MP: जमीन और पानी को जहरीला नहीं होने देंगे! रीवा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध तेज, भोपाल में कांग्रेस का धरना!

भोपाल के व्यापमं चौराहे पर कांग्रेस ने साथ दिया धरना, बोले- रीवा में रोजगार के दूसरे साधन विकसित करे सरकार; विमला कोल की मौत पर प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार
MP: जमीन और पानी को जहरीला नहीं होने देंगे! रीवा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध तेज, भोपाल में कांग्रेस का धरना!
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भोपाल। मध्यप्रदेश के रीवा जिले के गुढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में रविवार को भोपाल के व्यापमं चौराहे पर कांग्रेस नेता दिलीप तिवारी अपने साथियों के साथ धरने पर बैठे। उन्होंने परमाणु प्लांट से पर्यावरण, जल और जमीन को संभावित नुकसान होने की आशंका जताई। तिवारी ने कहा कि क्षेत्र के लोगों की जमीन, पानी और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बचाने के लिए आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे अपनी जान देने को तैयार हैं, लेकिन अपनी जमीन और पानी को जहरीला नहीं होने देंगे।

दिलीप तिवारी ने कहा कि रीवा में प्रस्तावित परमाणु प्लांट के विरोध में पिछले 24 दिनों से आंदोलन चल रहा है। विंध्य क्षेत्र के लोग इस आंदोलन के समर्थन में भोपाल में भी धरना दे रहे हैं। रीवा में पिछले छह दिनों से जल सत्याग्रह जारी है। उन्होंने बताया कि वे खुद भी दो दिन तक जल सत्याग्रह में शामिल रहे हैं।

परमाणु प्लांट से पर्यावरण और स्वास्थ्य पर खतरे की आशंका

दिलीप तिवारी ने कहा कि परमाणु प्लांट स्थापित होने से क्षेत्र के पर्यावरण, जल स्रोतों और जमीन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। इसका असर स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने में सफल नहीं हो पा रही है, तो भविष्य में किसी बड़ी औद्योगिक या पर्यावरणीय आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी?

उन्होंने सरकार से मांग की कि परमाणु प्लांट लगाने के बजाय क्षेत्र में रोजगार के वैकल्पिक साधन विकसित किए जाएं। उनका कहना था कि विंध्य क्षेत्र में विकास और रोजगार की पर्याप्त संभावनाएं हैं। सरकार को ऐसे विकल्पों पर काम करना चाहिए, जिनसे स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और उनके प्राकृतिक संसाधनों को भी नुकसान न पहुंचे।

गुढ़ के सोलर प्लांट का उदाहरण देकर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने गुढ़ में स्थापित सोलर प्लांट का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की बात कही गई थी, लेकिन उनके मुताबिक क्षेत्र के युवाओं को अपेक्षित रोजगार नहीं मिला। आज भी रोजगार की तलाश में लोगों को प्रदेश के दूसरे जिलों और शहरों की ओर पलायन करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में क्षेत्र का विकास करना चाहती है, तो स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करे। विंध्य में रोजगार के कई दूसरे विकल्प तलाशे जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए लोगों की जमीन, पानी और पर्यावरण को खतरे में डालना उचित नहीं है।

रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

दिलीप तिवारी ने रीवा जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाओं का अभाव है और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही की शिकायतें सामने आती रहती हैं।

उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कथित लापरवाही की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कई मामलों में मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पाता। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने के बजाय केवल भवनों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है।

तिवारी ने कहा कि जब सरकार मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त नहीं कर पा रही है, तो परमाणु प्लांट से जुड़ी किसी संभावित आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि पहले क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जाए और स्थानीय लोगों की चिंताओं का समाधान किया जाए।

विमला कोल की मौत पर प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग

जल सत्याग्रह के दौरान आदिवासी महिला विमला कोल की मौत को लेकर दिलीप तिवारी ने दुख जताया और उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बताया कि 17 अक्टूबर को सत्याग्रह शुरू होने के दिन वे मौके पर मौजूद थे और लगातार दो दिन तक आंदोलन में शामिल रहे।

तिवारी ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान अनहोनी की आशंका जताए जाने के बावजूद प्रशासन ने समय रहते गंभीरता नहीं दिखाई। उनके मुताबिक, महिला की मौत के बाद भी शासन-प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल बने हुए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की जवाबदेही तय करने के बजाय इसे दूसरे मुद्दों में उलझाने की कोशिश की जा रही है। तिवारी ने मांग की कि विमला कोल की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।

सीएम हाउस में धरने की चेतावनी

दिलीप तिवारी ने कहा कि आदिवासी समुदाय के लोग अपनी जमीन, जल, जंगल और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आंदोलन के दौरान आगे किसी की जान जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

उन्होंने कहा कि रीवा में जल सत्याग्रह के साथ आमरण अनशन भी जारी है। रविवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी आंदोलन में शामिल हुए और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर आंदोलनकारियों का समर्थन किया।

तिवारी ने चेतावनी दी कि यदि आंदोलन के दौरान किसी और की जान गई, तो वे मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर धरना देंगे। उन्होंने सरकार से मांग की कि आंदोलनकारियों की बात सुनी जाए, उनकी चिंताओं का समाधान किया जाए और क्षेत्र में रोजगार के वैकल्पिक अवसर विकसित करने पर ध्यान दिया जाए।

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