MP: पॉलिश मशीन की चपेट में आया मजदूर, हाथ-पैर कटे, समूह बीमा तक नहीं

भगवती राइस मिल में हादसे के बाद श्रम और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की जांच, मजदूर का समूह बीमा भी नहीं कराया गया था
MP: पॉलिश मशीन की चपेट में आया मजदूर, हाथ-पैर कटे, समूह बीमा तक नहीं
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भोपाल। मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम, मोहासा औद्योगिक क्षेत्र स्थित भगवती राइस मिल में दो दिन पहले काम के दौरान हुए गंभीर हादसे ने औद्योगिक इकाइयों में मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार शाम काम करते समय 45 वर्षीय मजदूर महेश नामदेव पॉलिश मशीन की चपेट में आ गया। हादसा इतना भयावह था कि उसका एक हाथ और एक पैर शरीर से अलग हो गया। गंभीर रूप से घायल मजदूर को तत्काल उपचार के लिए भोपाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। घटना के बाद सोमवार को औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग और श्रम विभाग की टीम ने भगवती राइस मिल पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और वहां की सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की।

जांच के दौरान अधिकारियों के सामने औद्योगिक इकाई में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल सामने आए। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा इंतजामों में चूक के साथ यह तथ्य भी सामने आया कि घायल मजदूर का समूह बीमा नहीं कराया गया था। हादसे के बाद अब विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि मिल में काम करने वाले मजदूरों के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि मशीन संचालन के दौरान आवश्यक सुरक्षा उपकरण और सावधानियां बरती जा रही थीं या नहीं।

शनिवार शाम पॉलिश मशीन की चपेट में आया मजदूर

भगवती राइस मिल में शनिवार शाम करीब 5:30 बजे महेश नामदेव रोज की तरह काम कर रहा था। इसी दौरान वह पॉलिश मशीन की चपेट में आ गया। मशीन की चपेट में आने से उसे बेहद गंभीर चोटें आईं और उसका एक हाथ तथा एक पैर शरीर से अलग हो गया। हादसे के बाद मिल परिसर में अफरातफरी मच गई। गंभीर हालत को देखते हुए घायल मजदूर को उपचार के लिए भोपाल ले जाया गया, जहां एक निजी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।

हादसे की गंभीरता को देखते हुए यह सवाल भी उठ रहा है कि जिस मशीन पर मजदूर काम कर रहा था, उसके आसपास पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम थे या नहीं। औद्योगिक इकाइयों में मशीनों के संचालन के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के लिए कई तरह के मानक निर्धारित हैं। जांच अधिकारियों द्वारा अब यह पता लगाया जा रहा है कि भगवती राइस मिल में इन मानकों का कितना पालन किया जा रहा था।

हादसे के करीब 20 घंटे बाद सामने आई घटना

हादसे को लेकर एक और गंभीर सवाल घटना की जानकारी सामने आने में हुई देरी को लेकर है। आरोप है कि घटना के बाद करीब 20 घंटे तक मामले की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई। जब मामले की जानकारी प्रशासन तक पहुंची तो नायब तहसीलदार, माखननगर थाना प्रभारी कंचन सिंह ठाकुर और श्रम निरीक्षक ज्योति अय्यर मौके पर पहुंचे।

बताया गया कि अधिकारियों के मौके पर पहुंचने के दौरान वहां कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं मिला। इसके बाद टीम ने घटनास्थल का पंचनामा तैयार किया और वापस लौट गई। घटना के तीसरे दिन सोमवार को श्रम विभाग और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने दोबारा राइस मिल पहुंचकर पूरे परिसर का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने हादसे की परिस्थितियों के साथ-साथ मिल में मजदूरों की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों को भी जांच के दायरे में लिया।

घटनास्थल पर नहीं मिले हादसे के स्पष्ट साक्ष्य

सोमवार को जांच टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। अधिकारियों ने उस स्थान और मशीन को देखा, जहां मजदूर हादसे का शिकार हुआ था। निरीक्षण के दौरान टीम को घटनास्थल पर खून या हादसे से जुड़े अन्य स्पष्ट साक्ष्य दिखाई नहीं दिए। इसके बाद अधिकारियों ने मौके का पंचनामा तैयार किया और आवश्यक जानकारी दर्ज की।

घटना के बाद घटनास्थल में बदलाव हुआ या सफाई की गई, इस तरह के सवाल भी जांच का हिस्सा हो सकते हैं। हालांकि, हादसे की वास्तविक परिस्थितियां और घटनास्थल पर साक्ष्यों की स्थिति क्या थी, इसका स्पष्ट निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

मजदूर का समूह बीमा नहीं कराया गया था

जांच के दौरान सबसे अहम बातों में से एक यह सामने आई कि घायल मजदूर महेश नामदेव का समूह बीमा नहीं कराया गया था। औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा और दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सहायता से जुड़े प्रावधानों का पालन कितना किया गया, यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

अधिकारियों के अनुसार महेश के पास संबल कार्ड है। इसके आधार पर शासन की योजना के तहत उसे आंशिक क्षति के लिए करीब एक लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जा रही है। हालांकि हादसे में मजदूर को हुई गंभीर शारीरिक क्षति को देखते हुए परिवार के सामने इलाज और भविष्य की आजीविका से जुड़ी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

कंपनी करा रही घायल मजदूर का इलाज

हादसे के बाद भगवती राइस मिल प्रबंधन की ओर से घायल मजदूर का भोपाल के निजी अस्पताल में इलाज कराया जा रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति और मजदूर की गंभीर चोटों को देखते हुए उपचार का खर्च भी एक महत्वपूर्ण विषय है। फिलहाल कंपनी की ओर से इलाज की जिम्मेदारी उठाए जाने की बात सामने आई है।

हालांकि, हादसे की परिस्थितियों, मशीन की सुरक्षा व्यवस्था और मजदूर के समूह बीमा से जुड़े सवालों पर कंपनी के अधिकारी विस्तृत आधिकारिक बयान देने से बच रहे हैं। श्रम विभाग के अनुसार कंपनी की ओर से घायल मजदूर और उसके परिवार के प्रति संवेदना जताई गई है, लेकिन हादसे की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था में हुई किसी भी संभावित चूक को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

सुरक्षा मानकों की जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी

सहायक श्रम आयुक्त रजनी मालवीय के अनुसार राइस मिल का निरीक्षण कर सुरक्षा संबंधी मानकों की जांच की गई है। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर मशीन और औद्योगिक इकाई में मौजूद सुरक्षा व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया है।

अब जांच में यह देखा जाएगा कि मशीन संचालन के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। मजदूर को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे या नहीं, मशीन की सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी और काम के दौरान निगरानी की क्या व्यवस्था थी, इन सभी बिंदुओं की जांच की जाएगी।

पुलिस और विभागीय जांच के बाद होगी कार्रवाई

अधिकारियों के मुताबिक हादसे की विस्तृत जांच औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के साथ माखननगर थाना पुलिस द्वारा की जाएगी। जांच में हादसे की परिस्थितियों, सुरक्षा व्यवस्था, मजदूर की नियुक्ति और उससे जुड़े दस्तावेजों सहित अन्य पहलुओं को देखा जाएगा।

जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। यदि जांच में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन, लापरवाही या अन्य किसी प्रकार की चूक सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

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