हरियाणा में न्यूनतम मजदूरी बढ़ोतरी से असंतुष्ट कर्मचारी, गुरुग्राम में विरोध प्रदर्शन तेज

हरियाणा में न्यूनतम मजदूरी बढ़ने के बाद भी श्रमिकों में भारी रोष, 12 घंटे की शिफ्ट और दमकल विभाग में अप्रशिक्षित चालकों की तैनाती के खिलाफ गुरुग्राम में तेज हुआ प्रदर्शन।
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मजदूर/कर्मचारी (सांकेतिक चित्र)Graphic- The Mooknayak
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नई दिल्ली: नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में उचित वेतन की मांग को लेकर हो रहे कारखाने के मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के बीच, अब गुरुग्राम में भी असंतोष गहराने लगा है। नगर निगम कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि हरियाणा सरकार द्वारा घोषित नई मजदूरी दरें मौजूदा महंगाई के हिसाब से बिल्कुल नाकाफी हैं।

राज्य सरकार ने 9 अप्रैल को विभिन्न श्रेणियों के न्यूनतम वेतन में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत अकुशल श्रमिकों का मासिक वेतन 11,274 रुपये से बढ़ाकर 15,220 रुपये कर दिया गया है। वहीं, कुशल श्रमिकों का वेतन 13,704 रुपये से बढ़ाकर 18,500 रुपये हो गया है।

हालांकि, श्रमिकों का तर्क है कि यह वेतन वृद्धि बाजार की वास्तविकता से बहुत दूर है। उनका कहना है कि उपभोक्ता वस्तुओं और आवास की बढ़ती महंगाई दर के सामने यह मामूली इजाफा उनके जीवन यापन के लिए अपर्याप्त है।

नगर निगम यूनियन के नेता वसंत कुमार ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गुरुग्राम जैसे महंगे शहर में इतने कम वेतन पर कोई कैसे गुजारा कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नए श्रम कानून, एलपीजी संकट और काम करने की उचित परिस्थितियों का अभाव मजदूरों के हित में नहीं है और इसके खिलाफ उनका विरोध लगातार जारी रहेगा।

मानेसर विरोध प्रदर्शन के बाद से श्रमिकों के मुद्दों से निपटने के सरकार के तरीके को लेकर कर्मचारियों में भारी रोष है। प्रदर्शनकारी श्रमिकों के अनुसार, इसके विरोध में संबद्ध नगर निगम और राज्य के कर्मचारियों ने 16 अप्रैल को तीन घंटे के कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है।

केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए नए श्रम कानूनों का भी मजदूर कड़ा विरोध कर रहे हैं। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के जिला अध्यक्ष सुरेश नौहरा ने इसका कारण बताते हुए कहा कि ये कानून बिना ओवरटाइम दिए 12 घंटे की शिफ्ट की अनुमति देते हैं और यूनियनों पर प्रतिबंध लगाते हैं।

नौहरा के अनुसार, इन कानूनों से एक सदस्य को अपनी बात ठीक से रखने का मौका नहीं मिलेगा और इसका सीधा फायदा केवल कॉरपोरेट घरानों को होगा, इसलिए इन्हें खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई कारखाने 12 घंटे की शिफ्ट शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पानीपत में हुए जोरदार विरोध के कारण वे फिलहाल ऐसा नहीं कर पाए।

इससे पहले 23 फरवरी को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) की पानीपत रिफाइनरी में भी बड़ा आंदोलन देखने को मिला था। वहां बेहतर वेतन और काम करने की स्थिति की मांग को लेकर कम से कम 30,000 संविदा कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया था।

यूनियनों का मानना है कि हरियाणा के इस महत्वपूर्ण औद्योगिक गलियारे में पानीपत के सफल आंदोलन ने राज्य की अन्य विनिर्माण इकाइयों में ऐसे श्रमिक विरोधी प्रयासों को अस्थायी रूप से रोक दिया है।

इन सब के बीच नगर निगम यूनियन के सदस्य दमकल विभाग के कर्मचारियों के आंदोलन का भी पूर्ण समर्थन कर रहे हैं। दमकल कर्मी अपनी नौकरी नियमित करने और बेहतर वेतन की मांग कर रहे हैं, साथ ही वे फायर इंजन चलाने के लिए अप्रशिक्षित चालकों की तैनाती का भी कड़ा विरोध कर रहे हैं।

गुरुग्राम के सेक्टर 29 फायर स्टेशन के सामने चल रहा धरना मंगलवार को अपने सातवें दिन में प्रवेश कर गया। दोपहर के समय लगभग 200 नगर निगम यूनियन के सदस्य भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और अपना समर्थन जताया।

गुरुग्राम दमकल विभाग यूनियन के अध्यक्ष साहुन खान ने सरकार के एक फैसले पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि फायर इंजन संचालित करने के लिए हरियाणा रोडवेज के अप्रशिक्षित ड्राइवरों और अनुभवहीन युवाओं को तैनात करने का सरकार का अस्थायी कदम जनता की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।

सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य सचिव जोगिंदर करोथा ने बताया कि रोडवेज चालकों और प्रशिक्षण केंद्रों के युवाओं को अग्निशमन उपकरण संचालित करने का कोई पूर्व प्रशिक्षण नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी बड़ी आग की घटना के दौरान प्रशिक्षित कर्मियों की कमी से जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केवल राज्य सरकार की होगी।

विरोध स्थल पर मीडिया को संबोधित करते हुए, यूनियन के प्रतिनिधियों ने अपनी पुरानी मांगों को एक बार फिर मजबूती से दोहराया। इन मांगों में गंभीर रूप से घायल कर्मियों के लिए मुफ्त चिकित्सा उपचार, उनके ठीक होने की अवधि को सक्रिय ड्यूटी मानना और पुलिस कर्मियों के बराबर 5,000 रुपये का मासिक जोखिम भत्ता देना शामिल है। इसके अतिरिक्त वे चिकित्सा, वर्दी और धुलाई भत्ते के समय पर भुगतान के साथ-साथ अपने रोजगार को नियमित करने की भी मांग कर रहे हैं।

इन प्रदर्शनों और आरोपों के बीच, अग्नि सुरक्षा अधिकारी जय नारायण ने कर्मचारियों की भारी कमी की बात को स्वीकार किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान स्थिति को संभालने के लिए फिलहाल उनके पास ड्यूटी पर आवश्यक संख्या में ड्राइवर और फायरमैन मौजूद हैं।

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