UP: मुजफ्फरनगर में डेढ़ साल से बंधक 12 मजदूर छुड़ाए गए, सूखी रोटी खाकर करते थे काम

अच्छी नौकरी और वेतन के लालच में बने बंधुआ मजदूर, मुजफ्फरनगर पुलिस ने 1 से डेढ़ साल से कैद 12 लोगों को नर्क जैसी फैक्ट्री से कराया आजाद।
UP Police rescue operation, bonded labourers rescued.
मुजफ्फरनगर में नौकरी के नाम पर बड़ा धोखा! 1.5 साल से बंधक 12 मजदूरों को पुलिस ने कराया मुक्त। सूखी रोटी खाकर और मार सहकर करते थे काम।(Ai Image)
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहाँ तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव स्थित एक फैक्ट्री में पिछले लंबे समय से बंधक बनाकर रखे गए 12 मजदूरों को पुलिस ने मुक्त कराया है। इन छुड़ाए गए मजदूरों में कुछ नाबालिग भी शामिल हैं, जिनसे बेहद अमानवीय परिस्थितियों में जबरन काम कराया जा रहा था।

इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, इस फैक्ट्री का मुख्य संचालक अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और उसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।

सोमवार को इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। ग्रामीण एसपी अक्षय संजय महाडिक के कुशल निर्देशन में तितावी पुलिस, ग्रामीण एसओजी, श्रम विभाग के अधिकारियों और राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। एक गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने फैक्ट्री परिसर में छापेमारी कर उन मजदूरों को आजाद कराया, जो करीब एक से डेढ़ साल से वहां कैद थे।

मुक्त कराए गए ये सभी पीड़ित बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा और राजस्थान के रहने वाले हैं। जांचकर्ताओं के सामने अपना दर्द बयां करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें अच्छी नौकरी, 10,000 से 12,000 रुपये का मासिक वेतन और रहने-खाने की बेहतरीन सुविधा का लालच दिया गया था। लेकिन फैक्ट्री पहुंचने के बाद उनके साथ धोखा हुआ और उन्हें बंधुआ मजदूर बना दिया गया।

इन मजदूरों की आपबीती रूह कंपा देने वाली है। उन्होंने पुलिस को बताया कि उन्हें दिन में केवल एक बार भोजन दिया जाता था, जिसमें अक्सर उन्हें सिर्फ सूखी रोटियां ही नसीब होती थीं। इसके अलावा उन्हें फैक्ट्री परिसर से बाहर कदम रखने की भी सख्त मनाही थी।

अगर कोई मजदूर अपने हक की मजदूरी मांगता या वहां से भागने की कोशिश करता, तो उसे बेरहमी से पीटा जाता था। इसके लिए आरोपी लोहे की छड़ और डंडों का इस्तेमाल करते थे। हद तो तब हो जाती थी जब बीमार पड़ने पर भी उन्हें कोई चिकित्सा सुविधा या दवा तक नहीं दी जाती थी और उसी हालत में काम करने को मजबूर किया जाता था।

मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार ने बताया कि पुलिस ने शिवा त्यागी और प्रदीप बालियान नाम के दो आरोपियों को धर दबोचा है। वहीं, फैक्ट्री का मुख्य संचालक अंकित बालियान अभी फरार है। पूछताछ के दौरान पकड़े गए आरोपी शिवा त्यागी ने यह कबूल किया है कि वे रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों पर काम की तलाश में भटक रहे लाचार लोगों को अपना शिकार बनाते थे।

इस खौफनाक मामले में पुलिस ने कठोर कदम उठाए हैं। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), बाल श्रम अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कड़ी एफआईआर दर्ज की गई है।

मेरठ जोन के एडीजी भानु भासकर ने इस पूरी घटना पर सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बंधुआ मजदूरी किसी भी रूप में सीधे तौर पर गुलामी ही है। जो लोग बेबस मजदूरों को बंधक बनाकर, उनके साथ हिंसा करके और उन्हें बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखकर उनका शोषण करते हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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