MP: बारिश में भी 48वें दिन जारी रहा चिता आंदोलन, कलेक्टर ने दिया जांच और कार्रवाई का आश्वासन

मझगवां और रुंझ परियोजना प्रभावितों ने उठाए बिना मुआवजे घर तोड़ने और गांवों के डूब में आने पर सवाल; अमित भटनागर ने पुराने सर्वे की समीक्षा कर जवाबदेही तय करने की मांग की
MP: बारिश में भी 48वें दिन जारी रहा चिता आंदोलन, कलेक्टर ने दिया जांच और कार्रवाई का आश्वासन
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भोपाल। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में मझगवां और रुंझ परियोजना प्रभावित ग्रामीणों का चिता आंदोलन गुरुवार को बारिश के बीच 48वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन स्थल पर पहुंचे नवागत कलेक्टर हर्ष सिंह सहित जिला प्रशासन के अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान जय किसान संगठन के नेता और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर के साथ अधिकारियों की चर्चा हुई। कलेक्टर ने प्रभावितों की समस्याओं के निराकरण के लिए अगले दिन से गांवों में सर्वे शुरू कराने की बात कही। वहीं, आंदोलनकारियों ने मांग की कि नए सर्वे से पहले पुराने सर्वे, मुआवजा वितरण और घर तोड़े जाने की कार्रवाई की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

प्रभावित ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के लिए कलेक्टर हर्ष सिंह, जिला पंचायत सीईओ उमराव सिंह मरावी, अजयगढ़ एसडीएम आलोक मार्को, तहसीलदार सुरेंद्र अहिरवार और जनपद सीईओ सतीश नागवंशी सहित अन्य अधिकारी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बनहरी कला पहुंचे। यहां ग्रामीणों ने परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के मुआवजे, पुनर्वास और घरों को तोड़े जाने से जुड़े मुद्दे उठाए।

पुराने सर्वे और लंबित मामलों पर जवाब मांगा

चर्चा के दौरान अमित भटनागर ने सवाल उठाया कि जब प्रभावित परिवारों का सर्वे और मुआवजा वितरण पूरा नहीं हुआ था, तो उनके घरों को तोड़ने की कार्रवाई कैसे शुरू कर दी गई और गांव डूब क्षेत्र में कैसे आ गए? उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवार लंबे समय से अपनी समस्याओं के निराकरण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कई मामलों में समाधान नहीं हुआ है।

भटनागर के मुताबिक, मार्च में कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान प्रशासन ने प्रत्येक प्रभावित परिवार की समस्या का विस्तृत सर्वे कराने पर सहमति दी थी। इसके बाद जय किसान संगठन ने चार दिनों के भीतर प्रभावित परिवारों के दस्तावेज और उनकी व्यक्तिगत समस्याओं का विवरण एकत्र कर प्रशासन को सौंप दिया था।

उस समय प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि प्रत्येक मामले की जांच कर पात्रता या अपात्रता के कारण स्पष्ट किए जाएंगे और समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। इसके बावजूद कई मामलों में स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर भटनागर ने सवाल किया कि मार्च से अब तक प्रशासन ने क्या कार्रवाई की है और प्रभावितों को उनके आवेदन एवं दस्तावेजों के आधार पर जवाब क्यों नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि प्रशासन को बार-बार नए सर्वे कराने के बजाय पहले से उपलब्ध दस्तावेजों और रिपोर्टों की समीक्षा करनी चाहिए। जिन परिवारों को मुआवजे के लिए अपात्र माना गया है, उन्हें भी इसका स्पष्ट कारण बताया जाना चाहिए।

बिना मुआवजे घर तोड़ने की कार्रवाई पर उठे सवाल

आंदोलनकारियों ने मुआवजे और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी किए बिना घर तोड़े जाने के आरोपों को गंभीर बताते हुए कानूनी प्रावधानों के पालन की मांग की। अमित भटनागर ने भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 38 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों को बेघर करने से पहले लागू वैधानिक शर्तों का पालन और निर्धारित मुआवजे का भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि प्रभावितों के घर तोड़ने की कार्रवाई करीब छह महीने पहले शुरू हो गई थी, जबकि कई परिवारों का कहना है कि उन्हें अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है और उनके मकान डूब क्षेत्र में आ चुके हैं।

भटनागर ने मांग की कि पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि किन अधिकारियों की निगरानी में घर तोड़ने की कार्रवाई हुई, किन परिवारों को कितना मुआवजा दिया गया और किन मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि जांच में यदि नियमों के उल्लंघन या अधिकारियों की लापरवाही की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

गलती मिलने पर कार्रवाई का आश्वासन

प्रभावितों के साथ चर्चा के दौरान कलेक्टर हर्ष सिंह ने कहा कि वे पूरे मामले को देखेंगे और संबंधित दस्तावेजों के साथ ग्रामीणों की समस्याओं को समझेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि जहां किसी स्तर पर गलती पाई जाएगी, वहां नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

कलेक्टर ने अगले दिन से प्रत्येक गांव में सर्वे शुरू कराने की बात भी कही, ताकि प्रभावित परिवारों की समस्याओं को समझकर उनके निराकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

हालांकि, जय किसान संगठन ने स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन मिलने से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। संगठन की मांग है कि मुआवजे और पुनर्वास से जुड़े लंबित मामलों का निराकरण किया जाए तथा जिन परिवारों के घर बिना उचित मुआवजे के तोड़े गए या डूब क्षेत्र में आए हैं, उनके मामलों में जवाबदेही तय की जाए।

दिव्या अहिरवार सहित आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों की जांच की मांग

आंदोलन के दौरान दिव्या अहिरवार सहित अन्य आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों का मुद्दा भी उठाया गया। अमित भटनागर ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग दोहराई।

जय किसान संगठन का आरोप है कि आंदोलनकारियों को दबाने के लिए उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं। संगठन ने इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

कलेक्टर और एसपी के तबादलों के बाद न्याय की उम्मीद

कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के तबादलों के बाद प्रभावित ग्रामीणों को उम्मीद है कि नए अधिकारी उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनेंगे और लंबे समय से लंबित मामलों में ठोस कार्रवाई करेंगे।

आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांग केवल नए सर्वे तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि पुराने सर्वे और मुआवजे से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा हो, प्रभावित परिवारों को उनका उचित मुआवजा मिले, पुनर्वास से संबंधित समस्याओं का समाधान किया जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।

अमित भटनागर ने कहा कि प्रभावित परिवारों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि न्याय, उचित मुआवजा, पुनर्वास और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई चाहिए।

फिलहाल, बारिश और प्रतिकूल मौसम के बावजूद चिता आंदोलन 48वें दिन भी जारी रहा। जय किसान संगठन ने स्पष्ट किया है कि प्रभावितों की समस्याओं का वास्तविक समाधान होने और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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