
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में बंधुआ मजदूरों पर हुए अमानवीय अत्याचार के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने गुरुवार को इस गंभीर घटना को लेकर राज्य सरकार और प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी किया है। इस खौफनाक मामले में 12 मजदूरों को कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया था और उनके साथ क्रूरता की गई थी।
मानवाधिकार पैनल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
मानवाधिकार आयोग ने मीडिया में आई इस चौंकाने वाली खबर का स्वत: संज्ञान लिया है। जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरनगर जिले के मंडी गांव में स्थित एक पेपर प्लेट बनाने वाली फैक्ट्री में इन 12 मजदूरों को पिछले करीब डेढ़ साल से कैद करके रखा गया था।
वहां उनसे जबरन आधी रात तक काम लिया जाता था। इस कड़ी मेहनत के बदले में उन्हें न तो भरपेट खाना नसीब होता था और न ही कोई मजदूरी दी जाती थी। विरोध करने पर इन मजदूरों के साथ बेरहमी से मारपीट की जाती थी।
इस दलदल से बाहर निकलने की राह तब खुली जब इनमें से एक मजदूर किसी तरह फैक्ट्री से जान बचाकर भागने में कामयाब हो गया। उसने तुरंत इलाके के तितावी पुलिस स्टेशन पहुंचकर अपनी खौफनाक आपबीती सुनाई और मामले की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए त्वरित कार्रवाई की और फैक्ट्री पर छापा मारकर बाकी सभी बंधुआ मजदूरों को सकुशल मुक्त करा लिया। अब एनएचआरसी की इस सीधी दखलंदाजी के बाद दोषियों पर प्रशासन की सख्त कानूनी कार्रवाई की उम्मीद बंध गई है।
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