दो परीक्षाएं पास करने के बाद भी इंटरव्यू से बाहर हुए MP के 12 OBC अभ्यर्थी, CM मोहन यादव से लगाई गुहार

केवीएस-एनवीएस की संयुक्त शिक्षक भर्ती में जाति प्रमाणपत्र के रेफरेंस नंबर पर उठी आपत्ति; भुवनेश्वर में दस्तावेज सत्यापन के दौरान रोका, अभ्यर्थियों ने कमिश्नर को भेजा ज्ञापन
दो परीक्षाएं पास करने के बाद भी इंटरव्यू से बाहर हुए MP के 12 OBC अभ्यर्थी, CM मोहन यादव से लगाई गुहार
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भोपाल। मध्य प्रदेश के 12 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) अभ्यर्थियों को केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) और नवोदय विद्यालय समिति (NVS) की संयुक्त शिक्षक भर्ती में टियर-1 और टियर-2 की परीक्षाएं पास करने के बावजूद इंटरव्यू में शामिल होने से रोक दिया गया। मामला 29 अक्टूबर को ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन में दस्तावेज सत्यापन के दौरान सामने आया। अभ्यर्थियों के जाति प्रमाणपत्रों में मध्य प्रदेश में पहले जारी स्थायी जाति प्रमाणपत्र का रेफरेंस नंबर दर्ज होने पर चयन समिति ने आपत्ति जताई। इस कार्रवाई से अभ्यर्थियों और उनके परिजनों में नाराजगी है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हस्तक्षेप कर प्रभावित अभ्यर्थियों को दोबारा इंटरव्यू का अवसर दिलाने की मांग की है।

जाति प्रमाणपत्र में पुराने रेफरेंस नंबर पर आपत्ति

अभ्यर्थियों के अनुसार, उनके पास भारत सरकार के निर्धारित प्रारूप में सक्षम अधिकारी द्वारा जारी ओबीसी प्रमाणपत्र थे। हालांकि, इन प्रमाणपत्रों में मध्य प्रदेश में पहले जारी स्थायी जाति प्रमाणपत्र का रेफरेंस नंबर दर्ज था। दस्तावेज सत्यापन के दौरान चयन समिति ने इसी आधार पर प्रमाणपत्रों को अमान्य मानते हुए अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में शामिल होने की अनुमति नहीं दी।

अभ्यर्थियों का कहना है कि मध्य प्रदेश में स्थायी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की एक निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसी प्रमाणपत्र के आधार पर राजस्व विभाग केंद्र सरकार के निर्धारित प्रारूप में प्रमाणपत्र जारी करता है। ऐसे में पुराने प्रमाणपत्र का रेफरेंस नंबर दर्ज होना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, न कि अभ्यर्थियों की गलती।

उनका तर्क है कि जब प्रमाणपत्र सक्षम अधिकारी द्वारा निर्धारित प्रारूप में जारी किए गए हैं, तो केवल पुराने प्रमाणपत्र का संदर्भ दिए जाने के कारण उन्हें भर्ती प्रक्रिया से बाहर करना उचित नहीं है।

भर्ती अधिसूचना में रेफरेंस नंबर पर प्रतिबंध का दावा नहीं

यह मामला भर्ती विज्ञापन क्रमांक 01/2025 के तहत दस्तावेज सत्यापन से जुड़ा है। अभ्यर्थियों के मुताबिक, सत्यापन के दौरान अधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार के निर्धारित प्रारूप में जारी ओबीसी प्रमाणपत्र एक स्वतंत्र दस्तावेज होना चाहिए और उसमें पुराने राज्य स्तरीय प्रमाणपत्र का रेफरेंस नंबर दर्ज नहीं होना चाहिए।

इसके विपरीत, अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती अधिसूचना में प्रमाणपत्र के निर्धारित प्रारूप और उसके जारी होने की अवधि से संबंधित शर्तें थीं, लेकिन पुराने प्रमाणपत्र का रेफरेंस नंबर दर्ज होने पर रोक का उल्लेख नहीं था।

अभ्यर्थियों का सवाल है कि यदि भर्ती के नियमों में इस तरह की स्पष्ट शर्त नहीं थी, तो उन्हें दो लिखित परीक्षाओं में सफल होने के बाद इंटरव्यू से वंचित क्यों किया गया? उनका मानना है कि दस्तावेजों में तकनीकी आपत्ति होने पर उन्हें स्थिति स्पष्ट करने या आवश्यक स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया जाना चाहिए था।

एसडीएम से बात कराने पर भी नहीं बनी सहमति

शहडोल जिले के सोहागपुर की अभ्यर्थी मुस्कान साहू ने बताया कि उनका जाति प्रमाणपत्र केंद्र सरकार के निर्धारित प्रारूप में सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया है। प्रमाणपत्र में सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। पुराने राज्य स्तरीय प्रमाणपत्र का रेफरेंस नंबर प्रशासनिक व्यवस्था के तहत दर्ज किया गया है।

अभ्यर्थियों के मुताबिक, मामले में संबंधित अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की गई। एसडीएम से बात कराने का प्रयास भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें इंटरव्यू में शामिल होने की अनुमति नहीं मिली।

12 अभ्यर्थियों ने केवीएस-एनवीएस कमिश्नर को भेजा ज्ञापन

इंटरव्यू से रोके जाने के बाद मध्य प्रदेश के 12 अभ्यर्थियों ने केवीएस-एनवीएस कमिश्नर, नई दिल्ली के नाम संयुक्त ज्ञापन सौंपा है। इसमें पूरी चयन प्रक्रिया में दोबारा शामिल करने और इंटरव्यू का अवसर देने की मांग की गई है।

ज्ञापन पर मुस्कान साहू, शोभा यादव, सौरभ ठाकुर, निधि घोष, आदर्श धाकड़, नंदकिशोर गोलहानी, हेमेंद्र कुमार बैरागी, दीपू कुशवाहा, मुनेश नरवरिया, गोपाल परमार, राहुल पटेल और आकाश पटेल के हस्ताक्षर हैं।

अभ्यर्थियों ने मांग की है कि उनके प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच कराई जाए और केवल रेफरेंस नंबर से जुड़ी आपत्ति के आधार पर उन्हें भर्ती प्रक्रिया से बाहर न रखा जाए। साथ ही, संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर समस्या का समाधान निकाला जाए।

इंटरव्यू से वंचित होने पर छात्रा की तबीयत बिगड़ी

दो लिखित परीक्षाओं में सफलता हासिल करने के बाद इंटरव्यू के अंतिम चरण में बाहर किए जाने से अभ्यर्थियों को गहरा झटका लगा। परिजनों के मुताबिक, दस्तावेज सत्यापन केंद्र पर एक छात्रा की तबीयत बिगड़ गई और वह बार-बार बेहोश होने लगी।

अभिभावकों का कहना है कि अभ्यर्थियों ने भर्ती परीक्षा की तैयारी में काफी समय और मेहनत लगाई। टियर-1 और टियर-2 पास करने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि वे इंटरव्यू में अपनी योग्यता साबित करने का अवसर प्राप्त करेंगे। लेकिन दस्तावेजों से जुड़ी आपत्ति के कारण उन्हें अंतिम चरण में शामिल होने से रोक दिया गया।

परिजनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनकी मांग है कि मध्य प्रदेश सरकार संबंधित केंद्रीय भर्ती अधिकारियों से बातचीत कर मामले का समाधान निकाले, ताकि प्रभावित अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में शामिल होने का अवसर मिल सके।

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