MP: चार गुना मुआवजे की मांग पर अड़े किसान, झाबुआ कलेक्ट्रेट में अनिश्चितकालीन धरना जारी

बदनावर-टिमरवानी फोरलेन के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध; महिलाओं समेत किसान खुले आसमान के नीचे डटे, लिखित आश्वासन मिलने तक धरना खत्म नहीं करने का ऐलान
MP: चार गुना मुआवजे की मांग पर अड़े किसान, झाबुआ कलेक्ट्रेट में अनिश्चितकालीन धरना जारी
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भोपाल। मध्यप्रदेश के झाबुआ में बदनावर-टिमरवानी फोरलेन निर्माण के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के मुआवजे को लेकर असंतुष्ट किसानों का झाबुआ कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। गुरुवार से शुरू हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान अपने परिवारों के साथ पहुंचे हैं, जिनमें महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय है। मुआवजे की राशि को लेकर किसानों का कहना है कि उनकी जमीन का उचित मूल्य नहीं लगाया गया है और उन्हें नियमानुसार बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा दिया जाना चाहिए। किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे।

खुले आसमान के नीचे गुजरी पहली रात

धरने पर बैठे किसानों ने गुरुवार की रात कलेक्ट्रेट परिसर में ही खुले आसमान के नीचे गुजारी। दिनभर प्रदर्शन और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद किसान अपने घरों को लौटने के बजाय धरना स्थल पर ही डटे रहे। किसानों ने सामूहिक रूप से भोजन बनाने की व्यवस्था की और रात का खाना कलेक्ट्रेट परिसर में ही तैयार किया गया। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि यह केवल कुछ किसानों का आंदोलन नहीं है, बल्कि उन सभी परिवारों की लड़ाई है जिनकी जमीन फोरलेन निर्माण परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही है और जो प्रस्तावित मुआवजे से संतुष्ट नहीं हैं।

गुरुवार रात धरना स्थल पर करीब 30 किलोग्राम आटे की बाटी तैयार की गई, जबकि लगभग 7 किलोग्राम चावल भी पकाया गया। महिलाओं और पुरुषों ने मिलकर भोजन बनाने और वितरण की व्यवस्था संभाली। शुक्रवार सुबह भी किसानों ने धरना स्थल पर ही दिन की शुरुआत की। करीब 10 लीटर दूध की चाय तैयार की गई और पोहे का नाश्ता बनाकर धरने में शामिल लोगों को वितरित किया गया। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक वे सामूहिक व्यवस्था के जरिए धरना जारी रखेंगे।

बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजे की मांग पर अड़े किसान

धरने का मुख्य मुद्दा फोरलेन निर्माण के लिए अधिग्रहित की जा रही कृषि भूमि का मुआवजा है। किसानों का आरोप है कि उन्हें उनकी जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि भूमि अधिग्रहण के मामले में लागू प्रावधानों के अनुसार उन्हें बाजार मूल्य से चार गुना तक मुआवजा मिलना चाहिए। किसानों का तर्क है कि कृषि भूमि केवल उनकी संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार की आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का आधार है। ऐसे में कम मुआवजे के बदले जमीन छोड़ना उनके लिए आर्थिक रूप से गंभीर संकट पैदा कर सकता है।

किसानों के अनुसार, सड़क निर्माण परियोजना के बाद जमीन का बड़ा हिस्सा चला जाने से खेती प्रभावित होगी और कई परिवारों के पास आजीविका के सीमित साधन रह जाएंगे। इसलिए वे चाहते हैं कि मुआवजे का निर्धारण पारदर्शी तरीके से हो और वर्तमान बाजार मूल्य को ध्यान में रखते हुए उचित राशि दी जाए। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी आपत्तियों और दावों को गंभीरता से सुना जाए और केवल मौखिक आश्वासन के बजाय लिखित रूप में समाधान की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए।

एसडीएम और एनएचएआई अधिकारियों ने की थी चर्चा

धरने के पहले दिन गुरुवार को मेघनगर एसडीएम अवनधती प्रधान और एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवेंद्र चापडेकर भी धरना स्थल पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने किसानों से चर्चा कर उन्हें अपनी आपत्तियां और मांगें आर्बिट्रेशन आवेदन के माध्यम से रखने की सलाह दी। अधिकारियों का कहना था कि संबंधित प्रक्रिया के तहत किसान अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं और मुआवजे को लेकर अपनी आपत्तियों पर कानूनी एवं प्रशासनिक स्तर पर विचार कराया जा सकता है।

हालांकि, किसानों का कहना है कि वे केवल प्रक्रिया की जानकारी नहीं, बल्कि मुआवजे के मुद्दे पर स्पष्ट समाधान चाहते हैं। किसानों के प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि उनकी जमीन का उचित मूल्यांकन नहीं किया गया तो परियोजना के कारण प्रभावित परिवारों के सामने आर्थिक समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। इसी वजह से उन्होंने आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है।

कलेक्टर से वार्ता में कुछ मुद्दों पर बनी सहमति

किसान संघ के जिला मंत्री वरदीचंद पाटीदार के नेतृत्व में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने झाबुआ कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट से भी मुलाकात की। इस दौरान फोरलेन निर्माण से जुड़े कई स्थानीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। किसानों ने खेतों तक पहुंचने के रास्ते, जल निकासी की व्यवस्था और सड़क अथवा मार्ग की ऊंचाई जैसे विषयों को भी प्रशासन के सामने रखा।

बताया गया कि खेतों के रास्तों, ड्रेनेज और मार्ग की ऊंचाई से जुड़े कुछ मुद्दों पर चर्चा के दौरान सहमति बनी है। किसानों का कहना है कि सड़क निर्माण के बाद यदि खेतों तक पहुंचने के पर्याप्त रास्ते नहीं रहे या जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो खेती पर अतिरिक्त प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इन तकनीकी और स्थानीय समस्याओं का समाधान भी उनके लिए महत्वपूर्ण है।

हालांकि, सबसे अहम मुद्दे यानी मुआवजे की राशि पर सहमति नहीं बन सकी। इसी कारण कलेक्टर के साथ हुई चर्चा के बावजूद किसानों ने धरना समाप्त करने से इनकार कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे तब तक आंदोलन स्थल से नहीं हटेंगे, जब तक मुआवजे के संबंध में उनकी मांगों पर स्पष्ट और लिखित आश्वासन नहीं मिलता।

आंदोलन में बड़ी संख्या शामिल हैं महिलाएं

धरने में बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी ने आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया है। महिलाएं न केवल प्रदर्शन में शामिल हैं, बल्कि धरना स्थल पर भोजन और अन्य व्यवस्थाओं में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। कई परिवारों के लिए जमीन ही आय और सुरक्षा का प्रमुख साधन है, इसलिए भूमि अधिग्रहण और मुआवजे का मुद्दा सीधे पूरे परिवार को प्रभावित करता है।

किसानों का कहना है कि आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि अपनी जमीन के उचित मूल्य और भविष्य की सुरक्षा के लिए किया जा रहा है। यही कारण है कि पुरुषों के साथ महिलाएं भी कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठी हैं। प्रदर्शनकारियों ने दोहराया कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रख रहे हैं, लेकिन उचित समाधान मिलने तक पीछे नहीं हटेंगे।

लिखित आश्वासन तक धरना जारी रखने का ऐलान

फिलहाल किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल मौखिक भरोसे पर धरना समाप्त नहीं करेंगे। उनकी मांग है कि मुआवजे सहित प्रमुख मुद्दों पर प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से लिखित आश्वासन दिया जाए। किसानों का कहना है कि पहले भी कई मामलों में आश्वासन दिए जाते रहे हैं, इसलिए इस बार वे स्पष्ट दस्तावेजी जवाब चाहते हैं।

शुक्रवार को दूसरे दिन भी कलेक्ट्रेट परिसर में किसान डटे रहे और आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा करते रहे। प्रशासन की ओर से किसानों को समझाने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन मुआवजे के मुद्दे पर सहमति बनना अभी बाकी है। ऐसे में बदनावर-टिमरवानी फोरलेन परियोजना से प्रभावित किसानों का यह आंदोलन आने वाले दिनों में और लंबा खिंच सकता है। अब सभी की नजर प्रशासन और किसानों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी है।

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