सीवर में 593 कर्मियों ने गवांई जान, सरकार ने 261 मौतें छुपाईं: झूठे आंकड़ों और अनदेखी का विरोध करने सडकों पर आए सफाईकर्मी

सफाई कर्मचारी आंदोलन की मांग की है कि सरकार NAMASTE योजना की विफलता को स्वीकार करें और मान लें कि इस योजना के बावजूद मौतों में असामान्य वृद्धि हुई है।
जंतर मंतर पर सीवर-सेप्टिक तनकों में हो रहे हादसों को लेकर आक्रोश जाहिर करने हुए लोग।
जंतर मंतर पर सीवर-सेप्टिक तनकों में हो रहे हादसों को लेकर आक्रोश जाहिर करने हुए लोग।
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नई दिल्ली- मंगलवार 4 अगस्त को राजधानी में 10 से अधिक राज्यों के सफाई कर्मचारियों, सीवर और सेप्टिक टैंक में मारे गए लोगों के परिवारों, नागरिक समाज के सदस्यों, लेखकों और छात्रों ने इकट्ठा होकर नाली और सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए लोगों को जबरन धकेलने की अवैध प्रथा और इससे होने वाली मौतों की कड़ी निंदा की।

सफाई कर्मचारी आंदोलन (एसकेए) द्वारा जंतर मंतर पर आयोजित इस प्रदर्शन में आधिकारिक आंकड़ों में भारी विसंगति पर फोकस किया गया। 21 जुलाई को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री रामदास आठवले ने संसद में बताया कि जनवरी 2021 से जून 2026 के बीच नाली और सेप्टिक टैंक दुर्घटनाओं में 332 लोगों की मौत हुई। वहीं एसकेए के अपने आंकड़ों के अनुसार इसी अवधि में 593 लोगों की मौत हुई है। संगठन का आरोप है कि सरकार ने 261 मौतों को छुपाया है और उन्हें कम करके आंका है।

एसकेए के अनुसार, 2026 के पहले 207 दिनों में ही सीवर और सेप्टिक टैंक में 113 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें अकेले जुलाई महीने 15 मौतें शामिल हैं। संगठन ने कहा, “इतनी बड़ी संख्या में मौतों को इतनी बेशर्मी से छुपाना सरकार की आपराधिक हरकत है। 261 लोगों और उनके परिवारों को अदृश्य बना देना शर्मनाक है।”

एसकेए ने यह आंकड़े सांसदों को सौंपे हैं और उनसे इस मुद्दे को संसद में उठाने की अपील की है। संगठन ने आंकड़ों को छुपाने की कोशिश को राष्ट्रीय शर्म और अस्पृश्यता का कृत्य बताया है। उसका कहना है कि मौतों को रोकने के बजाय सरकार सच्चाई को छुपाने पर ही ध्यान दे रही है। एसकेए ने इस प्रथा को अवैध बताया है और उच्च मृत्यु दर को जातिगत आधार पर जारी काम से जोड़ा है, जबकि मैनुअल स्कैवेंजिंग पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून मौजूद हैं।

संगठन ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

नाली और सेप्टिक टैंक मौतों की जांच के लिए संसदीय स्थायी समिति का गठन, जिसमें सरकार को मौतों, मुकदमों, मुआवजे और पुनर्वास पर संसद में वार्षिक रिपोर्ट सौंपनी होगी।

नाली और सेप्टिक टैंक मौतों को तुरंत रोकने के लिए समयबद्ध राष्ट्रीय योजना।

NAMASTE योजना की विफलता को स्वीकार करना और यह मानना कि इस योजना के बावजूद मौतों में असामान्य वृद्धि हुई है।

राष्ट्रीय संयोजक बेजवाड़ा विल्सन ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस विफलता को स्वीकार करना चाहिए और तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। प्रदर्शन “#STOP KILLING US” के नारे के साथ समाप्त हुआ।

क्या है नमस्ते (NAMASTE) योजना?

नमस्ते (NAMASTE) योजना सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई को मशीनीकृत करने, खतरनाक सफाई कार्यों को समाप्त करने और सफाई मित्रों (स्वच्छता कर्मियों) को सुरक्षा किट, कौशल प्रशिक्षण एवं स्वास्थ्य बीमा प्रदान करने की एक केंद्रीय क्षेत्र पहल है। इसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा है। इसे वर्ष 2022 में केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में लॉन्च किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में स्वच्छता/सफाई संबंधी कार्यों में होने वाली मौतों को शून्य करना एवं स्वच्छता के सभी कार्य कुशल श्रमिकों द्वारा कराना था साथ ही कोई भी सफाई कर्मचारी मानव मल के सीधे संपर्क में न आए, यह सुनिश्चित करना है।

नमस्ते योजना पूरी तरह बंद या कागजों पर असफल घोषित नहीं हुई है, लेकिन इसे गंभीर क्रियान्वयन अंतराल, धरातल पर सुस्ती और सीवर में लगातार हो रही मौतों के कारण भारी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। कड़े कानूनों और इस योजना के दावों के बावजूद सेप्टिक टैंक और सीवर की सफाई के दौरान जहरीली गैसों से श्रमिकों की मौतें पूरी तरह नहीं रुकी हैं। संसद और संसदीय समितियों की रिपोर्ट के अनुसार, चिन्हित सफाई कर्मचारियों की तुलना में बहुत कम लोगों को वास्तविक रूप से पीपीई किट (PPE Kits) और आधुनिक सुरक्षा उपकरण मिल पाए हैं।

शहरी स्थानीय निकायों में आधुनिक मशीनों और रोबोटिक सफाई उपकरणों की खरीद और उनका संचालन अभी भी सुस्त है, जिसके चलते निजी ठेकेदार आज भी जोखिम भरा मैनुअल काम करवाते हैं। अवैध रूप से हाथ से मैला ढोने या जोखिम भरे काम में मजदूरों को उतारने वाले ठेकेदारों और निकायों पर प्रभावी कानूनी कार्रवाई या सजा की दर बहुत कम है।

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