
नई दिल्ली: तमिलनाडु के मयिलादुथुरई जिले के तरंगमबाड़ी में एक दलित युवक की आत्महत्या के मामले में आखिरकार बुधवार को शांति वार्ता सफल रही. अधिकारियों द्वारा कई प्रमुख मांगें मान लिए जाने के बाद युवक के परिजन उसका शव लेने के लिए सहमत हो गए हैं. इन मांगों में परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, मुआवजा और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शामिल है.
यह शांति बैठक तरंगमबाड़ी तालुक कार्यालय में सिरकाली के राजस्व मंडल अधिकारी (RDO) के नेतृत्व में हुई. इस वार्ता में मृतक युवक के रिश्तेदार और विभिन्न सामाजिक आंदोलनों के प्रतिनिधि मौजूद थे. परिवार की जिद थी कि 19 वर्षीय पार्थीबन के साथ मारपीट करने वालों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए. हालांकि, अधिकारियों ने इस मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामले की जांच केवल उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही आगे बढ़ेगी.
प्रशासन ने स्थिति को शांत करने के लिए परिवार की कई अहम शर्तें मान ली हैं. अब पोस्टमार्टम परिवार द्वारा नामित डॉक्टरों की मौजूदगी में किया जाएगा और पारदर्शिता के लिए पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होगी. परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट की एक प्रति भी अनिवार्य रूप से सौंपी जाएगी. इसके अलावा प्रशासन ने परिवार को अनुग्रह राशि, मुआवजे के तौर पर मुफ्त जमीन और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का पक्का आश्वासन दिया है. पुलिस ने भी यह भरोसा दिलाया है कि पार्थीबन पर पहले हुए हमले में शामिल सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा.
पुथुपलायम निवासी 19 वर्षीय पार्थीबन का सथांगुडी की रहने वाली 17 वर्षीय एक नाबालिग लड़की के साथ पिछले दो साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था. आरोप है कि लड़की का परिवार जातिगत भिन्नता के कारण इस रिश्ते के सख्त खिलाफ था और लगातार इसका विरोध कर रहा था.
मामले ने तब तूल पकड़ा जब सोमवार रात पार्थीबन ने पोरैयार पुलिस स्टेशन जाकर एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई. इस शिकायत में उसने आरोप लगाया था कि लड़की के परिवार वालों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की है और उसे जातिसूचक गालियां दी हैं. इस तनावपूर्ण घटना के ठीक अगले दिन, यानी मंगलवार सुबह, यह प्रेमी जोड़ा लड़की के घर के पास बने एक शेड में फांसी के फंदे से लटका पाया गया.
इन मौतों की खबर फैलते ही इलाके में भारी तनाव उत्पन्न हो गया. पार्थीबन के आक्रोशित रिश्तेदारों ने लड़की के घर में जमकर तोड़फोड़ की और उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. उनका सीधा आरोप था कि इन दोनों मौतों की मुख्य वजह जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना ही है. इसी नाराजगी के चलते शुरुआत में परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया था, लेकिन अधिकारियों द्वारा दिए गए ठोस आश्वासनों के बाद आखिरकार वे शांत हुए.
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