
मेरठ/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सरधना क्षेत्र में एक युवक की हत्या का मामला अब बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है। 5 जनवरी को हुई इस घटना में कश्यप समाज (OBC) के एक युवक की क्रूरता से हत्या का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस की थ्योरी और विपक्षी नेताओं के आरोपों में जमीन-आसमान का अंतर है, जिसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विपक्ष का आरोप: लूट के बाद जिंदा जलाया गया
नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने घटना को 'मानवता को शर्मसार करने वाला जघन्य अपराध' करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि सरधना के ग्राम ज्वालागढ़ में रानू कश्यप (रोहित उर्फ सोनू) को पहले शराब पिलाई गई, फिर उसके पास मौजूद 80,000 रुपये लूट लिए गए और अंत में उसे जिंदा जला दिया गया।
चंद्रशेखर ने सवाल उठाया कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी सभी आरोपियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? उन्होंने पीड़ित परिवार के लिए सरकारी सुरक्षा और उचित मुआवजे की मांग की है।
वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसे "अति क्रूर व शर्मनाक" घटना बताया। उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज के युवक को जलाकर मार देना कानून के इकबाल पर सवाल है। उन्होंने प्रशासन से ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए अनवरत सजगता बरतने की अपील की।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा कि "गोविन्द (कश्यप) समाज के युवक को गुंडों द्वारा जिंदा जला दिया गया। हम पूरे पीडीए (PDA) समाज की ओर से इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।"
पुलिस का दावा: तेज म्यूजिक को लेकर विवाद, ईंट से हुई हत्या
विपक्षी नेताओं द्वारा लगाए गए 'जिंदा जलाने' के आरोपों के विपरीत, मेरठ पुलिस की कहानी बिल्कुल अलग है। पुलिस जांच के मुताबिक, यह घटना पुरानी है (सोमवार, 5 जनवरी)। पुलिस का कहना है कि झगड़ा एक टेंपो में तेज आवाज में म्यूजिक बजाने को लेकर हुआ था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी एक नाबालिग (16 वर्षीय टेंपो चालक) है, जिसने बहस के बाद रोहित उर्फ सोनू (28) पर ईंट से हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर नाबालिग आरोपी को किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) के समक्ष पेश किया, जहां से उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया है।
सवालों के घेरे में खाकी
इस घटना ने यूपी की कानून-व्यवस्था को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है। जहाँ एक तरफ पुलिस इसे साधारण 'मारपीट और हत्या' का मामला बता रही है, वहीं विपक्ष इसे 'लूट और जघन्य हत्या (बर्निंग)' बता रहा है। अब सवाल उठ रहे हैं कि, क्या पुलिस मामले को हल्का करने की कोशिश कर रही है? या फिर विपक्ष को मिली जानकारी और पुलिस की जांच में इतना बड़ा विरोधाभास क्यों है?
फिलहाल, पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है और विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कश्यप समाज में इस घटना को लेकर भारी रोष व्याप्त है।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.