
धेन्कनाल- ओडिशा के धेन्कनाल जिले में एक ईसाई पादरी पर बजरंग दल के सदस्यों द्वारा की गई अमानवीय बर्बरता को झेलने के बाद भी उन्होंने अपने उत्पीड़कों को क्षमा दे दी है। 4 जनवरी को हुई इस घटना में पादरी बिपिन बिहारी नायक को लाठियों से पीटा गया, चेहरे पर लाल सिंदूर पोत दिया गया, चप्पलों की माला पहनाई गई और पूरे गांव में अपमानित कर घुमाया गया। सबसे घृणित अपराध के तहत उन्हें गाय का गोबर खाने पर मजबूर किया गया और 'जय श्री राम' का जाप करवाया गया। इस घटना के 17 दिन बाद भी पुलिस ने कोई गिरफ्तारी नहीं की, जिससे ईसाई समुदाय में भय का माहौल है।
घटना 4 जनवरी को परजंग गांव में घटी, जहां पादरी नायक अपने परिवार और सात अन्य परिवारों के साथ एक घर में प्रार्थना सभा कर रहे थे। अचानक 40 से अधिक लोगों की उग्र भीड़ ने घर पर धावा बोल दिया। पादरी की पत्नी वंदना ने बताया, "भीड़ ने सबको पीटना शुरू कर दिया। मैं और बच्चे किसी तरह संकरी गली से भागे और थाने पहुंचे।" हमले के दौरान परिवार ने पुलिस हेल्पलाइन पर कॉल किया और पत्नी थाने पहुंची, लेकिन पुलिस ने एफआईआर और मेडिकल प्रूफ मांगकर समय बर्बाद किया।
पादरी नायक ने कैथोलिक कनेक्ट को दिए बयान में कहा, "मुझे लाठियों से मारा गया, सिंदूर लगाया गया, चप्पलों की माला पहनाई गई और गांव भर में घुमाया गया। गोबर खाने को मजबूर किया गया, लेकिन ईश्वर की कृपा से मैं जीवित हूं।"
पादरी ग्राहम स्टेन्स की शहादत की वर्षगांठ (23 जनवरी) पर पादरी नायक ने क्षमा का मार्ग चुना। उन्होंने कहा, "मैं उन सबको माफ कर देता हूं जिन्होंने मुझे पीटा, अपमानित किया, गोबर खाने को मजबूर किया और झूठे आरोप लगाए। हमारा ईश्वर बिना शर्त माफ करता है, और यही हमें सिखाता है। सब कुछ ईश्वर के हाथों में सौंपता हूं।" पादरी ने बताया कि 13 जनवरी को एसपी से मिलकर भी उन्होंने यही अपील की, "हमें शांति से जीने और आस्था का पालन करने की आजादी दें।"
पादरी के बड़े भाई उदय नायक ने कहा, "हमले जारी रहते हुए पुलिस घटनास्थल पर नहीं पहुंची। हमने परेड की तस्वीरें और सबूत दिए, लेकिन अपर्याप्त बताकर खारिज कर दिया। सड़कों पर सीसीटीवी हैं, फिर भी कोई जांच नहीं की ।"
उन्होंने आगे बताया कि स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता को देखते हुए हम 8-10 हजार रूपये खर्च करके किराये पर गाडी लेकर 45 ईसाई बंधुओं के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे, शिकायत दर्ज कराई। "फिर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यह पूर्वनियोजित हमला था, जो रोका जा सकता था। अब हमारा न्याय व्यवस्था पर भरोसा डगमगा गया है।"
ओडिशा और दिल्ली से समर्थन मिला, लेकिन न्याय न मिलने से परिवार थक चुका है। उदय नायक ने भी शहीद स्टेन्स की पत्नी से प्रेरित होकर कहा, "हम अब लड़ाई नहीं लड़ेंगे, बल्कि क्षमा चुनेंगे। प्रार्थना है कि हमलावर बदल जाएं और सच्चे ईश्वर को जानें। लेकिन अगर पुलिस स्वत: जांच कर सजा देगी, तो स्वागत है।" परिवार ने समर्थकों के प्रति आभार जताया, लेकिन इस घटना को देश की दशा पर दुखद चिंतन बताया।
ग्राहम स्टुअर्ट स्टेंस एक ऑस्ट्रेलियाई ईसाई मिशनरी थे, जिन्हें अपने दो बेटों, फिलिप (10 वर्ष ) और टिमोथी (6 वर्ष ) के साथ ओडिशा के केऊंझर ज़िले में हिंदू कट्टरपंथी समूह के सदस्यों द्वारा जलाकर मार डाला गया था। 2003 में, बजरंग दल के कार्यकर्ता दारा सिंहको हत्यारों का नेतृत्व करने का दोषी ठहराया गया था और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
स्टेंस 1965 से ओडिशा में "मयूरभंज लेप्रोसी होम" नामक एक इंजील मिशनरी संगठन के हिस्से के रूप में काम कर रहे थे, जो कुष्ठ रोगियों की देखभाल करते थे और उस क्षेत्र में आदिवासी लोगों की देखभाल करते थे जो गरीबी में रहते थे। हालाँकि कुछ हिंदू समूहों ने आरोप लगाया कि इस दौरान उन्होंने कई हिंदुओं को ईसाई धर्म में विश्वास करने के लिए लालच दिया या जबरन मजबूर किया।
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