
पटना: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। सिकंदरपुर थाना क्षेत्र में सोमवार को एक सेप्टिक टैंक की शटरिंग हटाते समय जहरीली गैस की चपेट में आने से दो निर्माण मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई।
अपने साथियों को बचाने के प्रयास में एक अन्य मजदूर भी गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। फिलहाल उसका इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है और डॉक्टरों ने उसे खतरे से बाहर बताया है। पुलिस ने दोनों मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) भेज दिया है।
जान गंवाने वाले दोनों मजदूर आपस में रिश्तेदार थे। मृतकों की पहचान मीनापुर थाना क्षेत्र के अली नेउरा गांव निवासी सोनू कुमार और उनके बहनोई मोहम्मद जहांगीर के रूप में हुई है। मोहम्मद जहांगीर सिकंदरपुर इलाके के ही रहने वाले थे।
यह खौफनाक हादसा सिकंदरपुर स्थित मुन्ना गुप्ता के मकान में हुआ। पुलिस के अनुसार, इस शौचालय के सेप्टिक टैंक का निर्माण लगभग 15 दिन पहले ही पूरा हुआ था। कंक्रीट ढलाई का काम खत्म होने के बाद से ही टैंक पूरी तरह से बंद था।
जांचकर्ताओं का मानना है कि हवा की आवाजाही न होने के कारण अंदर खतरनाक गैसें जमा हो गई थीं। इसके साथ ही टैंक के भीतर ऑक्सीजन का स्तर भी काफी नीचे गिर गया था, जो इस बड़े हादसे की मुख्य वजह बना।
सोमवार की सुबह सोनू टैंक के निर्माण में इस्तेमाल की गई लकड़ी और प्लाईवुड की शटरिंग को निकालने के लिए एक छोटे से रास्ते से अंदर घुसा। अंदर जाते ही उसे सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी और उसने घबराकर मदद के लिए चीखना शुरू कर दिया।
सोनू को तड़पता देख जहांगीर भी उसे बचाने के लिए तुरंत टैंक में कूद पड़ा, लेकिन कुछ ही मिनटों में वह भी बेहोश हो गया। बाहर निकाले जाने से पहले ही दोनों अचेत होकर गिर पड़े।
बोचहां के सरवाड़ीपुर गांव के रहने वाले एक अन्य मजदूर दिनेश कुमार ने यह मंजर देखकर शोर मचाया और बचाव की कोशिश की। इस दौरान गैस के संपर्क में आने से उसकी भी तबीयत बिगड़ गई।
इसके बाद स्थानीय लोगों और अन्य मजदूरों ने मिलकर कड़ी मशक्कत के बाद तीनों को बाहर निकाला। हालांकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सोनू और जहांगीर को बाहर निकालते ही मृत घोषित कर दिया गया।
सिकंदरपुर के एसएचओ रवि भूषण ने बताया कि शुरुआती जांच में यही सामने आया है कि बंद टैंक के अंदर जहरीली गैसों में सांस लेने की वजह से मजदूरों का दम घुटा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कई दिनों तक टैंक बंद रहने के कारण वहां मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जानलेवा गैसें बन गई होंगी। पुलिस अब इस बात की भी गहन जांच कर रही है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। इस बिंदु पर भी जांच की जा रही है कि क्या मजदूरों को ऐसे खतरनाक स्थान पर उतारने से पहले कोई सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए गए थे।
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