
उत्तर प्रदेश: बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद बुधवार को एक बिल्कुल नए और शांत अंदाज में नजर आए। बुलंदशहर की अनूपशहर विधानसभा सीट पर आयोजित एक बड़ी जनसभा में उन्होंने अपनी राजनीतिक परिपक्वता का स्पष्ट परिचय दिया।
उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली और नीतियों के साथ-साथ कांग्रेस व समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखे प्रहार जरूर किए, लेकिन इस बार उनके भाषण में गजब का संयम और शालीनता झलक रही थी। पांच अक्टूबर को पार्टी में वापसी और राष्ट्रीय संयोजक के पद पर दोबारा बहाली के बाद यह उनकी पहली जनसभा थी।
गौरतलब है कि बीएसपी सुप्रीमो और उनकी बुआ मायावती ने उन्हें 'अपरिपक्वता' के कारण तीन बार पार्टी से निष्कासित किया था। हालांकि, हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मायावती ने उनके संयम और समझदारी की सार्वजनिक तौर पर तारीफ भी की थी।
अपनी बुआ की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए आकाश ने बुधवार को राजनीतिक विरोधियों पर किसी भी तरह के व्यक्तिगत हमले से खुद को पूरी तरह दूर रखा। जब उन्होंने समाजवादी पार्टी के मुखिया और उनके पीडीए (PDA) मॉडल का जिक्र किया, तो भीड़ ने 'अखिलेश अंकल' कहकर हूटिंग शुरू कर दी।
इस पर आकाश की प्रतिक्रिया बेहद शांत थी। उन्होंने शालीनता से कहा कि अखिलेश उनसे उम्र में बड़े हैं और वह सम्मान के साथ अपनी बात रखेंगे। उन्होंने जनता से यह भी कहा कि यह मजाक या छींटाकशी का समय नहीं है, ऐसी बातें बाद में भी की जा सकती हैं।
आकाश का यह नया रवैया 10 अगस्त को सादाबाद में हुई जनसभा से बिल्कुल अलग था। उस वक्त उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव को 'अंकल' कहकर संबोधित किया था। तब उनके शब्द थे कि अगर 30 साल का युवा 50 साल के व्यक्ति को अंकल नहीं कहेगा तो क्या कहेगा, और उनके लिए वह अखिलेश भैया नहीं बल्कि अखिलेश अंकल हैं।
सादाबाद की उसी रैली में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी सीधा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि राज्य में अपराध चरम पर है और हत्याओं के मामले में यूपी देश में शीर्ष पर है, इसके बावजूद मुख्यमंत्री खुद को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बताते हैं। उनके ये बयान इंटरनेट पर काफी वायरल हुए थे।
लेकिन इस बार उनके भाषण से यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ या नितिन गडकरी जैसे वरिष्ठ भाजपा नेताओं का जिक्र पूरी तरह गायब था, जिन पर वह पहले तीखे जुबानी तीर छोड़ चुके हैं। उनके सुर में आया यह बदलाव यूपी में चुनाव प्रचार दोबारा शुरू करने से पहले मायावती द्वारा दी गई नसीहत का सीधा नतीजा माना जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी संभालने में 'अपरिपक्वता' दिखाने के कारण मायावती ने 10 सितंबर को उन्हें पार्टी से हटा दिया था। दरअसल, सादाबाद रैली में विपक्ष पर उनके व्यक्तिगत हमलों के वायरल होने के बाद, 25 अगस्त को जेवर में हुई उनकी दूसरी जनसभा को पार्टी ने ज्यादा तवज्जो नहीं दी थी।
मायावती का आकाश के प्रति यह सख्त रुख 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान सीतापुर में दिए गए भाषण के समय जैसा ही था। सीतापुर में 28 अप्रैल को दिए गए भाषण के कारण आकाश आनंद पर एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसके कुछ ही दिनों बाद मायावती ने राजनीतिक अपरिपक्वता का हवाला देते हुए उन्हें पद से बर्खास्त कर दिया था।
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