
शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेने वाली केंद्र सरकार की प्रस्तावित 'वीबी-जी राम जी' (VB-G RAM G) योजना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। राज्य सरकार का मानना है कि इस नए बदलाव से प्रदेश के लगभग 12 लाख ग्रामीण मजदूरों के रोजगार और आजीविका पर सीधा और नकारात्मक असर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस मसले पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि ग्रामीण श्रमिकों के हितों और उनकी रोजी-रोटी के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया है कि राज्य सरकार इस गंभीर मुद्दे और अपनी सभी चिंताओं को केंद्र सरकार के समक्ष पूरी मजबूती के साथ उठाएगी।
दरअसल, केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को आगामी 30 जून तक इस नई योजना को अधिसूचित करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि जो राज्य इस नई व्यवस्था का हिस्सा बनेंगे, केवल उन्हें ही भविष्य में इस मद के तहत बजट का आवंटन किया जाएगा।
इस नई योजना के प्रारूप का बारीकी से अध्ययन करने के लिए प्रदेश सरकार ने ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया है। यह समिति योजना के हर पहलू की विस्तार से समीक्षा करेगी और 29 जून तक मुख्यमंत्री को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी।
राज्य सरकार ने केंद्र द्वारा प्रस्तावित नई मजदूरी दरों पर सबसे अधिक आपत्ति जताई है। नई व्यवस्था के तहत गैर-जनजातीय क्षेत्रों के लिए 247 रुपये और जनजातीय क्षेत्रों के लिए 309 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी तय की गई है। हिमाचल सरकार का तर्क है कि प्रदेश की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की उच्च लागत को देखते हुए यह दिहाड़ी बेहद नाकाफी है।
इसके अलावा राज्य ने यह भी जोरदार मांग की है कि मनरेगा की ही तर्ज पर मांग-आधारित रोजगार गारंटी प्रणाली को आगे भी अनिवार्य रूप से जारी रखा जाना चाहिए।
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