MP: 10 हजार पौधें लगाने का वादा कर काटे 700 पेड़! NGT ने जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित

कलियासोत डैम स्थित स्टेट डेयरी फार्म में पौधरोपण के लिए जमीन तैयार करने के नाम पर पेड़ काटने का मामला; छह सप्ताह में मांगी तथ्यात्मक और कार्रवाई रिपोर्ट, 5 अक्टूबर को अगली सुनवाई
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भोपाल। कलियासोत डैम क्षेत्र स्थित स्टेट डेयरी फार्म में पौधरोपण के लिए जमीन तैयार करने के नाम पर कथित तौर पर 700 से अधिक पेड़ों की कटाई और उन्हें जेसीबी से जड़ समेत उखाड़े जाने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गंभीर रुख अपनाया है। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने मामले को पर्यावरण से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए मध्यप्रदेश सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। ट्रिब्यूनल ने मौके की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए तीन सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन भी किया है। समिति को मौके का निरीक्षण कर छह सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट के साथ अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

8 एकड़ जमीन पर लगाए जाने थे 10 हजार पौधे

मामला कलियासोत डैम क्षेत्र स्थित स्टेट डेयरी फार्म की करीब आठ एकड़ जमीन से जुड़ा है। याचिकाकर्ता प्रभात पांडे ने एनजीटी के समक्ष दायर याचिका में बताया कि इस जमीन पर नगर निगम द्वारा करीब 10 हजार पौधे लगाए जाने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए जमीन तैयार करने का काम अर्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी को टेंडर के माध्यम से दिया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पौधरोपण के लिए जमीन तैयार करने की प्रक्रिया में वहां पहले से मौजूद पेड़-पौधों को संरक्षित करने के बजाय बड़े पैमाने पर उन्हें हटाया गया।

याचिकाकर्ता के अनुसार, मौके पर मौजूद 700 से अधिक पेड़ों को काटने अथवा नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ कई परिपक्व पेड़ों को जेसीबी मशीनों की मदद से जड़ समेत उखाड़ दिया गया। इस कार्रवाई में बबूल, बेर, शीशम, गूलर और महुआ सहित कई प्रजातियों के पेड़ों को नुकसान पहुंचाए जाने का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि जिस जमीन पर नए पौधे लगाए जाने थे, वहां पहले से विकसित पेड़ों और प्राकृतिक वनस्पति को हटाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है।

पौधरोपण के लिए पुराने पेड़ हटाने पर उठे सवाल

मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह उठाया गया है कि जिस उद्देश्य से पौधरोपण किया जाना था, उसी प्रक्रिया में पहले से मौजूद परिपक्व पेड़ों को क्यों हटाया गया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि जमीन को पौधरोपण के लिए तैयार करने के दौरान पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पेड़ों को बचाने के प्रयास नहीं किए गए। उनका कहना है कि नए पौधे लगाने के लिए पुराने और विकसित पेड़ों को जड़ से हटाना पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य के विपरीत है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि पेड़ों को हटाने से पहले मध्यप्रदेश वृक्ष (नगरीय क्षेत्र) संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत आवश्यक अनुमति नहीं ली गई। अब यह तथ्य भी जांच का हिस्सा होगा कि मौके पर पेड़ों की कटाई या उन्हें उखाड़ने के लिए संबंधित विभागों से वैधानिक अनुमति ली गई थी या नहीं और यदि अनुमति ली गई थी तो उसकी शर्तों का पालन किया गया या नहीं।

NGT ने बनाई तीन सदस्यीय संयुक्त समिति

मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने मौके की जांच के लिए तीन सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया है। समिति में कलेक्टर के प्रतिनिधि, पर्यावरण एवं वानिकी वनमंडल के संभागीय वन अधिकारी और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक प्रतिनिधि को शामिल किया गया है।

समिति को मौके का निरीक्षण कर वहां की वास्तविक स्थिति का आकलन करना होगा। इसके साथ ही उसे यह भी देखना होगा कि कितने पेड़ काटे गए या उखाड़े गए, किस प्रकार की पेड़ प्रजातियां प्रभावित हुईं, पेड़ों को हटाने के लिए कोई अनुमति ली गई थी या नहीं और पौधरोपण के लिए जमीन तैयार करने की पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं।

छह सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट

एनजीटी ने संयुक्त समिति को छह सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में मौके की तथ्यात्मक स्थिति के साथ-साथ संबंधित विभागों और एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई का भी विवरण देना होगा। इससे यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि स्टेट डेयरी फार्म की जमीन पर वास्तव में कितने पेड़ों को नुकसान पहुंचा और इस संबंध में जिम्मेदार एजेंसियों ने क्या कदम उठाए हैं।

ट्रिब्यूनल ने मामले से जुड़े प्रतिवादियों को भी छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यानी अब संबंधित सरकारी विभागों और अन्य पक्षों को एनजीटी के सामने अपना पक्ष रखना होगा और पेड़ों को हटाने तथा पौधरोपण के लिए जमीन तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज और तथ्य प्रस्तुत करने होंगे।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा मामला

कलियासोत डैम क्षेत्र भोपाल के महत्वपूर्ण हरित और जल पर्यावरण क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में स्टेट डेयरी फार्म की जमीन पर बड़ी संख्या में पेड़ों को हटाए जाने के आरोप ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर सवाल खड़े किए हैं। एक ओर शहर में बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नए पौधे लगाने के लिए पहले से मौजूद पेड़ों को हटाने के आरोप सामने आए हैं। इसी विरोधाभास को लेकर मामला एनजीटी तक पहुंचा है।

अब संयुक्त समिति की जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि पेड़ों को हटाने की वास्तविक स्थिति क्या थी और पूरी प्रक्रिया में पर्यावरणीय तथा कानूनी नियमों का पालन किया गया या नहीं। एनजीटी के निर्देश के बाद संबंधित विभागों की कार्रवाई और समिति की रिपोर्ट पर इस मामले की आगे की दिशा निर्भर करेगी।

5 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

एनजीटी ने संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने और संयुक्त समिति को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। उस समय ट्रिब्यूनल के समक्ष समिति की रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर मामले की आगे सुनवाई होगी।

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