
शिलांग/भुवनेश्वर- ओडिशा के धेन्कनाल जिले में ईसाई पादरी पर हुए क्रूर हमले ने देशभर के ईसाई समुदाय में चिंता की लहर पैदा कर दी है। इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने ओडिशा सरकार से इस हमले और इससे जुड़े धार्मिक रूपांतरण के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। उन्होंने इसे संवैधानिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं भारत की बहुलवादी और लोकतांत्रिक भावना को खतरे में डालती हैं।
यह घटना 4 जनवरी को परजंग गांव में घटी, जब पादरी बिपिन बिहारी नायक अपने परिवार और अन्य सदस्यों के साथ एक निजी घर में प्रार्थना सभा कर रहे थे। हिन्दूवादी संगठन से जुड़े एक समूह ने उन पर धार्मिक रूपांतरण का झूठा आरोप लगाते हुए हमला कर दिया। पादरी को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। परिवार के सदस्यों का कहना है कि रूपांतरण के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं और इन्हें हिंसा को जायज ठहराने के लिए इस्तेमाल किया गया। पादरी नायक को लाठियों से पीटा गया, चेहरे पर लाल सिंदूर पोता गया, चप्पलों की माला पहनाई गई और गाय का गोबर खाने पर मजबूर किया गया। इस अपमानजनक परेड के दौरान 'जय श्री राम' का जाप भी करवाया गया।
मुख्यमंत्री संगमा ने एक सार्वजनिक बयान में कहा, "यह हमला संविधान द्वारा गारंटीकृत धार्मिक स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा का सीधा उल्लंघन है।" उन्होंने ओडिशा के अधिकारियों से न्याय सुनिश्चित करने और दोषियों को सजा दिलाने की मांग की। संगमा ने जोर देकर कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना जरूरी है, ताकि भारत की विविधता और लोकतंत्र की आत्मा बरकरार रहे।
इस घटना की चर्च नेताओं, ईसाई संगठनों और सिविल सोसाइटी समूहों ने व्यापक निंदा की है। धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हिंसा और धमकियों को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है। चर्च नेताओं ने दोहराया कि प्रार्थना सभाएं और आस्था के अभ्यास संवैधानिक रूप से संरक्षित हैं। उन्होंने मॉब हिंसा और गलत सूचनाओं के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग की।
भारत कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस (Catholic Bishops' Conference of India (CBCI) ने भी पादरी नायक पर हुए हमले और सार्वजनिक अपमान की कड़ी निंदा की है। कॉन्फ्रेंस ने इसे मानवीय गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन करार दिया। जारी बयान में सीबीसीआई ने गहरी पीड़ा व्यक्त की और कहा कि पादरी को मॉब ने पीटा, अपमानित किया और गाय का गोबर खाने पर मजबूर किया, ये कृत्य अत्यधिक क्रूरता और अमानवीय व्यवहार के उदाहरण हैं।
सीबीसीआई ने कहा , "किसी व्यक्ति को गाय का गोबर खाने के लिए मजबूर करना हिंसा और अपमान का घृणित कृत्य है, जो व्यक्ति की गरिमा और आस्था के मूल को चोट पहुंचाता है।" कॉन्फ्रेंस ने इसे लोकतांत्रिक और बहुलवादी समाज में अस्वीकार्य बताते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल और निर्णायक कार्रवाई की मांग की। उन्होंने अधिकारियों से पीड़ित को न्याय दिलाने और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया, चाहे उनकी धार्मिक आस्था कुछ भी हो।
इन्डियन यूथ कांग्रेस ने घटना की निंदा करते हुए एक बयान में कहा, " यह कोई “घटनात्मक चूक” नहीं, यह BJP-RSS के संरक्षण में पनपी नफ़रत, हिंसा और बहिष्कार की विचारधारा का खुला प्रदर्शन है! देश की मांग साफ़ है: नफ़रत के सौदागरों की तुरंत गिरफ़्तारी और कड़ी सज़ा हो! यह भाजपा- RSS की नफरती राजनीति से पैदा हो रही भीड़ की संस्कृति का नतीजा है, जहां मारने वाले वही है सिर्फ जगह और राज्य बदल रहा है। युवा कांग्रेस पादरी बिपिन नायक और देश में भीड़ हिंसा के हर पीड़ित के साथ एकजुटता में खड़ी है, इंसाफ़, सम्मान और संविधान के लिए।"
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