं, और इनमें भी जाटव समुदाय के लोग पार्टी के सबसे निष्ठावान व प्रतिबद्ध समर्थक माने जाते हैं।

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