गधे की फोटो लगाकर कराया नर्सिंग रजिस्ट्रेशन, एमपी नर्सेज काउंसिल ने जारी कर दिया डिजिटल प्रमाणपत्र

आवेदन में नाम रखा ‘डंकी एमपीएनआरसी’, पिता के नाम में ‘डंकी फादर’, जाति में लिखा ‘जानवर’; शुल्क जमा होते ही बीएससी नर्सिंग पासआउट बताकर मिला रजिस्ट्रेशन
गधे की फोटो लगाकर कराया नर्सिंग रजिस्ट्रेशन, एमपी नर्सेज काउंसिल ने जारी कर दिया डिजिटल प्रमाणपत्र
फ़ोटो- इंटरनेट
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भोपाल। मध्य प्रदेश नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल की ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था की खामियां उस समय सामने आ गईं, जब एक गधे की तस्वीर और फर्जी व असंबंधित दस्तावेजों के आधार पर उसके नाम से नर्सिंग का डिजिटल पंजीयन प्रमाणपत्र जारी हो गया। आवेदन में नाम ‘डंकी एमपीएनआरसी’ और पिता का नाम ‘डंकी फादर’ दर्ज किया गया था। इसके बावजूद ऑनलाइन सिस्टम ने आवेदन स्वीकार किया और निर्धारित शुल्क जमा होने के बाद उसे नर्स-मिडवाइफ के रूप में पंजीकृत कर दिया।

यह पूरा मामला एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार द्वारा ऑनलाइन पंजीयन प्रणाली की कार्यप्रणाली और दस्तावेज सत्यापन व्यवस्था की जांच के लिए किए गए परीक्षण के बाद सामने आया है। मामले के सामने आने के बाद नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है और आईटी सिस्टम में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करने की बात कही है। काउंसिल ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की भी बात कही है।

आवेदन में गधे की फोटो, जाति में लिखा ‘जानवर’

जानकारी के मुताबिक रवि परमार ने मध्य प्रदेश नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल के ऑनलाइन पोर्टल पर नर्सिंग पंजीयन के लिए आवेदन किया। आवेदन में आवेदक की तस्वीर के स्थान पर गधे की फोटो अपलोड की गई।

आवेदन में नाम ‘डंकी एमपीएनआरसी’ और पिता के नाम के कॉलम में ‘डंकी फादर’ लिखा गया। धर्म के विकल्प में ‘अन्य’ और जाति के स्थान पर ‘जानवर’ दर्ज किया गया। पते के कॉलम में भी कोई वास्तविक पता देने के बजाय ‘जहां पर जगह मिल जाए’ लिखा गया।

इसके साथ ही शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेजों के स्थान पर ऐसे दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड की गई, जिनसे आवेदक की वास्तविक शैक्षणिक योग्यता प्रमाणित नहीं होती थी।

2050 रुपये शुल्क जमा किया और जारी हो गया प्रमाणपत्र

सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि आवेदन में इतनी स्पष्ट विसंगतियां होने के बावजूद ऑनलाइन सिस्टम ने आवेदन को आगे बढ़ने दिया। इसके बाद पंजीयन के लिए निर्धारित 2050 रुपये का शुल्क भी जमा कर दिया गया।

शुल्क भुगतान के बाद काउंसिल की ओर से डिजिटल पंजीयन प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। प्रमाणपत्र में ‘डंकी एमपीएनआरसी’ को भोपाल नर्सिंग कॉलेज से बीएससी नर्सिंग पासआउट बताया गया और उसे नर्स-मिडवाइफ के रूप में पंजीकृत किया गया। यह पंजीयन सितंबर 2031 तक वैध बताया गया है।

दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल

इस पूरे मामले ने नर्सिंग पंजीयन व्यवस्था में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि आवेदन में नाम, फोटो, जाति, पता और शैक्षणिक दस्तावेजों में इतनी स्पष्ट विसंगतियां थीं, तो सिस्टम ने इन्हें प्राथमिक स्तर पर ही क्यों नहीं रोका?

रवि परमार का कहना है कि उन्होंने यह प्रक्रिया इसलिए आजमाई ताकि यह देखा जा सके कि काउंसिल का ऑनलाइन सिस्टम दस्तावेजों और आवेदक की जानकारी का किस स्तर तक सत्यापन करता है।

उनके मुताबिक, यदि बिना वास्तविक शैक्षणिक योग्यता और सत्यापन के किसी आवेदक को नर्सिंग का पंजीयन प्रमाणपत्र मिल सकता है तो यह केवल वेबसाइट की तकनीकी खामी नहीं है, बल्कि पूरी पंजीयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला है।

पहले 10वीं-12वीं से लेकर सभी दस्तावेजों का होता था सत्यापन

बताया गया है कि नर्सिंग पंजीयन की पुरानी व्यवस्था में आवेदक से कई तरह के दस्तावेज मांगे जाते थे। इनमें 10वीं और 12वीं की अंकसूची, बीएससी नर्सिंग कोर्स कंप्लीशन सर्टिफिकेट, प्रोविजनल डिग्री अथवा डिप्लोमा तथा सभी सत्रों की मार्कशीट शामिल थीं।

इन दस्तावेजों का संबंधित कॉलेज के प्राचार्य द्वारा सील और हस्ताक्षर के साथ सत्यापन भी कराया जाता था। इसके बाद काउंसिल स्तर पर दस्तावेजों की जांच की जाती थी और प्रक्रिया पूरी होने पर डिजिटल हस्ताक्षर के साथ पंजीयन प्रमाणपत्र जारी किया जाता था।

अब केवल दो दस्तावेजों से आगे बढ़ रहा आवेदन

नई ऑनलाइन व्यवस्था में पंजीयन के लिए मुख्य रूप से ट्रेनिंग कंप्लीशन सर्टिफिकेट और डिग्री या डिप्लोमा सर्टिफिकेट की स्कैन कॉपी मांगी जा रही है।

आरोप है कि सिस्टम में यह जांचने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है कि अपलोड किया गया दस्तावेज वास्तव में संबंधित आवेदक का है या किसी दूसरे व्यक्ति का। इसी कमी का फायदा उठाकर असंबंधित दस्तावेज अपलोड किए गए और आवेदन प्रक्रिया आगे बढ़ती चली गई।

नर्सिंग पंजीयन की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल

नर्सिंग पंजीयन केवल एक सामान्य ऑनलाइन प्रमाणपत्र नहीं है। इसका सीधा संबंध स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की सुरक्षा से है। किसी व्यक्ति को वैध नर्सिंग पंजीयन मिलने के बाद उसके लिए अस्पताल, नर्सिंग होम या अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में रोजगार के रास्ते खुल सकते हैं।

ऐसे में यदि कोई व्यक्ति वास्तविक नर्सिंग शिक्षा या प्रशिक्षण के बिना पंजीयन हासिल कर लेता है, तो उसके आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं में काम करने की संभावना मरीजों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।

इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि काउंसिल द्वारा जारी किए जाने वाले डिजिटल प्रमाणपत्रों की वैधता जांचने के लिए अस्पतालों और अन्य संस्थानों के पास क्या पर्याप्त व्यवस्था है।

खुलासे के बाद ऑनलाइन पंजीयन लिंक हटाया

मामला सामने आने के बाद मध्य प्रदेश नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने अपने ऑनलाइन पोर्टल से पंजीयन का लिंक हटा दिया है। फिलहाल नए पंजीयन की प्रक्रिया रोक दी गई है।

काउंसिल का कहना है कि ऑनलाइन सिस्टम में आवश्यक सुरक्षा उपाय और अतिरिक्त सेफगार्ड जोड़े जाएंगे। इसके बाद पंजीयन प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी।

काउंसिल ने इस मामले को फ्रॉड बताते हुए आईटी सेल को वेबसाइट की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई की बात कही गई है।

काउंसिल ने क्या कहा?

मध्य प्रदेश नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल की अध्यक्ष डॉ. बीनू कुशवाहा ने कहा, “यह फ्रॉड किया गया है। आईटी सेल से कहा गया है कि वेबसाइट में और सेफगार्ड लगाए जाएं। अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर की जा रही है। वेबसाइट विद्यार्थियों के लिए बनाई गई है, लेकिन कुछ लोग इसका गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं।”

अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि केवल ऑनलाइन सिस्टम की तकनीकी खामी के कारण यह प्रमाणपत्र जारी हुआ या पंजीयन प्रक्रिया में अन्य स्तरों पर भी लापरवाही हुई। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि काउंसिल ऐसे सभी पंजीयन की दोबारा जांच के लिए क्या कदम उठाती है, जो इसी ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए जारी किए गए हैं।

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