ट्रांस समुदाय में भी जातिवाद? "हम बाबासाहेब-रमाई के बच्चे" कहने पर ग्रेस बानू पर भड़की लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, आर्यन पाशा ने दे डाली DNA टेस्ट की धमकी!

ग्रेस बानू ने अपने संबोधन में ट्रांसजेंडर अमेंडमेंट एक्ट को ‘हिंदुत्व ब्राह्मणवादी पितृसत्तात्मक कानून’ बताया, तो लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी हुईं नाराज़, उन्होंने दावा किया कि वह ब्राह्मण हैं और दलितों की तरह ही उत्पीड़न की शिकार हैं।
 शुरू में कार्यक्रम के एजेंडा में लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को कीनोट स्पीकर बनाया गया था। ग्रेस और एक अन्य अंबेडकरवादी एक्टिविस्ट ने इसका विरोध किया क्योंकि उनका कहना था कि लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की ब्राह्मणवादी हिंदुत्व विचारधारा को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं।
शुरू में कार्यक्रम के एजेंडा में लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को कीनोट स्पीकर बनाया गया था। ग्रेस और एक अन्य अंबेडकरवादी एक्टिविस्ट ने इसका विरोध किया क्योंकि उनका कहना था कि लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की ब्राह्मणवादी हिंदुत्व विचारधारा को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं।एआई निर्मित सांकेतिक चित्र
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नई दिल्ली- दिल्ली के ललित होटल में 3 अप्रैल को आयोजित ‘ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026’ पर नेशनल कंसल्टेशन में एक चौंकाने वाली घटना हुई जिसमें ट्रांसजेंडर समुदाय के बीच भी जातिवादी मानसिकता उजागर हुई। तमिलनाडु की दलित और ट्रांस राइट्स की दिग्गज एक्टिविस्ट ग्रेस बानू ने आरोप लगाया कि उनपर हिजड़ा अधिकार कार्यकर्ता और किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी (LNT) और आर्यन पाशा ने न सिर्फ मौखिक आक्रमण किया, बल्कि शारीरिक हमले की कोशिश भी की। ग्रेस बानू एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और तमिलनाडु राज्य में इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश पाने वाली पहली ट्रांसजेंडर व्यक्ति थीं।

मामला ‘जय भीम’ और ‘बाबासाहेब-रामाबाई के बच्चे’ कहने से भड़का, जो ब्राह्मणवादी-पितृसत्तात्मक ताकतों द्वारा ट्रांस समुदाय के अंदर भी दलित-बहुजन आवाज को कुचलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आपको बता दें आचार्य महामंडलेश्वर डॉ लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कुछ समय पहले यामाई ममता नंद गिरी उर्फ ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े से निष्कासित किया था, ममता कुलकर्णी ने माघ मेला विवाद पर कहा था कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने संतता खो दी. आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने ममता कुलकर्णी के बयानों से असहमति जताते हुए खुद को अलग करते हुए यह कार्रवाई की थी.

दिल्ली में ट्रांस बिल 2026 पर विचार करने के लिए हुए कांफ्रेंस में समुदाय के भीतर ब्राह्मणवाद और असमानता की भावना सामने आई। ग्रेस बानू ने एकआधिकारिक बयान में पूरी घटना का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि शुरू में कार्यक्रम के एजेंडा में लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को कीनोट स्पीकर बनाया गया था। ग्रेस और एक अन्य अंबेडकरवादी एक्टिविस्ट ने इसका विरोध किया क्योंकि लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की ब्राह्मणवादी हिंदुत्व विचारधारा को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। विरोध के बाद आयोजकों हुमसफर ट्रस्ट, KSF और नाज़ ने एजेंडा संशोधित किया और ग्रेस बानू कार्यक्रम में शामिल हुईं। भारत के पहले ट्रांसमैंन बॉडीबिल्डर आर्यन पाशा भी कार्यक्रम में थे।

आयोजन के दौरान लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने अपनी स्पीच ‘जय श्री महाकाल’ और ‘मैं ब्राह्मण होने पर गर्व करती हूं’ जैसे शब्दों से शुरू की। ग्रेस ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई और न ही बीच में टोका। लेकिन जब ग्रेस ने अपनी पैनल चर्चा में ‘जय भीम!’ के नारे के साथ कहा कि “हम सब बाबासाहेब और रामाबाई के नाती-पोते और नातिन-पोतियां हैं” और ट्रांसजेंडर अमेंडमेंट एक्ट को ‘हिंदुत्व ब्राह्मणवादी पितृसत्तात्मक कानून’ बताया, तो त्रिपाठी को बुरा लगा।

ग्रेस बानू का आरोप है कि लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी का यह व्यवहार नया नहीं है, वे पहले भी जातिवादी टिप्पणियां कर चुकी हैं। सदियों से ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने दलितों-आदिवासियों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार नहीं दिया।

पैनल खत्म होते ही लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी माइक छीनकर खड़ी हो गईं और ग्रेस बानू का नाम लेकर आक्रामक अंदाज में चिल्लाने लगीं। उन्होंने ब्राह्मण होने का दावा करते हुए कहा कि वे भी उतनी ही पीड़ित हैं जितनी कोई दलित। लक्ष्मी ने यह भी कहा कि घरानों में कई दलित हैं और सबको साथ कोर्ट जाना चाहिए। ग्रेस बानू ने शांति से जवाब दिया, “मैं नहीं जाऊंगी।” ग्रेस ने कहा कि वे एक वयस्क हैं और अपने व्यक्तिगत हैसियत पर कोर्ट जा सकती हैं इसके लिए त्रिपाठी या किसी और के साथ जाना जरूरी नहीं। इसके बाद लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी कथित रूप से और भी आक्रामक हो गईं और जातिवादी भाषा में हमला बोल दिया।

ग्रेस ने बताया कि इसी दौरान आर्यन पाशा ने हिंदी में चिल्लाते हुए कहा, “ग्रेस, मेरे साथ आओ, हम तुम्हारा डीएनए टेस्ट करवाएंगे कि तुम सच में अंबेडकर की पोती हो या नहीं!” वे जानते थे कि ग्रेस हिंदी नहीं समझतीं, फिर भी उन्होंने माइक लेकर उनके पास आकर खड़े हो गए और शारीरिक हमले की कोशिश की। जब कोयल घोष ने आर्यन पाशा के इस जातिवादी व्यवहार पर सवाल किया तो आर्यन ने उनका कॉलर पकड़ लिया। अन्य पैनलिस्टों और आयोजकों ने किसी तरह उन्हें रोका।

ग्रेस बानू ने बताया कि पूरे घटनाक्रम के दौरान वे शांत रहीं। आयोजकों ने बाद में उनसे माफी मांगी, लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और आर्यन पाशा लंच के बाद कार्यक्रम छोड़ कर चले गये। आयोजकों ने निष्पक्षता का रुख अपनाते हुए ग्रेस को लक्ष्मी की सफाई नहीं बताई। ग्रेस बानू का कहना है कि यह घटना कोई व्यक्तिगत झगड़ा नहीं, बल्कि दलित-ट्रांस एक्टिविस्ट को चुप कराने की सोची-समझी जातिवादी रणनीति है।

ग्रेस बनू ने लिखा, “मेरा दिल टूट गया है। मैं आज भी कांप रही हूं। लेकिन आखिरी सांस तक मैं कहूंगी- मैं बाबासाहेब और रामाबाई की पोती हूं। जय भीम! जय रामाबाई! इस ब्राह्मणवादी पितृसत्तात्मक ट्रांसजेंडर अमेंडमेंट एक्ट, 2026 का विरोध जारी रहेगा! जाति-अपार्थीड खत्म हो!”

ग्रेस बानू का आरोप है कि लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी का यह व्यवहार नया नहीं है, वे पहले भी जातिवादी टिप्पणियां कर चुकी हैं। सदियों से ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने दलितों-आदिवासियों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार नहीं दिया। आज ट्रांस अधिकारों के नाम पर भी वही पुरानी ताकतें दलित आवाज को कुचलने की कोशिश कर रही हैं।

दिल्ली के इस पांच सितारा होटल में हुई इस घटना ने देशभर में दलित-बहुजन और ट्रांस एक्टिविस्टों को झकझोर दिया है। ग्रेस बानू का बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और कई जन इस घटना की निंदा कर रहे हैं।

Summary

सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रांस अधिकार कानून बनाने की प्रक्रिया में भी जातिवाद और ब्राह्मणवाद हावी हो जाएगा? सदियों से समाज और लोगों की उपेक्षा और उपहास का शिकार रहे ट्रांसजेंडर समुदाय में भी अगर मनुवादी मानसिकता घर कर जाए तो समुदाय के सदस्य अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने के बजाय आपसी खींचतान और विवादों में फंस कर रह जायेंगे जिससे सामाजिक न्याय और समावेशिता का आन्दोलन कमजोर होगा।

 शुरू में कार्यक्रम के एजेंडा में लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को कीनोट स्पीकर बनाया गया था। ग्रेस और एक अन्य अंबेडकरवादी एक्टिविस्ट ने इसका विरोध किया क्योंकि उनका कहना था कि लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की ब्राह्मणवादी हिंदुत्व विचारधारा को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं।
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 शुरू में कार्यक्रम के एजेंडा में लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को कीनोट स्पीकर बनाया गया था। ग्रेस और एक अन्य अंबेडकरवादी एक्टिविस्ट ने इसका विरोध किया क्योंकि उनका कहना था कि लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की ब्राह्मणवादी हिंदुत्व विचारधारा को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं।
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 शुरू में कार्यक्रम के एजेंडा में लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को कीनोट स्पीकर बनाया गया था। ग्रेस और एक अन्य अंबेडकरवादी एक्टिविस्ट ने इसका विरोध किया क्योंकि उनका कहना था कि लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की ब्राह्मणवादी हिंदुत्व विचारधारा को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं।
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