MP: देवास में जहरीली शराब से मौतों का मामला! AI की मदद से नकली शराब बनाने का तरीका खोजने का आरोप

मुख्य आरोपी ने घर पर तैयार की नकली शराब, लाइसेंसी दुकानों की शराब की पेटियों में मिलाकर गांवों तक पहुंचाई; अब तक 10 आरोपी गिरफ्तार। चंदाना और बिंजाना में मौतों की जांच के लिए संभागीय समिति गठित, 15 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश।
MP: देवास में जहरीली शराब से मौतों का मामला! AI की मदद से नकली शराब बनाने का तरीका खोजने का आरोप
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भोपाल। मध्यप्रदेश के देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में पुलिस जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी अजय राठौर ने घर पर नकली शराब तैयार की थी। इसके बाद उसने नकली शराब की बोतलों को लाइसेंसी दुकानों से मिलने वाली शराब की पेटियों में मिलाकर गांवों और मोहल्लों में सप्लाई किया।

पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी ने 27-28 सितंबर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से शराब बनाने का तरीका खोजना शुरू किया था। इसके बाद इंदौर के दवा बाजार से केमिकल मंगवाया गया, जो 1-2 अक्टूबर को उसके पुआड़ा दाई स्थित घर पहुंचा था। पुलिस अब केमिकल की आपूर्ति, नकली शराब बनाने और उसे गांवों तक पहुंचाने में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

पुरानी बोतलों में केमिकल मिलाकर बनाई नकली शराब

पुलिस के मुताबिक, अजय राठौर ने कबाड़ियों से मिली पुरानी बोतलों में केमिकल और पानी मिलाकर नकली शराब तैयार की थी। इसके लिए बोतलों के ढक्कन भी मंगवाए गए थे। जांच में सामने आया है कि 2 से 6-7 अक्टूबर के बीच उसके घर पर नकली शराब बनाई गई।

इस काम में लोहार पिपलिया के गोविंद और गधेशिया पिपलिया के रामेश्वर की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस की शुरुआती पूछताछ के मुताबिक, 7 से 12 अक्टूबर के बीच नकली शराब बेची गई थी।

पुलिस यह भी पता लगा रही है कि नकली शराब चंदाना निवासी विनोद जायसवाल तक कैसे पहुंची और इसमें लाइसेंसी शराब दुकानों से जुड़े लोगों की क्या भूमिका रही।

लाइसेंसी शराब की पेटियों में मिलाकर की गई सप्लाई

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में जितेंद्र मालवीय और राहुल गिरी गोस्वामी के नाम भी सामने आए हैं। आरोप है कि लाइसेंसी दुकान से शराब विनोद जायसवाल तक पहुंचती थी, जिसे वह अपने घर से बेचता था। इसके अलावा अजय राठौर, रामेश्वर और गोविंद से भी कम कीमत पर शराब मंगाई जाती थी।

जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि नकली शराब की बोतलों को लाइसेंसी शराब की पेटियों में मिलाकर बेचा जाता था। इस तरीके से नकली शराब गांवों और मोहल्लों तक पहुंचाई गई।

पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि नकली शराब बनाने से लेकर उसकी बिक्री तक कौन-कौन लोग शामिल थे।

केमिकल सप्लाई करने वाला इंदौर का गोदाम सील

पुलिस ने केमिकल की आपूर्ति करने वाले इंदौर स्थित गोदाम को सील कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, इसी गोदाम से मुख्य आरोपी के घर केमिकल भेजा गया था। पुलिस अजय राठौर के घर और गोविंद के ठिकाने से भी सबूत जुटा रही है।

पुलिस के मुताबिक, मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। दो अन्य आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें रवाना की गई हैं। केमिकल और बोतलों के ढक्कन उपलब्ध कराने वालों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

27 सितंबर से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला

ग्रामीणों के अनुसार, इस मामले में मौतों का सिलसिला 27 सितंबर को किशोर परमार की मौत के साथ शुरू हुआ। इसके बाद अक्टूबर में भी कई लोगों की मौत की खबरें सामने आईं। मृतकों में 30 से 40 वर्ष की आयु के युवा भी शामिल बताए गए हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक, शराब पीने के बाद लोगों को पेट दर्द, चक्कर आना, घबराहट और उल्टी जैसी समस्याएं हुईं। कुछ लोगों की हालत तेजी से बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। वहीं, कुछ लोगों की आंखों की रोशनी प्रभावित होने की जानकारी भी सामने आई है।

हालांकि, इन मौतों की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

विसरा और शराब की बोतलें जांच के लिए भेजीं

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले में सिविल लाइन थाने में दो प्रकरण दर्ज किए गए हैं। मृतकों के विसरा, घरों से मिली शराब की खाली बोतलों और अन्य सामग्री को फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजा गया है।

पुलिस पहले से ही अवैध शराब रखने, बेचने और एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के मामले में कार्रवाई कर रही थी। घर में नकली शराब बनाने की जानकारी सामने आने के बाद आबकारी अधिनियम की धारा 49-ए भी जोड़ी गई है।

मौतों के मामले में हत्या या अन्य धाराएं जोड़ी जाएंगी या नहीं, इसका फैसला जांच पूरी होने और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर किया जाएगा।

चंदाना और बिंजाना पहुंची संभागीय जांच समिति

जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में उज्जैन संभागायुक्त की ओर से गठित विशेष जांच समिति ने भी जांच शुरू कर दी है। मंगलवार शाम समिति चंदाना और बिंजाना गांव पहुंची और पीड़ित परिवारों से पूछताछ की।

टीम ने ग्रामीणों से यह जानने की कोशिश की कि उन्होंने शराब कहां से खरीदी थी, शराब पीने के बाद उनकी तबीयत कब बिगड़ी और उन्हें इलाज के लिए किन अस्पतालों में ले जाया गया।

करीब दो घंटे तक चली जांच के दौरान समिति ने मृतकों के परिजनों के बयान दर्ज किए। इसके अलावा, शराब पीने के बाद आंखों की रोशनी प्रभावित होने की शिकायत करने वाले लोगों से भी जानकारी ली गई।

जांच के दौरान पुलिस, आबकारी और राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने ग्रामीणों और मृतकों के परिजनों को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया।

15 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी समिति

संभागायुक्त ने विशेष जांच समिति को 15 दिन के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। समिति को मौतों की वास्तविक वजह, घटना से जुड़े हालात और प्रशासनिक स्तर पर संभावित लापरवाही की जांच करनी है।

जांच समिति सबसे पहले चंदाना गांव पहुंची और इसके बाद देर रात बिंजाना में भी लोगों के बयान दर्ज किए। जांच में सामने आने वाले तथ्यों को वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

फिलहाल, पुलिस की जांच का मुख्य फोकस नकली शराब बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए केमिकल के स्रोत, शराब की सप्लाई चेन और बिक्री में शामिल लोगों की भूमिका पर है। वहीं, मौतों की वास्तविक वजह स्पष्ट होने के लिए फॉरेंसिक रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच के निष्कर्षों का इंतजार है।

शराब कांड में हुई कार्यवाही पर विधानसभा नेता प्रतिपक्ष  उमंग सिंघार ने सागर और देवास जिले के कलेक्टर एसपी को बदलने पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा- "

"बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-आते!"

सागर और देवास शराब कांड के बाद आखिरकार मुख्यमंत्री जी की नींद खुली। दोनों ही जिलों के SP और कलेक्टर का तबादला करने के लिए जनता की ओर से धन्यवाद।

मुख्यमंत्री जी, देर आए दुरुस्त आए.. लेकिन जहरीली शराब का यह पूरा काला कारोबार आपके मित्र आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना के संरक्षण में फल-फूल रहा है, उन पर कार्रवाई कब होगी?"

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